close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीएम पटना में राहुल गांधी की रैली में आमंत्रित

3 फरवरी की रैली को सफल बनाने के लिए कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.

राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीएम पटना में राहुल गांधी की रैली में आमंत्रित
कांग्रेस विजीत राज्यों के सीएम को गांधी मैदान में आमंत्रित किया गया है. (फाइल फोटो)

पटनाः 3 फरवरी की रैली को सफल बनाने के लिए कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. पार्टी की ओर से महागठबंधन के नेताओं के अलावा हाल के दिनों में कांग्रेस विजीत राज्यों के सीएम को भी निमंत्रण दिया गया है. पार्टी इन तीनों राज्यों के सीएम को राहुल गांधी के विजय मॉडल के रुप में पेश करने की तैयारी कर रही है.

बिहार में कांग्रेस अपने लिए विजय द्वार खोज रही है. पार्टी ने इसके लिए 3 फरवरी की तारीख को तय किया है. पार्टी की ओर पटना के गांधी मैदान में बडी जन आकांक्षा रैली आयोजित की जा रही है. रैली को राहुल गांधी संबोधित करेंगे. रैली सफल हो इसके लिए महागठबंधन के नेताओं के साथ साथ तीन विजयी कांग्रेसी राज्यों  के सीएम को भी निमंत्रण दिया गया है. राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ और छत्तीसगढ के सीएम भूपेश बघेल भी शामिल होंगे. 

बिहार चुनाव प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष सांसद अखिलेश सिंह कहते हैं कि तीनों राज्यों के सीएम को बिहार बुलाने का मकसद बिलकुल साफ है. हम तीनों राज्यों के सीएम को बिहार की जनता की तरफ से सम्मानित करना चाहते हैं. पटना के गांधी मैदान में होने वाली रैली प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी की विदाई रैली और राहुल गांधी की स्वागत रैली साबित होगी. रैली में महागठबंधन के सभी दलों के नेताओं को निमंत्रण दिया गया है. साथ ही साथ राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीएम भी इस रैली में शामिल होंगे.

इधर कांग्रेस की ओर से अपनी रैली को सफल बनाने के लिए तीन राज्यों के सीएम को बुलाये जाने को लेकर बीजेपी ने चुटकी ली है. बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा है कि कांग्रेस अगर तीन राज्यों की जीत को राहुल मॉडल के रुप में पेश करने की कोशिश कर रही है तो ये पार्टी की गलतफहमी है. मध्यप्रदेश और राजस्थान में हार और जीत का फासला बेहद कम रहा है. बिहार में कांग्रेस जेल में बंद लालू प्रसाद के आगे चरण वंदना कर रही है वहीं जेल से बाहर तेजस्वी यादव की  पिछलग्गू बनी हुई है. कांग्रेस की हालत ये है कि रैली को सफल बनाने के लिए अपराधियों का सहारा लेना पर रहा है.

कुल मिलाकर कहा जाय तो बिहार में 28 साल बाद होने वाली पार्टी की रैली को सफल बनाने के लिए कांग्रेस कोई भी कोर कसर नही छोडना चाहती है. ऐसे में तीन कांग्रेसी राज्यों के सीएम बिहार में आकर क्या कमाल दिखाएंगे देखना दिलचस्प होगा.