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बिहार: बिना कागज धड़ल्ले चल रही निगम की गाड़ियां, 26 साल से नहीं जमा हुआ है रोड टैक्स

जितने जरुरी कागजात हैं, उनमें से एक भी नहीं होने के बाद भी ये गाड़ियां धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ती हैं.

बिहार: बिना कागज धड़ल्ले चल रही निगम की गाड़ियां, 26 साल से नहीं जमा हुआ है रोड टैक्स
इन गाड़ियों के पास प्रदूषण जांच का प्रमाण पत्र भी नहीं है.

पंकज, रक्सौल: संसोधित ट्रैफिक कानून (New Traffic Rules 2019) और उसके उल्लंघन पर लगने वाले भारी जुर्माने से आम लोग बेहद परेशान हैं, लेकिन सरकारी विभाग के अफसर और कर्मचारियों को शायद इस कानून से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. क्योंकि कई जगह पर आपको सरकारी विभाग की गाड़ियां ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हुए आसानी से नजर आ जाएंगे. यकीन न हो तो रक्सौल (Rxaul) नगर परिषद पहुंच जाइये, जहां की करीब दर्जन भर गाड़ियां वर्षों से बिना रजिस्ट्रेशन के वर्षों से धड़ल्ले से दौड़ रही हैं.

इन गाड़ियों की खरीद 1993 से 2018 तक की गई, लेकिन इनमें से किसी भी गाड़ी का न तो तब रजिस्ट्रेशन कराया गया, न ही अब इनका रजिस्ट्रेशन हुआ है. रजिस्ट्रेशन ही नहीं है तो जाहिर है इन गाड़ियों पर न तो नंबर है, न ही इसके इन्श्योरेंस है. इतना ही नहीं इन गाड़ियों के पास प्रदूषण जांच का प्रमाण पत्र भी नहीं है.

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जितने जरुरी कागजात हैं, उनमें से एक भी नहीं होने के बाद भी ये गाड़ियां धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ती हैं. वहीं, आम आदमी के द्वारा ट्रैफिक नियम तोड़ने पर अक्सर ट्रैफिक पुलिस वाले चालान काटते हैं. कई बार तो ऐसा भी देखा गया है कि नौबत मारपीट तक आ जाती है.

नगर परिषद की इन गाड़ियों में तीन ट्रैक्टर, छह टीपर, एक बॉबकट और सीढ़ी गाड़ी शामिल है. ट्रैफिक नियमों को शान से तोड़ती इन गाड़ियों का पिछले 26 सालों से रोड टैक्स भी नहीं भरा गया है. साथ ही अन्य राजस्व का भी चूना लगातार सरकारी खजाने को लग रहा है. फिर भी किसी को इसकी सुध नहीं है. नए ट्रैफिक नियम के बहाने लोगों को लिए परेशानी खड़ी करने वाला परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस इन गाड़ियों के मामले में लापरवाह बना हुआ है.

हद तो यह है कि नगर परिषद के मॉनिटरिंग अधिकारी और कार्यपालक पदाधिकारी को गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन होने का पता तक नहीं है. जब उनसे गाड़ियों के बारे में सवाल किया जाता है तो वे उंगलियों पर गाड़ियों की संख्या गिनने लगते हैं. दूसरी तरफ नगर परिषद के बड़ा बाबू का तर्क आप सुनेंगे तो हंसे बिना नहीं रह सकेंगे. उनका इस बारे में कहना है कि चूंकि नगर परिषद की गाड़ियों का कोई व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए उन गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया है.

तो क्या गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन सिर्फ व्यावसायिक इस्तेमाल वाली गाड़ियों के लिए किया जाना जरुरी है. अगर ऐसा है तो फिर सड़कों पर दौड़ने वाली आम लोगों को भी ट्रैफिक नियमों के पालन की भला क्या जरुरत है? वैसे हैरान मत होइए, रक्सौल नगर परिषद तो सरकारी विभागों का एक आईना भर है. जांच हो तो ऐसे बहुत से विभाग मिलेंगे. 

-- Dharmendra Mani Rajesh, News Desk