रांची: दिव्यांगता को पीछे छोड़ सबका दिल जीता, सिंगिग से लेकर ट्रिपल ड्रम बजाने में हैं माहिर

कहते हैं प्रतिभा किसी का मोहताज नहीं होती. इसके लिए हौसलों की जरूरत होती है. 22 वर्षीय शिव शंकर लोहरा ने इसे सच साबित कर दिखाया है.

रांची: दिव्यांगता को पीछे छोड़ सबका दिल जीता, सिंगिग से लेकर ट्रिपल ड्रम बजाने में हैं माहिर
शिवशंकर एक सिंगर, कोरियोग्राफर के साथ-साथ एक अच्छे चित्रकार भी हैं.

मदन सिंह, रांची: कहते हैं प्रतिभा किसी का मोहताज नहीं होती. इसके लिए हौसलों की जरूरत होती है. झारखंड के रांची के 22 वर्षीय शिवशंकर लोहरा ने इसे सच साबित कर दिखाया है. शिवशंकर एक सिंगर, कोरियोग्राफर के साथ-साथ एक अच्छे चित्रकार भी हैं. शिवशंकर को राज्यपाल भी सम्मानित कर चुके हैं. 

शंकर लोहरा रांची के पंडरा इलाके के रहने वाले हैं. शिवशंकर ट्रिपल ड्रम बजाते हैं और इनकी हिंदी और सादरी में गाने के एल्बम भी है. शिवशंकर ने अपनी जिंदगी में कभी हार नही मानी. उन्होंने जो भी ठाना उसे कर दिखाया. शिवशंकर के अनुसार कभी-कभी उनके मन मे कसक रहता था कि दूसरों की तरह वो स्वस्थ्य नहीं हैं. स्कूल कॉलेज में कई जगहों पर ताने भी सुनने को मिले लेकिन इन सभी बातों को भूल शिवशंकर आगे अपनी लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे.

शिवशंकर

शिवशंकर खुद को इस मुकाम पर पाकर बेहद खुश हैं. शिवशंकर का कहना है कि उन्होंने गरीबी को बहुत ही नजदीक से देखा है लेकिन गरीबी को कभी अभिशाप नहीं माना. शंकर के पिता लोहा-भट्टी चलाने का काम करते हैं. शिवशंकर ने पंडरा के संजय गांधी मेमोरियल कॉलेज से बीकॉम किया.

आज शिवशंकर के माता-पिता भी खुश हैं कि शिवशंकर अपने गांव और अपने परिवार के नाम को रौशन कर रहे हैं. संगीत के साथ-साथ शिवशंकर चित्रकारी में भी रुचि रखते हैं. इस क्षेत्र में उन्होंने राज्यपाल से सीधे पुरस्कार भी प्राप्त कर रखें हैं. 

दिव्यांगता कभी अभिशाप नहीं होती है. शारीरिक अक्षमता के बावजूद शिवशंकर के जज़्बा की हर शख्स तारीफ करता है और लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत भी.