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झारखंड : डेढ़ साल पहले युवाओं को मिली थी होमगार्ड की नौकरी, न पोस्टिंग मिली न ही सैलरी

हर 15 से 20 दिनों में ये युवा प्रशिक्षण के लिए चाईबासा स्थित जिला समादेष्टा कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं और हर बार उन्हें जल्द प्रशिक्षण मिलेगा का आश्वासन देकर लौटा दिया जा रहा है.

झारखंड : डेढ़ साल पहले युवाओं को मिली थी होमगार्ड की नौकरी, न पोस्टिंग मिली न ही सैलरी
युवाओं को डेढ़ साल से पोस्टिंग की उम्मीद है.

आनंद प्रियदर्शी, चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिला के 603 युवाओं को सरकार ने होमगार्ड की नौकरी दी, लेकिन डेढ साल बीत जाने के बाद भी उन्हें प्रशिक्षण नहीं दिया गया है. इससे न तो उन्हें ड्यूटी मिल रही है और ना ही वेतन. नतीजा नौकरी मिलने के बाद भी बेरोजगार की तरह नवनियुक्त होमगार्ड भटकने को मजबूर हैं. इनकी स्थिति यह है कि प्रशिक्षण के इंतजार में ये युवा होमगार्ड की मिली नौकरी छोड़कर दूसरी नौकरी भी नहीं तलाश कर पा रहे हैं.

हर 15 से 20 दिनों में ये युवा प्रशिक्षण के लिए चाईबासा स्थित जिला समादेष्टा कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं और हर बार उन्हें जल्द प्रशिक्षण मिलेगा का आश्वासन देकर लौटा दिया जा रहा है.

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अगली बार प्रशिक्षण मिलेगा और ड्यूटी ज्वाइन करेंगे की उम्मीद में युवाओं ने डेढ़ साल बिता दिए, लेकिन अब तक प्रशिक्षण ही नहीं मिला. नतीजा हुआ कि अब इनका धैर्य भी जवाब देने लगा है. अब ये सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं.

साल 2016 में पश्चिमी सिंहभूम जिला में 603 होमगार्ड बहाली के लिए आवेदन मांगे गए थे. जिले के हजारों आदिवासी युवाओं ने आवेदन दिया. लंबी दौड़ लगाई, मेडिकल पास किया. सभी परीक्षण में सफल होने वाले 603 युवाओं को वर्ष 2018 में होमगार्ड के लिए बहाल किया गया. इनमें 300 लडकियां भी शामिल थीं. इन्हें अब प्रशिक्षण और ड्यूटी देना था. लेकिन मामला यहीं अटक गया.

इस मामले में जब होमगार्ड के जिला समादेष्टा कार्यालय में संपर्क किया गया, तो कर्मियों ने बताया कि लंबे समय से जिला समादेष्टा की पोस्टिंग ही नहीं हुई है, जिसके कारण इन लोगों का मामला लंबित है. जब तक समादेष्टा की पोस्टिंग नहीं हो जाती तब तक प्रशिक्षण शुरू कराना संभव नहीं है.