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SKMCH में नरकंकाल मिलने का मामला उलझा, अस्पताल प्रबंधन ने लावारिश लाश मानने से किया इनकार

फॉरेंसिक मेडिसिन डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. विपिन कुमार ने ये दावा किया है कि कानून के मुताबिक हॉस्पिटल किसी भी लावारिश लाश को 72 घंटे ही रख सकता है. उसके बाद लाश स्थानीय थाने को सौंप दी जाती है.

SKMCH में नरकंकाल मिलने का मामला उलझा, अस्पताल प्रबंधन ने लावारिश लाश मानने से किया इनकार
घटनास्थल पर पहले जैसे ही नरकंकाल और मानव शरीर के अवशेष फेंके पड़े थे. सरकार की ओर से घोषित जांच को लेकर न तो घटनास्थल की बैरिकेडिंग की गई थी और न ही उन हड्डियों-अवशेषो को सुरक्षित किया गया था.

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कालेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) में नरकंकाल मिलने का मामला उलझ गया है. शनिवार तक एसकेएमसीएच में मिले नरकंकाल को एसकेएमसीएच के लावारिश लाशों का कंकाल माना जा रहा था. लेकिन एसकेएमसीएच के एफएमटी डिपार्टमेंट के एचओडी ने ये दावा कर सबको चौंका दिया है कि वो कंकाल हॉस्पिटल के लावारिश लाशों के कंकाल नही है. एसकेएमसीएच के इस दावे के बाद सवाल ये उठने लगे हैं कि एसकेएमसीएच के पीछे आखिर इतने बड़े पैमाने पर मिले नरकंकाल किसके हैं.

हॉस्पिटल प्रबंधन ने नरकंकाल को हॉस्पिटल की लावारिश लाश मानने से इनकार कर दिया है. फॉरेंसिक मेडिसिन डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. विपिन कुमार ने ये दावा किया है कि कानून के मुताबिक हॉस्पिटल किसी भी लावारिश लाश को 72 घंटे ही रख सकता है. उसके बाद लाश स्थानीय थाने को सौंप दी जाती है. इतना ही नही लावारिश लाश को जलाने के सरकारी प्रावधान के मुताबिक 2 हजार रुपये दिए जाते हैं. जिसका चेक स्थानीय थाने को जाता है. 28 मई को एसकेएमसीएच ने अहियारपुर थाना को 19 लावारिश लाश को हॉस्पिटल से ले जाने के लिए लिखा था. 

उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट की अपील के कुछ दिनों बाद पुलिस लाश को ले गयी. पुलिस लाश को कहां ले गयी, कैसे जलाया हमे इसकी जानकारी नही. लावारिश लाशों की अंत्येष्टि का जिम्मा पुलिस का है न कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट का. इतना ही नही विपिन कुमार ने ये भी कहा कि लाशें जहां जलाई गई है वो इलाका एसकेएमसीएच के अंदर नही आता बल्कि वन विभाग के अंदर आता है. वहीं दूसरी तरफ एसकेएमसीएच के अधीक्षक ने मामले को मेडिकल कॉलेज से जुड़ा बताते हुए पल्ला झाड़ लिया.

इधर हमारी टीम ने नरकंकाल मिलने के घटनास्थल का दोबारा जायजा लिया. घटनास्थल पर पहले जैसे ही नरकंकाल और मानव शरीर के अवशेष फेंके पड़े थे. सरकार की ओर से घोषित जांच को लेकर न तो घटनास्थल की बैरिकेडिंग की गई थी और न ही उन हड्डियों-अवशेषो को सुरक्षित किया गया था.