हरियाणा में कूड़े के पहाड़ का निस्तारण कर रही मनोहर सरकार, केंद्र से मांगे 155 करोड़
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हरियाणा में कूड़े के पहाड़ का निस्तारण कर रही मनोहर सरकार, केंद्र से मांगे 155 करोड़

हरियाणा में मनोहर सरकार कूड़े के पहाड़ का निस्तारण कर रही है. राज्य में 101 लाख मीट्रिक टन कूड़े था, जिसमें से अब तक सराकर 38.74 लाख MT कचरे का प्रसंस्करण कर चुकी हैं. वहीं बचे हुए कचरे के लिए केंद्र सरकार से 155 करोड़ रुपये की मांग की है.

हरियाणा में कूड़े के पहाड़ का निस्तारण कर रही मनोहर सरकार, केंद्र से मांगे 155 करोड़

Chandigarh: कूड़े के पहाड़ को लेकर दिल्ली में सियासी जंग चल रही है. इसको लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं. वहीं अब हरियाणा सरकार ने भी अपने कूड़े के पहाड़ को खत्म करने के लिए कवायद शुरू कर दी है. इसके लिए मनोहर सरकार लगभग 262 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है. राज्य सरकार अब तक 38.74 लाख मीट्रिक टन (MT) कचरे का निस्तारण सरकार कर चुकी है. वहीं हरियाणा सरकार ने कूड़े के पहाड़ के निपटान के लिए 155 करोड़ रुपये की डिमांड की है.

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बता दें कि राज्य में 101 लाख मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण किया जाना है. वहीं अब तक सराकर 38.74 लाख MT कचरे का निपटान कर चुकी है. 62.60 लाख एमटी कचरे का निस्तारण होना अभी बाकी है. इसको लेकर राज्य के मुख्य सचिव संजीव कोशल ने बताया कि लेगेसी वेस्ट के प्रसंस्करण पर लगभग 262 करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी. वहीं राज्य सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन के तहत केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय को भी इससे निपटने के लिए 155 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी है.

इसको लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की निगरानी समिति के अध्यक्ष जस्टिस प्रीतम पाल ने हरियाणा के अधिकारियों को ट्रिब्यूनल के दिशा निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि इस मामले में लापरवाही करने वाले अधिकारी बख्शे नहीं जाएंगे.

मनोहर सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कचरे के निस्तारण के लिए बड़े प्लांट लगाने की जगह छोटे-छोटे क्रशर लगाए जाएं. सरकार ने अंबाला, कैथल और यमुनानगर जिलों द्वारा कचरा निस्तारण के कार्य में बेहतर प्रदर्शन करने पर उनकी तारीफ की है.

इन चीजों का रखें खास ध्यान
किसी भी डंपिंग साइट को बस्ती या रिहायशी इलाकों से दूर बनाया जाए. इसके बाद डंपिंग साइट पर नियमित रूप से जांच करना आवश्यक है. निकायों द्वारा समय-समय पर भूजल की गुणवत्ता का परीक्षण अनिवार्य है. साइट एरिया की चाहरदीवारी-बाड़बंदी की जाए. 

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