Holi 2023: सालों पुरानी परंपरा की दीवार तोड़, कान्हा के रंग में रंगी निराश्रित व विधवा महिलाएं
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Holi 2023: सालों पुरानी परंपरा की दीवार तोड़, कान्हा के रंग में रंगी निराश्रित व विधवा महिलाएं

सामाजिक कुरीतियों और अपनों से मिले तिरस्कार के साथ ही सैकड़ों साल पुरानी परंपरा की दीवार गिराकर एक बार फिर नई शुरुआत कान्हा के साथ होली खेल कर हुई. यह होली गोपीनाथ मंदिर में खेली गई.

Holi 2023: सालों पुरानी परंपरा की दीवार तोड़, कान्हा के रंग में रंगी निराश्रित व विधवा महिलाएं

Holi 2023: होली का पर्व जीवन मे रंग भरने का काम करता है और कान्हा की नगरी मथुरा के वृन्दावन धाम में भी ऐसा ही हुआ. जब सामाजिक परंपराओं को पीछे छोड़ कान्हा की नगरी में राह रही निराश्रित महिलाओं व विधवाओं ने जमकर होली खेली. सामाजिक कुरीतियों और अपनों से मिले तिरस्कार के साथ ही सैकड़ों साल पुरानी परंपरा की दीवार गिराकर एक बार फिर नई शुरुआत कान्हा के साथ होली खेल कर हुई. यह होली गोपीनाथ मंदिर में खेली गई.

वृन्दावन के आश्रय सदनों में रहने वाली विधवा महिलाएं ने प्रिय कान्हा के साथ फूल गुलाल की होली खेली, जिससे उनके जीवन में इस परंपरा ने एक नई ऊर्जा भरने का काम किया है. श्रीधाम वृंदावन में वर्तमान में करीब 2000 विधवा महिलाएं रहती हैं. इनके जीवन दुख का सागर बन गया है. ऐसे में इन्हें कुछ नई अनुभूति कराने के लिए सुलभ इंटरनेशनल ने कदम बढ़ाया था. संगठन की ओर से गोपी नाथ मंदिर में फूल और गुलाल की होली का आयोजन किया गया.

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उन्होंने होली के दौरान कान्हा पर फूल और गुलाल अबीर बरसाकर उन्हें होली रस से सराबोर कर दिया. विधवा महिलाओं ने होली में नाच गाने के साथ जमकर आनंद लिया. सुलभ इंटरनेशनल संस्था के अनुशार विधवाओं के जीवन में होने जा रहे इस बदलाव से वह बेहद खुश हैं. आखिर सदियों पुरानी प्रथा को दरकिनार कर वह भी होली खेली.

विधवाओं ने होली खेलने की अपनी इच्छा जब इनकी देखभाल कर रही संस्था सुलभ इंटरनेशनल के सामने जाहिर की तो संस्था के संस्थापक डॉ. बिंदेश्वरी पाठक ने सहमति जता दी. वहीं इस होली को देखने आए विदेशी भक्त भी पूरी मस्ती में नजर आए. वर्षों से अपनों का तिरस्कार और समाज की बेरुखी झेल रही इन महिलाओं में इस बार की होली भले ही इनके जख्म न भर पाए, लेकिन इतना जरूर है कि इनके जीवन में नयी ऊर्जा जरूर भर देगी.

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