Unique Wedding Tradition: भारत विभिन्न धर्म, जाति और समुदाय के लोगों का देश है. यहां थोड़ी-थोड़ी दूरी पर मान्यताएं और परंपराए बदल जाती है. देश में कई तरह के कल्चर देखने को मिलते हैं. इसमें से कई बड़ी बेहतर तो कई बड़ी अजब-गजब होती हैं. ऐसी ही एक परंपरा निभाई जाती है छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) के सरगुजा (mainpat ambikapur surguja) जिले में. जहां, बारातियों का स्वागत (welcome processions) लोग सजधज कर नहीं बल्की कीचड़ में लेटकर (buffalo mud dance) करते हैं. आइए जानते हैं क्या है मांझी समाज (manjhi tribe) की ये अनोखी परंपरा.


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मैनपाट के मांझियों की है परंपरा
ये परंपरा सरगुजा के मैनपाट क्षेत्र में निभाई जाती है. मांझी जनजाति के लोग बारातियों का स्वागत कीचड़ में लोटकर करते हैं. लड़की के भाई बारात का स्वागत करने के बाद कीचड़ में नहाकर नाचते गाते घर पहुंचते हैं. इसके बाद दूल्हे को हल्दी तेल लगाकर विवाह के मंडप में आने का आमंत्रण देते हैं. इसकी तैयारी काफी पहले से शुरू हो जाती है. इतना ही नहीं यहां दूल्हा और दुल्हन से जानवरों की आवाज भी निकलवाई जाती है.


''कीचड़ डांस'' से करते हैं बारातियों का स्वागत, यहां शादी में निभाई जाती है अनूठी परंपरा, देखें VIDEO


क्या है इस परंपरा का राज?
मांझी-मझवार जनजाति के लोग अपने गोत्र का नाम पशु, पक्षियों के नाम पर रखते हैं. इसमें भैंस, मछली, नाग और अन्य प्रचलित जानवर होते हैं. ये अपने तीज त्यौहारों और उत्सवों में उन्हीं का प्रतिरूप बनते हैं और आयोजन का आनंद उठाते हैं. इससे इनका उद्देश्य अपने गोत्र के नाम को आगे लेकर जाना है.


गोत्र के अनुसार होता है बारातियों का स्वागत
मांझी जनजाति में लड़की वाले जिस गोत्र से आते हैं उसी गोत्र के अनुसार अपने बारातियों का स्वागत करते हैं. जैसे जो नाग गोत्र से आता है वो नाग की तरह प्रतिक्रिया करता है. मतलब जिसका गोत्र जिस भी जानवर या पक्षी के नाम पर होती है वो अपने बारातियों का स्वागत उसी तरह करता है. सरगुजा से सामने आए इस वीडियो में भैंस गोत्र के परिवार में लड़की बारात आई है, जहां लड़के के भाई कीचड़ में लोटकर बरातियों का स्वागत कर रहे हैं.


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ऐसे बनता है कीचड़
लड़की वाले बरात के स्वागत के लिए बकायदा एक ट्राली मिट्टी मंगाते हैं. उसे बरात के रास्ते में पलटकर कीचड़ में तब्दील करते हैं. उसके बाद लड़की के परिवार में जितने भी भाई होते हैं वो भैंस के समान जैसे पूंछ बनाकर कीचड़ से लथपथ हो जाते हैं. उसके बाद जनमासे में रुके बारात के पास जाते हैं. गाजे-बाजे के साथ बारातियों के सामने अपनी कला का प्रदर्शन कर दूल्हे को तेल हल्दी लगाते हैं और उसे शादी के लिए मंडप में ले जाते हैं.


क्यों निभाई जाती है परंपरा?
मांझी जनजाति के लोग हमेशा से ही अपनी परंपराओं से जुड़े हैं. वो बात अलग है कि आज के मार्डन जमाने में उनकी परंपरा वायरल हो रही है और देश भर में चर्चा हो रही है. वो अभी भी इसी लगातार निभाते रहना चाहते हैं. ऐसा करने के पीछे उनका अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान है. उनका मानना है कि बारातियों का स्वागत गोत्र के अनुसार करने से वो सामने वाले परिवार को अपने गौरव से अवगत कराते हैं.