MP चुनाव: संविधान निर्माता आम्बेडकर की जन्मस्थली 'महू' कैसे बनी बीजेपी का गढ़

महू विधानसभा सीट पर हमेशा से ही जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर मतदान होता रहा है.

MP चुनाव: संविधान निर्माता आम्बेडकर की जन्मस्थली 'महू' कैसे बनी बीजेपी का गढ़
2003 में महू का नाम बदलकर डॉ. आम्बेडकर नगर कर दिया गया था.

महू: डॉ. आम्बेडकर नगर को आमतौर पर महू के नाम से जाना जाता है. इंदौर जिले की 9 सीटों में एक महू विधानसभा सीट संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आम्बेडकर की जन्मस्थली है. इसी कारण 2003 में महू का नाम बदलकर डॉ. आम्बेडकर नगर कर दिया गया था. इंदौर जिले के अंतर्गत आने वाली महू (आम्बेडकर नगर) विधानसभा सीट पर पिछले दो विधानसभा चुनावों से बीजेपी का कब्जा है. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने 2003 और 2008 में महू विधानसभा सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी अंतरसिंह दरबार को पराजित किया था. 

आम्बेडकर नगर विधानसभा सीट
इस बार महू विधानसभा सीट पर बीजेपी की ओर से विजवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय के चुनावी मैदान में उतरने की संभावनाएं सबसे ज्यादा थीं. लेकिन, बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने एक बड़ा बदलाव करते हुए अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में बनी रहने वाली उषा ठाकुर को आम्बेडकर नगर से अपना उम्मीदवार घोषित किया. दरअसल, विजयवर्गीय के बेटे आकाश महू सीट पर काफी सक्रिय थे, इसलिए माना जा रहा था कि बीजेपी की ओर से उन्हें टिकट मिलना तय है. लेकिन, बीजेपी ने उन्हें इसी जिले की इंदौर-3 विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाकर सबको चौंका दिया. 


फोटो साभार : फेसबुक

कांग्रेस ने 'दरबार' को नहीं भुलाया 
बीजेपी ने आकाश की जगह कट्टर राष्ट्रवादी छवि की उषा ठाकुर को बीजेपी ने अपना प्रत्याशी घोषित किया. गौरतलब है कि उषा ठाकुर पहले इंदौर-3 से विधायक थीं. ठाकुर बीजेपी की वह नेता हैं जिन्होंने 1998 से कांग्रेस का गढ़ रही इंदौर-3 सीट पर जीत दर्ज की थी. उनकी इस सीट पर ही विजयवर्गीय के बेटे आकाश को बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है. वहीं, कांग्रेस ने महू सीट पर एक बार फिर से अंतरसिंह दरबार को चुनावी मैदान में उतारा है. 2008 में हुए परिसीमन से पहले अंतरसिंह दरबार 1998 और 2003 में महू से विधायक रहे हैं. 


फोटो साभार : फेसबुक

मतदाता
चुनाव आयोग के अनुसार, महू विधानसभा में कुल 2,44,437 मतदाता हैं. इनमें से 1,25,919 पुरुष और 1,18,509 महिला मतदाता हैं. इसके साथ ही 9 थर्ड जेंडर के मतदाता और 638 सर्विस इलेक्टर्स हैं. इस क्षेत्र में शिक्षा दर काफी अच्छी है. अपुष्ट आंकड़ों के अनुसार, यहां का साक्षरता प्रतिशत करीब 75 प्रतिशत तक है.  

विधायक का प्रभाव और क्षेत्र का विकास
महू में कैलाश विजयवर्गीय बीते दो चुनावों से विधायक रहे हैं. यहां के ग्रामीण क्षेत्रों की स्थितियों में सुधार हुआ है. सड़क, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं में काफी हद तक विकास नजर आता है. 

क्षेत्र की वर्तमान समस्याएं
शहर में यातायात जाम, गंदगी और अधूरे विकास कार्य लोगों की बड़ी परेशानी बन गए हैं. इस क्षेत्र में अभी काफी काम करने की जरूरत है. 

महू में जातिगत नहीं, चलता है एक अलग ही समीकरण 
महू विधानसभा सीट पर हमेशा से ही जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर मतदान होता रहा है. कहा जाता है कि इस सीट के मतदाताओं की तासीर ही अलग है. आप इसकी बानगी केवल इस बात से ही लगा लेंगे कि देश में लगे आपातकाल के बाद यहां से कांग्रेस जीती थी. लेकिन, 1985 में राजीव गांधी की लहर के बीच इस सीट से बीजेपी के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी. है. 

आम्बेडकर की जन्मस्थली के रूप में भी है प्रसिद्ध 
महू विधानसभा संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आम्बेडकर की जन्मस्थली है. इंदौर जिले के इस कस्बे का नाम 2003 में डॉ. आम्बेडकर नगर कर दिया गया. अंग्रेजों के समय यह एक सैन्य छावनी हुआ करती थी. महू में आज भी थलसेना की छावनी है. यहां पर सेना का इन्फैंन्ट्री स्कूल, संचार प्रौद्योगिकी महाविद्यालय (MCTE) और थलसेना का युद्ध महाविद्यालय भी स्थित हैं. इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध डॉ. भीमराव आम्बेडकर राष्ट्रीय सामाजिक शोध संस्थान भी यहां स्थित है.

प्रसिद्ध स्थल
महू से पुरातन मंडलेश्वर मार्ग पर होलकरकालीन मराठा शैली का 'जाम दरवाजा' स्थित है. वहीं, महू में कथित रूप से भुतहा कही जाने वाली मैसॉनिक लॉज भी स्थित है. कहा जाता है कि इसकी स्थापना ईसामसीह के जन्म से पहले रोम के राजा किंग सोलोमन के समय की गई थी.