मध्य प्रदेशः सतना के इस स्कूल में 2 छात्रों को पढ़ाने के लिए नियुक्त हैं दो शिक्षक

सरकारी स्कूलों की हालत का अंदाजा इसी बात से लगया जा सकता है, कि जिले के करीब 272 स्कूल ऐसे हैं, जहां पर छात्रों की संख्या 20 से भी कम है और करीब 55 स्कूल ऐसे हैं जहां पर छात्रों की संख्या दहाई अंकों में भी नही है.

मध्य प्रदेशः सतना के इस स्कूल में 2 छात्रों को पढ़ाने के लिए नियुक्त हैं दो शिक्षक
सतना के इस स्कूल में 8 बच्चों को 4 शिक्षक पढ़ाने आते हैं

कोमल निगम, नई दिल्ली/सतनाः सरकारी स्कूलों को लेकर सरकार चाहे कितनी भी बातें कर लें, लेकिन सच्चाई तो कुछ और ही है. इन स्कूलों की दास्तां किसी और को बताने की जरूरत नहीं है, बल्कि ये स्कूल अपनी दास्तान खुद ही बयान करते हैं. प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता लाने को लेकर दावे हर सरकार में किए जाते हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड कुछ और ही बयान करते हैं. हालात यह हैं कि कई स्कूल ऐसे हैं, जहां शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो पा रही है तो कई ऐसे भी स्कूल हैं, जहां 1 छात्र के लिए 2 और उससे ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति की गई है.

यह पूरा मामला सतना का है. जहां सरकारी स्कूलों की हालत का अंदाजा इसी बात से लगया जा सकता है, कि जिले के करीब 272 स्कूल ऐसे हैं, जहां पर छात्रों की संख्या 20 से भी कम है और करीब 55 स्कूल ऐसे हैं जहां पर छात्रों की संख्या दहाई अंकों में भी नही है. जबकि इन विद्यालयों में टीचरों की भरमार है. सतना जिले का एक ऐसा ही स्कूल है गोबराव खुर्द. जहां शासन ने कक्षा 1 से 5 वीं तक पढ़ने के लिए भवन बनाया. भारी भरकम सेलरी में शिक्षक भी रखे, पर विद्यालय में बच्चे लाने में कामयाब नही हुए. यहां सरकारी रजिस्टर में 1 छात्र है पर विद्यालय में उसकी मौजूदगी नहीं है. इसके बाद भी विद्यालय में 2 शिक्षक हैं. 

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इसी तरह नागौद के विद्यालय में 16 बच्चे दर्ज हैं. जिसमें स्कूल केवल 8 आते हैं. इसके बाद भी शासन ने 4 शिक्षकों को पदस्थ किया है. ऐसा ही कुछ हाल है बिरसिंहपुर के प्राथमिक शाला का, जहां दस बच्चों के लिए 4 शिक्षक पदस्थ है. कुल मिलाकर सरकारी लापरवाही के कारण सरकारी स्कूलों की हालत बहुत खराब है और विद्यालय के शिक्षक भी इसमे सरकारी पॉलिसी का दोष मानते है.

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हर साल बढ़ रहा है बजट
सरकार शिक्षा पर हर साल बजट को बढ़ा रही है. वहीं सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या पिछले पांच सालों से लगातार कम हो रही है शिक्षा विभाग की लापरवाही से जिन विद्यालयों में छात्र नही वंहा शिक्षक की भरमार और जहां छात्र हैं वहां शिक्षक ही नहीं हैं. शिक्षक संघ के लोगों का मानना है कि शिक्षा विभाग की खराब पॉलिसी के कारण सरकारी स्कूलों का हाल ऐसा है.