मास्टर प्लान लागू होने के 6 साल बाद भी नहीं हो पाया ग्वालियर का औद्योगिक विकास, उठे गंभीर सवाल
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मास्टर प्लान लागू होने के 6 साल बाद भी नहीं हो पाया ग्वालियर का औद्योगिक विकास, उठे गंभीर सवाल

मास्टर प्लान को लागू हुए 6 साल बीत गए हैं लेकिन औद्योगिक विकास के क्षेत्र में इसमें आधा अधूरा ही कार्य हो पाया है. इस मास्टर प्लान में 1719.12 हेक्टेयर जमीन को औद्योगिक विकास के लिए तैयार किया जाना था. लेकिन 6 साल बीत जाने पर महज 335.18 हेक्टेयर भूमि ही उद्योग क्षेत्र के लिए तैयार हो सकी है.

मास्टर प्लान लागू होने के 6 साल बाद भी नहीं हो पाया ग्वालियर का औद्योगिक विकास, उठे गंभीर सवाल

शैलेंद्र सिंह भदौरिया/ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में मास्टर प्लान लागू हुए साल बीत जाने के बाद भी औद्योगिक क्षेत्र विकास नहीं हो पाया है.ग्वालियर शहर विकास के लिए साल 2015 में मास्टर प्लान -2021 लाया गया था. इस प्लान में 16 लाख की आबादी के हिसाब से 427 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र इलाके में न केवल रेजिडेंशियल और कमर्शियल बल्कि औद्योगिक क्षेत्र विकास का खाका तैयार किया गया था. 

इस मास्टर प्लान को लागू हुए 6 साल बीत गए हैं लेकिन औद्योगिक विकास के क्षेत्र में इसमें आधा अधूरा ही कार्य हो पाया है. इस मास्टर प्लान में 1719.12 हेक्टेयर जमीन को औद्योगिक विकास के लिए तैयार किया जाना था. लेकिन 6 साल बीत जाने पर महज 335.18 हेक्टेयर भूमि ही उद्योग क्षेत्र के लिए तैयार हो सकी है. जितनी औद्योगिक क्षेत्र जमीन तैयार हुई उस पर भी एक भी इंडस्ट्री नहीं लगी है. इसी बीच अब 23 लाख की आबादी के हिसाब से मास्टर प्लान 2035 का खाका तैयार किया जा रहा है.

ऐसे में अब सरकार और सरकारी अमले के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, एक तो 6 साल में उद्योग क्षेत्र विकास नहीं हो पाया और जो हुआ उस पर निवेश तक नहीं ला पाए. 

मास्टर प्लान 2021 औद्योगिक क्षेत्र विकसित ना होने के सवाल पर मध्य प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव प्रवीण अग्रवाल का कहना है कि नए उद्योग क्षेत्र विकसित ना होने से न केवल व्यापारियों को बल्कि समूचे ग्वालियर को नुकसान हो रहा है. इसके विकसित ना होने के कारण पीछे सबसे बड़ा कारण 2 साल से कोरोना संक्रमण और सरकार की उद्योग नीति को माना जा रहा है. 

उनका कहना है कि यदि कोई व्यापारी यहां इंडस्ट्री स्थापित करना चाहे तो उसे  एनओसी के लिए तमाम सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं. सरकार को चाहिए केवल सिंगल विंडो सिस्टम लागू करें ताकि व्यापारी आसानी से अपनी इंडस्ट्री स्थापित कर सके. 

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कांग्रेस ने उठाए सवाल
साथ ही इसको लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है. कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान नारियल फोड़कर विकास कार्यों की घोषणा तो कर देते हैं लेकिन उन्हें बाद में भूल जाते हैं. वही हाल मास्टर प्लान 2021 का हुआ, ना तो नए इंडस्ट्रियल एरिया को विक्सित किया जा रहा है, उल्टा जो इंडस्ट्री एरिया अभी संचालित है उनको भी सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा रही हैं. उन्होंने कहा कि नई इंडस्ट्रीज स्थापित ना होने से बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है.

भाजपा का जवाब
बीजेपी प्रवक्ता आशीष अग्रवाल का कहना है कि 2021 तक का मास्टर प्लान था, चूंकि अब 2021 लगभग बीतने को है यही कारण है कि अब 2035 तक का मास्टर प्लान तैयार किया गया है. निश्चित तौर पर इस मास्टर प्लान के अमल में आने पर न केवल औद्योगिक क्षेत्र बल्कि ग्वालियर का समूचा विकास होगा. उन्होंने कहा कि जहां तक उद्योग नीति में बदलाव की बात है तो मध्य प्रदेश की सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है.

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