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पटेल को अपनाने की कोशिश कर रही BJP, RSS के सख्त खिलाफ थे सरदार: प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी ने ट्वीट (Tweet) करते हुए कहा कि सरदार पटेल कांग्रेस के निष्ठावान नेता थे जो कांग्रेस की विचारधारा के प्रति समर्पित थे.

पटेल को अपनाने की कोशिश कर रही BJP, RSS के सख्त खिलाफ थे सरदार: प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी की फाइल फोटो.

नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने सरदार पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) की जयंती पर बीजेपी (BJP) के रन फॉर यूनिटी (Run for Unity) को लेकर एक ट्वीट किया है और कहा है कि सरदार पटेल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के सख्त खिलाफ थे. प्रियंका गांधी ने ट्वीट (Tweet) करते हुए उन्होंने कहा कि वो जवाहरलाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru) के क़रीबी साथी थे और आरएसएस के सख़्त खिलाफ थे. 

सरदार पटेल की जयंती के मौके पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट किया. उन्होंने कहा, 'सरदार पटेल कांग्रेस के निष्ठावान नेता थे जो कांग्रेस की विचारधारा के प्रति समर्पित थे. वह जवाहरलाल नेहरू के क़रीबी साथी थे और आरएसएस के सख्त खिलाफ थे. आज भाजपा द्वारा उन्हें अपनाने की कोशिशें करते हुए और उन्हें श्रद्धांजलि देते देख के बहुत खुशी होती है. 

 

 

उन्होंने आगे ट्वीट किया, 'क्योंकि भाजपा के इस ऐक्शन से दो चीजें स्पष्ट होती हैं-
1. उनका अपना कोई स्वतंत्रता सेनानी महापुरुष नहीं है. तक़रीबन सभी कांग्रेस से जुड़े थे.
2. सरदार पटेल जैसे महापुरुष को एक न एक दिन उनके शत्रुओं को भी नमन करना पड़ता है.
 

आपको बता दें कि साल 2014 से 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस दिन लोग 'रन फॉर यूनिटी' में भाग लेते हैं. सरदार वल्‍लभभाई पटेल की 144 वीं जयंती के मौके पर पीएम मोदी ने लौह पुरुष को गुजरात के केवडिया में स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी पर श्रद्धांजलि करने के बाद कहा कि आज भी सरदार पटेल के एक-एक शब्‍द का महत्‍व है. स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी से ऊर्जा और शांति मिलती है. ये प्रतिमा एकता की प्रतीक है. एकता ही वह प्रवाह है जिसमें भारतीयता का प्रवाह है. 

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पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद भारतीयता की भावना लुप्त नहीं हुई थी इसलिए सरदार पटेल एकता का मंत्र लेकर निकले तो सभी उनकी छत्र छाया में खड़े हो गए. सभी को साथ में लेकर, राजे रजवाड़े को साथ लेकर एक भारत को साथ लेकर वह चले. चाणक्य के बाद अगर ये काम कोई कर पाया तो सरदार पटेल कर पाए. वरना अंग्रेज तो चाहते थे कि हमारा देश छिन्न-भिन्न हो जाए. विविधता में एकता हमारी पहचान है. दुनिया भारत की बात गंभीरता से सुनती है. विविधता में एकता हमारी शक्ति है. भारत दुनिया की बड़ी आर्थिक ताकतों में जगह बना रहा है.