MP के अनोखे राम भक्त, 'सीता-राम' नाम से 8 सालों में पूरा किया रामचरित मानस, भेजना चाहते हैं अयोध्या
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MP के अनोखे राम भक्त, 'सीता-राम' नाम से 8 सालों में पूरा किया रामचरित मानस, भेजना चाहते हैं अयोध्या

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या में होने वाले राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की तारीख अब धीरे-धीरे नजदीक आ रही है, इस आयोजन की तैयारियां देशभर में चल रही हैं. मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में ऐसे ही एक राम भक्त हैं, जिन्होंने 8 सालों में एक अनोखा काम किया है. 

MP के अनोखे राम भक्त

Betul News: अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाली राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए देशभर में तैयारियां चल रही हैं. मध्य प्रदेश में उत्साह का एक अलग माहौल इन दिनों देखा जा रहा है, जहां राम भक्त भगवान राम के दर्शनों के लिए तैयार हैं. खास बात यह है कि भगवान राम से जुड़े अनोखे काम लोगों ने किए हैं, मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में भी ऐसे ही एक राम भक्त हैं, जिन्होंने 8 सालों में 'सीता-राम' अक्षर के जरिए राम चरित मानस का पाठ लिखा है, जिसकी एक प्रति वह अयोध्या भेजना चाहते हैं. 

केदार सिंह चंदेल का अनोखा काम 

बैतूल जिले के देवगांव गांव में रहने वाले 65 साल के रामभक्त केदार सिंह चंदेल ने 'सीताराम' शब्द से पूरी रामायण लिखी है. उन्होंने आठ सालों की कड़ी मेहनत के बाद राम चरित मानस का पूरा पाठ लिखा है, जिसमें इसके अलावा उन्होंने भगवान श्री राम, हनुमानजी के कई चित्र भी सीताराम लिखकर बनाए हैं. अपनी इस अनूठी श्री राम भक्ति के चलते गांव ही नहीं पूरे जिले भर में लोग उन्हें राम भक्त कहकर बुलाते हैं. 

इस तरह हुई शुरुआत 

'सीता-राम' नाम से रामायण लिखने वाले केदार चंदेल ने बताया कि जब उन्होंने कई बार सीता-राम शब्द लिखे तो उनके मन में यह ख्याल आया कि सुंदरकाण्ड को भी सीता-राम के अक्षरों में लिखने का प्रयास किया जाए. उन्होंने शुरुआत की और दो माह के भीतर इसे पूरा कर दिया. जब एक बार सुंदरकांड का पाठ पूरा हुआ तो फिर उन्होंने सीता-राम नाम से रामचरित मानस का पाठ लिखने का मन बनाया और उन्होंने इसकी शुरुआत कर दी, जो आठ साल में पूरी हुई है. चंदेल का मानना है कि उन्हें हनुमान जी ने ही सीता-राम अक्षरों से पूरी रामायण लिखने के लिए शक्ति दी, जिससे वे आठ साल में पूरी रामायण ही सीता-राम के अक्षरों में लिख पाए. 

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इस तरह शब्दों को पिरोया 

केदार चंदेल के ने बताया कि वह पेंसिल से पहले चौपाई डबल लाइन में लिखते थे और बाद में पेन से 'सीता-राम-सीता-राम' लिखकर चौपाई पूर्ण कर देते थे. इस तरह से पूरी रामायण लिख दी. पेशे से किसान केदार चंदेल ने 1997 से करोड़ों बार सीताराम नाम लिखने के साथ ही कई सुंदर चित्र भी बनाए हैं, उनके घर के हर कोने पर रामायण की चौपाइयां भी लिखी हुई हैं. 1997 में उनके दोस्त से मिली प्रेरणा के बाद ही उन्होंने सीताराम लिखना शुरू किया था और लिखते-लिखते सैकड़ों पन्ने भर दिए, जिसके बाद उनकी यह प्रेरणा आज भी जारी है. 

अयोध्या भेजने की इच्छा 

केदार सिंह चंदेल ने बताया कि वह 'सीताराम' अक्षर से लिखी हुई रामचरित मानस अयोध्या भेजना चाहते हैं. ताकि 22 जनवरी को होने वाली राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन में यह रामायण भी शामिल हो सके. उन्होंने बताया कि उनके इस काम में उनके घर परिवार ने भी हमेशा उनका साथ दिया है. क्योंकि वह खेती किसानी का काम करते हैं, लेकिन उन्हें जब भी समय मिलता था तो वह लिखने के लिए बैठ जाते थे. अपने इसी अनोखे काम की वजह से उनकी पहचान पूरे जिले में एक राम भक्त के तौर पर होती है. 

बता दें कि अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होने जा रही है, जिसमें पूरा देश एक तरह से शामिल होने वाला है. इस आयोजन के लिए देशभर में लोगों को निमंत्रण भेजा जा रहा है. मध्य प्रदेश में भी ऐसे ही राम भक्त अब अपने-अपने कार्यों को लेकर चर्चा में हैं, जिसमें केदार सिंह चंदेल का नाम भी शामिल है. 

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