EXCLUSIVE INTERVIEW: सीएम शिवराज ऐसा एक भी अस्पताल बता दें जहां सभी स्वास्थ्य सेवाएं मौजूद हैं- कमलनाथ

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से ZEE मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ के संपादक दिलीप तिवारी ने खास बातचीत की. 

EXCLUSIVE INTERVIEW: सीएम शिवराज ऐसा एक भी अस्पताल बता दें जहां सभी स्वास्थ्य सेवाएं मौजूद हैं- कमलनाथ
ZEE मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ के संपादक दिलीप तिवारी ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से खास बातचीत की.
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भोपालः  मध्य प्रदेश में बढ़ते कोरोना कहर के बीच ZEE मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ रोको-टोको अभियान चला रहा है. इसी अभियान के तहत देश के नामी राजनेताओं से भी कोरोना के मुद्दे पर चर्चा की जा रही है. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से ZEE मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ के संपादक दिलीप तिवारी ने खास बातचीत की. इस दौरान कमलनाथ ने  कोरोना, पांच राज्यों के चुनाव, दमोह उपचुनाव, शिवराज सरकार के कामकाज सहित कई मुद्दों पर पूछे गए सवालों के खुलकर जवाब दिए. पेश है इस बातचीत के प्रमुख अंश-

सवालः आपका राजनीति में लंबा अनुभव है, लेकिन कोरोना जैसी भयावह स्थिति किसी सरकार ने, किसी पॉलीटिकल लीडरशिप ने देखी है, जहां सड़कों पर लाशों के ढेर नजर आ रहे हैं और श्मशान घाट के बाहर तक शव दिख रहे हैं. ये कभी आपने देखा है ?

जवाबः बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है, कि ऐसे हालात पूरे विश्व में हैं, अपना देश तो छोड़िए विश्व इस समय परेशानी में है. आज हमारे अस्पतालों में दवाई नहीं, इंजेक्शन नहीं, बेड नहीं, डॉक्टर नहीं. ये हालात हैं. तीन महीने से अपने देश के अखबार, अपने देश की मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी ये ऐलान कर रही थी कि दूसरी लहर आने वाली है. आज केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, किसी की कोई तैयारी नहीं. राज्य सरकार में शिवराज सिंह चौहान कहते थे 'ये कोरोना नहीं ये तो डरोना है'. लेकिन इस परेशानी की मैंने मार्च में ही बात कही थी. उस समय तो यह भयानक स्थिति नहीं थी. पर मैंने इसकी तैयारी कर ली थी. शिवराज सिंह खुलकर बोलते थे, ये कोरोना नहीं ये डरोना है, ये सब वकवास है. 17 साल से शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री हैं, हमारा कितना खर्चा हुआ स्वास्थ्य सुविधा पर ?.

सवालः शिवराज सिंह चौहान आरोप लगा रहे हैं आप आईफा में व्यस्त थे?

जवाबः जब आईफा की तैयारी हो रही थी, उस वक्त कोरोना नहीं था.  आईफा अवार्ड तो हुआ नहीं, मैंने ही कैसिंल किया. पर बात यह है कि शिवराज सिंह इसे मजाक मान रहे थे. और आज जो हालात हैं, उसे छिपाने का, दबाने का प्रयास है. कल ही भोपाल में 155 शव श्मशान घाट में पहुंचे. जिनमें से 112 कोविड के कारण थे और सरकार ने आंकड़ों में कहा चार. आंकड़े छिपाने से यह होगा कि लोगों को गुमराह करो, यह कलाकारी की राजनीति है. जो शिवराज सिंह चौहान ने प्रयास किया गुमराह करो, ध्यान मोड़ो. यह नीति भारतीय जनता पार्टी की है. मास्क बांटना सबसे आसान काम है, मीडिया के सामने कहो मास्क पहनों, रैली निकालो, उपवास करो, लेकिन आप दवाई के लिए, इंजेक्शन के लिए, एम्बुलेंस के लिए उपवास करो.

सवालः रेमडेसिविर इंजेक्शन ब्लैकबाजार में बिक रहा है, यह आपदा में अवसर है? इस पर सख्ती नहीं बरतनी चाहिए, अगर आप मुख्यमंत्री होते तो क्या करते ?

जवाबः कमलनाथ बोले सरकार ने तो इंजेक्शन के निर्यात की परमिशन दे दी थी, चार महीने पहले. मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कह दिया गया था कि इस इंजेक्शन की जरूरत नहीं है, लेकिन मैं तो तीन महीने पहले से इसकी तैयारी करता, गर्वमेंट बिल्डिंग को कोरोना केयर सेंटर बनाते. दमोह में उपचुनाव पर सरकार और चुनाव आयोग इसका जवाब दें कि दमोह में क्यों उपचुनाव हो रहा है. कमलनाथ ने कहा कि दमोह उपचुनाव में कोरोना की कोई तैयारी नहीं थी. मैं उपचुनाव के संदर्भ में कई बार दमोह गया हूं. वहां पर कोई प्रकोशन नहीं, सोशल डिस्टेंसिंग नहीं. लेकिन करें क्या?, चुनाव से हट जाएं क्या. हमें भी तो मैदान में रहना है. कोरोना से डरना है, अमेरिका ने हालात संभाल लिए, यूरोप में हालात संभल गए. लेकिन हम रेमडेसिविर इंजेक्शन का निर्यात करने में लगे थे. अभी 10 दिन पहले ही निर्यात को बेन किया. मैंने खुद बाद की है रेमडेसिविर इंजेक्शन के बारे में. मुझे जवाब मिला हमारा स्टॉक पोर्ट में पड़ा हुआ है. क्योंकि मैं रेमडेसिविर इंजेक्शन छिंदवाड़ा भिजवाना चाहता था. अब हम पोर्ट से वापस मंगवा रहे हैं. ये तो हालात हैं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसका जवाब दें कि आठ दिन पहले तक मध्य प्रदेश के अस्पतालों में रेमडेसिविर इंजेक्शन को उन्होंने क्यों स्वीकार्य नहीं किया था.

सवालः शिकायत आ रही है कि अगर एक कोविड मरीज अस्पताल में भर्ती है, उसका परिजन ब्लैक में रेमडेसिविर इंजेक्शन लेकर आता है तो वह उसे लगा या नहीं, इसकी भी गांरटी नहीं है?

जवाबः कमलनाथ ने कहा कि रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाना तो छोड़िए, आज जो इंजेक्शन लग रहे हैं. अस्पतालों में इन इंजेक्शनों की जो पर्ची काटता है वह 500 रुपए मांगता है, जबकि इस इंजेक्शन की कीमत 800 या 900 रुपए है, लेकिन कौन सा ऐसा मरीज है जो इस दाम पर यह रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीद रहा है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मुझे बताएं प्रदेश कि कोई भी हेल्थ फैसिलिटी, कोई भी अस्पताल, जहां दवाई हो, जहां इजेक्शन हो, जहां डॉक्टर हो, जहां ऑक्सीजन हो, अगर ऐसा है तो मुझे बताएं?. आज शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि 6 महीने में बावई में हमारी ऑक्सीजन प्लांट लगने वाली है. ये तो चार दिन पहले तक यह नहीं कह रहे थे कि प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी है. इंदौर में सड़कों पर शव पड़े हैं. मैंने मांग की है कि सरकार शमशान में पहुंचने वाले शवों के आंकड़े बताए. मेरी सरकार से मांग है कि प्रदेश में जहां-जहां शमशान घाट हैं, कब्रस्तिान हैं, उनमें पहुंचने वाले शवों के आंकड़े पेश करें.

सवालः प्रदेश के सभी बड़े शहर, जिन से प्रदेश की अर्थव्यवस्था चलती है. जो शहर स्वच्छता में नंबर वन आता है. वहां शवों के नंबर बढ़ते जा रहे हैं. इंजेक्शन ब्लैक मार्केटिंग में बिक रहे हैं. तो यह खेल क्या है?

जवाबः आज सरकार की सोच यही है, नजरिया यही है कि किस तरह हर चीज को व्यापार बनाया जाए, किस चीज से कहां भ्रष्टाचार किया जाए. कमलनाथ ने कहा कि ये आरोप मुझ पर लगाते हैं, लेकिन मेरी तो प्रदेश में 15 महीने सरकार थी. उसमें से दो-ढाई महीने आचार संहिता और लोकसभा चुनाव में गुजर गए. एक महीना गया उथल पुथल में. मेरे पास ग्यारह महीने थे. इन ग्यारह महीनों की गवाह प्रदेश की जनता है कि कैसे नया मोड मध्य प्रदेश को मिला. आज कोरोना एक बड़ा प्रश्न है. शिवराज सिंह चौहान मार्च में कहते थे यह वकवास है. जब नेशनल लॉकडाउन हुआ तब उन्हें होश आया. पिछले तीन महीने से हालात बिगड़े हुए हैं. क्या वह यह जानते नहीं थे कि प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी है. इंजेक्शन की कमी है. आज सबसे पहले एक मरीज को जरूरत है ऑक्सीजन की. लेकिन इन्होंने ऑक्सीजन का कोई प्रबंध नहीं किया. आज तो हालात यह हैं कि डॉक्टर डरे हुए हैं. बहुत सारे डॉक्टर अस्पतालों में हाजरी लगाकर घर चले जाते हैं. ये हालात आज मध्य प्रदेश के हैं.

सवालः क्या कोरोना के आंकड़े छुपाए जा रहे हैं, आंकड़े छुपाने से क्या होगा?

जवाबः कमलनाथ ने कहा सबसे कम कोरोना की टेस्टिंग मध्य प्रदेश में हो रही है, सरकार ने एक तरकीब निकाली है, कोरोना को दबाने की. टेस्टिंग बंद कर दीजिए. कोरोना के आंकड़े दबाने हैं. आज किसी प्राइवेट अस्पताल में टेस्टिंग कराने जाएंगे तो वह कहेंगे कि हमें सरकार ने बेन कर दिया है. पिछले सात दिन से सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों में टेस्टिंग को बेन किया हुआ है. क्योंकि सही टेस्टिंग से पोल खुल जाएगी. सरकार कहती है प्रदेश में कोरोना की पॉजिटिव दर 18 फीसदी है. अगर सही टेस्टिंग हो जाएं तो यह 40 प्रतिशत निकलेगी. इससे आंकड़े बढ़ जाएंगे. इससे प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाएं कम हो जाएंगी. मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि प्रदेश की एक ऐसी अस्पताल बताएं जहां सभी स्वास्थ्य सुविधाएं हो.

वहीं कांग्रेस के नेताओं के घरों मैं बैठने के सवाल पर कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस काम कर रही है. हमारे विधायक इंदौर में लगे हैं, हमारे विधायकों ने जो काम किया है उसकी मुझे पूरी जानकारी है. जब कमलनाथ से सवाल किया गया कि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काम करते हैं और प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान. इस पर कमलनाथ तंज कसते हुए जवाब दिया कि पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और सीएम शिवराज ही काम करते हैं. उन्होंने कहा कि आज मध्य प्रदेश का नौजवान भटक रहा है. किसान परेशान है, छोटा व्यापारी दुखी है. ये हालात कोरोना के पहले के हैं.

सवालः जब ZEEMPCG के एडिटर दिलीप तिवारी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर कमलनाथ से सवाल किया कि महराज कहां हैं, सवाल नहीं उठा रहे हैं वो?

जवाबः इस सवाल का जवाब देते हुए कमलनाथ ने कहा कि मैं नहीं जानता वो कहा हैं. वो सवाल क्यों नहीं उठा रहे यह वो ही जानें. शायद वह भी संतुष्ट होंगे, सबकुछ ठीक चल रहा है. लेकिन मुझे उनके बारे में कुछ पता नहीं है. वहीं कमलनाथ से पूछा गया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया आरोप लगाते थे कि सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार और दलाली आपकी सरकार में होती थी. इस पर कमलनाथ ने जवाब देते हुए कहा कि सिंधिया की टिप्पणियों पर मैं बोलना नहीं चाहता. ग्वालियर जाकर जनता से पूछिए कि वो कहां हैं. पॉलिटिकल लाइफ में सब चीजों का खुलासा होता है. ये याद रखिए सबका खुलासा होगा. मुझे इसकी कोई चिंता नहीं है. वहीं जब उनसे पूछा गया कि अगर कही कमी होती है तो सवाल उठाने का हक सबको होता है?. इस पर कमलनाथ ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को सवाल उठाना चाहिए. लेकिन कोई बीजेपी का नेता सवाल उठाने को तैयार नहीं है. मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं यहां किसी चीज की कोई कमी नहीं है.

जब कमलनाथ से पूछा गया कि मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि मरना सबको है तो डरना क्यों? इसका जवाब देते हुए कमलनाथ ने कहा कि इससे पता चलता है कि इनमें कितनी खोट है. आज प्रदेश की जनता और देश की जनता इनकी हालत समझ रही है. जब उनसे सवाल किया गया कि अब थाली बजाएं या ताली बजाएं. इस पर कमलनाथ ने कहा कि अब तो मोदीजी से पूछना चाहिए कि क्या करना है. जब देश में 100 मौतें हुए थीं तब यह थाली बजवा रहे थे. देश में हर जगह पब्लिसिटी की राजनीति हो रही है. लेकिन याद रखिएगा मोदीजी कहते थे 2 करोड़ लोगों को रोजगार देंगे, किसानों का 50 प्रतिशत नफा होगा. 15 लाख देंगे. खैर इन बातों को छोड़िए.

सवालः चुनाव में कोरोना भाग जाता है क्या?

जवाबः कमलनाथ ने कहा कि सरकार के मुताबिक जहां चुनाव हो रहे हैं वहां से कोरोना भाग जाता है. बंगाल से भाग गया, दमोह में उपचुनाव हो रहा है वहां से भाग गया. जब उनसे पूछा गया कि आपके नेता भी प्रचार कर रहे हैं. इस पर कमलनाथ ने कहा कि हम चुनाव से हट जाएं क्या?. अगर चुनाव आयोग ही सरकार के इशारे पर चलता है तो इसका जवाब चुनाव आयोग को देना चाहिए.

सवालः ममता बनर्जी हो या कोई और नेता जब हारने की बात हो तो ईवीएम पर सवाल उठा दो. जीते तो आप भी थे. सिंधिया ने आपकी सरकार गिरा दी?

जवाबः इस सवाल का जवाब देते हुए कमलनाथ ने कि अगर आम जनता को ईवीएम पर शक है तो बैलेट पेपर से चुनाव कराने चाहिए. 2018 के विधानसभा चुनाव में इन्हें पता था कि कांग्रेस की 150 सीटें आ रही हैं. इन्हें जो घपला करना था, इन्होंने उतना ज्यादा नहीं किया जितना करना चाहते थे. लेकिन फिर भी घपला किया था. वहीं जब कमलनाथ से पूछा गया कि छत्तीसगढ़ और राजस्थान में आपकी सरकार बनी. इस पर कमलनाथ ने कहा कि बीजेपी खुद नहीं चाहती थी राजस्थान में वसुंधरा राजे को अच्छी लीड मिले. बीजेपी को राज्य की सरकारों की उतनी चिंता नहीं है, जितनी लोकसभा की है. लेकिन अगर मध्य प्रदेश में ये जीत जाते, इनकी 200 सीटें आ जातीं तो आप ही इन पर प्रश्न उठाते. इससे प्रश्न खड़ा हो जाता है कि यह ईवीएम का खेल है. कमलनाथ ने कहा कि क्या अमेरिका ईवीएम का उपयोग करता है, यूरोप ईवीएम का उपयोग करता है, नहीं. ये देश मूर्ख तो नहीं हैं. केवल भारत और कुछ छोटे देशों को छोड़ दिया जाए तो कोई ईवीएम का उपयोग नहीं करता. कमलनाथ ने कहा कि मैं बीजेपी से पूछना चाहता हूं कि अगर जनता ईवीएम नहीं चाहती तो आप कहिए हम बेलेट पेपर से चुनाव कराते हैं और 300 सीटें जीतकर लाते हैं. लेकिन ये लोग मानते नहीं.

सवालः चुनाव में कोरोना मुद्दा क्यों नहीं है?

जवाबः कमलनाथ ने जवाब देते हुए कहा कि यह केवल राजनीति करते हैं. 2014 और 2019 में राष्ट्रवाद, लेकिन न नोजवानों पर बात न किसानों पर बात, झूठ बोले बिना शिवराज सिंह चौहान का खाना हजम नहीं होता. शिवराज सिंह चौहान ने दमोह उपचुनाव में मुझ पर आरोप लगाया कि छतरपुर का मेडिकल कॉलेज में छिंदवाड़ा ले गया. यह झूठ है. केंद्र सरकार ने उस मेडिकल कॉलेज को छतरपुर के लिए अलॉट किया था. जिसका भूमिपूजन खुद शिवराज सिंह चौहान ने किया था. इसके बाद भी यह झूठ बोलते हैं.

सवालः आप जब मुख्यमंत्री थे तब आप पर आरोप लगाया जाता था कि आप केवल छिंदवाड़ा के मुख्यमंत्री थे, सिंधिया ग्वालियर के. आप पर आरोप लगता है कि आपने सिंधिया को मलाई खिलाई. ?

जवाबः कमलनाथ ने कहा कि सिंधिया क्या थे क्या नहीं यह तो वही जानें, लेकिन उस वक्त सिंधिया हमारे नेता थे. हमने मलाई खिलाई हम तो स्वीकार करते हैं. मेरी सरकार सौदे से गई. पहली बार यह परंपरा हमारे देश में शुरू हुई कि विधायक खरीदो और सरकार गिराओ. मुझे कुर्सी की आवश्यकता नहीं थी. मैने सिद्धांतों से समझोता नहीं किया. जब उनसे पूछा गया कि मुख्यमंत्री का पद जाने का आपको कोई अफसोस नहीं होता. इस पर कमलनाथ ने कहा कि उन्हें इस बात का कोई अफसोस नहीं है. मुझे इस बात का पता था कि सिंधिया पार्टी छोड़ेंगे. इस बात की जानकारी मैंने पार्टी आलाकमान को भी दी थी.

कमलनाथ ने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि हमारी ग्यारह महीने की सरकार का हिसाब-किताब मैं प्रदेश की जनता को देने को तैयार हूं. शिवराज सिंह चौहान अपने 16 महीनों का हिसाब दें, मैं अपने 15 महीने का हिसाब देने को तैयार हूं. जब कमलनाथ से पूछा गया कि सिंधिया आप पर आरोप लगता है कि दिग्वियजय सिंह और कमलनाथ ने, सरकार में सबसे ज्यादा फायदा उठाया. इस पर कमलनाथ ने कहा कि इससे ज्यादा वो कुछ कह भी नहीं सकते. कमलनाथ ने कहा कि सिंधिया आज बीजेपी की तारीफ बहुत करते हैं. लेकिन मुझे इस बात का विश्वास है कि एक दिन सभी चीजें सामने जरूर आएंगी.

सवालः आपका कुर्ता पायजामा का स्टाइल हर मौसम में रहता है. आपको इसमें ठंडी नहीं लगती?

जवाबः इस सवाल के जवाब में कमलनाथ ने कहा कि मैंने जैकेट कभी-कभी पहनी है. मैं जो कुछ हूं यह ईश्वर की देन है. मैंने हनुमान जी का मंदिर बनवाया है. मैने भगवान की राजनीति नहीं की. मैंने छिंदवाड़ा के लिए जो करने के लिए सोचा, वह किया. कमलनाथ ने कहा कि मैं ऐसा मंदिर बनवाना चाहता था कि जब दिलीप तिवारी उस मंदिर में जाएं तो कहें कि वाह क्या मंदिर बनवाया है. सभी लोग यह कहें कि क्या मंदिर बना है. 

सवालः विपक्षी नेता कहते हैं कि हम बीजेपी की वैक्सीन नहीं लगवाएंगे?

जवाबः इस सवाल के जवाब में कमलनाथ ने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि सरकार को लोगों पर शक है. क्योंकि लोगों को पता नहीं है कि यह लोग कर क्या रहे हैं. जब सरकार पर लोगों को शक हो जाता है तो वैक्सीन पर शक होना भी संभावित है. देश में विपक्ष कहां हैं? इस सवाल के जवाब में कमलनाथ ने कहा कि जब इंदिराजी हारी थीं 77 में तब भी सब यही कहते थे, विपक्ष नहीं है सामने. लेकिन उसके बाद भी कांग्रेस उभरी. ये होता है. 2004 में सब कहते थे कि क्या सोनिया गांधी अटल बिहारी को हराएंगी. अटलजी से सब प्रेम करते थे. लेकिन फिर भी ऐसा हुआ और कांग्रेस जीती. हमारी देश की जनता बहुत समझदार है. वहीं राहुल गांधी के सवाल पर कमलनाथ ने कहा कि सबका अपना-अपना स्टाइल होता है. राहुल गांधी की अपनी सोच है. उनकी जो निष्टा है उसके कारण वो कभी कुछ बोल देते हैं. आप राहुल गांधी पर किसी भी विषय पर चर्चा करिए वो करने को तैयार हैं.

सवालः कांग्रेस पांच राज्यों का चुनाव कैसे लड़ रही है, जहां कांग्रेस सरकार है वहां से फंडिग हो रही है?

जवाबः इस सवाल के जवाब में कमलनाथ ने कहा कि बीजेपी के नेता क्या अपनी पत्नी के जेवर बेचकर चुनाव लड़ रहे हैं. ये गलत बात है. हर पार्टी को फंडिंग की जरूरत होती है. लेकिन जिस तरह बीजेपी ने धन-बल का उपयोग किया है वैसा देश में कभी नहीं हुआ. वहीं जब उनसे पूछा गया कि बीजेपी उन पर आरोप लगाती है कि जब वह मुख्यमंत्री थे तो 10 जनपथ पैसा जाता था. इस पर कमलनाथ ने कहा कि ऐसा कोई भी आरोप सही नहीं है. कोई भी पैसा 10 जनपथ कभी नहीं जाता था. लेकिन मैं बीजेपी से पूछना चाहता हूं कि दिल्ली में पार्टी का इतना बड़ा ऑफिस बनाया, इसे आपने कैसे बनाया?. वहीं जब कमलनाथ से पूछा गया कि आपके करीबी नेताओं के घर पर छापे पड़वाए गए? इस पर कमलनाथ ने कहा कि आज देश में यही राजनीति हो रही है. सभी सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है. पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं तो वहां विपक्षी नेताओं पर छापे पड़वाए जा रहे हैं, लेकिन यह काम जनता देख रही है.

सवालः सरकारें कोई भी हों, आरोप है लगते हैं कि सब जगह भ्रष्टाचार है, महाराष्ट्र में भी ऐसा ही हुआ ?

जवाबः इस सवाल के जवाब में कमलनाथ ने कहा कि महाराष्ट्र में जिस पुलिस अधिकारी को हटा गया उन पर आरोप लगे थे. मंत्री ने इसलिए इस्तीफा दिया क्योंकि उन पर जांच हो रही थी. जब उनसे पूछा गया कि कांग्रेस शासित राज्यों पर आरोप लग रहा है कि वह कोरोना से लड़ने में फैल है. पंजाब के मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि उनके राज्य को वैक्सीन नहीं मिल रही है.  इस पर कमलनाथ ने कहा कि वैक्सीन कोई राज्य सरकार नहीं बनाती. यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होती है. तो वैक्सीन देने की जिम्मेदारी केंद्र सरकारी की है.

वहीं किसान आंदोलन के सवाल पर कमलनाथ ने कहा कि देश का किसान तीन काले कानूनों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है. कमलनाथ ने कहा कि पहला कानून है निजीकरण, क्योंकि ये लोग खेती का निजीकरण करना चाहते हैं. लेकिन निजीकरण की क्या आवश्यकता है, इसका जवाब सरकार नहीं देती. दूसरा कानून ठेके की खेती. किसान ठेके की खेती क्यों करेगा. अगर ऐसा होगा तो किसान बंधुआ हो जाएगा. तीसरा स्टॉक लिमिट करना. लेकिन सभी पूरी आजादी होनी चाहिए कि उसे कब अपना माल बेचना है और कब नहीं. ये सभी कानून उद्योगपतियों के लिए हैं. क्योंकि उद्योगपति खेती नहीं करते वह मुनाफे के लिए काम करते हैं और मुनाफा किसान की जेब से आएगा. खेती और फैक्ट्री में बहुत अंतर होता है.

कमलनाथ ने कहा कि जब किसान नहीं चाहते यह कानून तो फिर ये किसानों पर क्यों थोपे जा रहे हैं. वहीं जब उनसे पूछा गया कि यह कानून कांग्रेस के घोषणापत्र में भी थे. इस पर कमलनाथ ने कहा कि जो कानून बीजेपी ने बनाए हैं, उस तरह के कानून कांग्रेस के घोषणा पत्र में नहीं था. बीजेपी ने जो कानून बनाए हैं उससे किसान को बंधुआ बनाने की कोशिश हो रही है.

जब उनसे पूछा गया कि बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस इन कानूनों पर किसानों को गुमराह कर रही है. विरोध केवल दिल्ली के चारों तरफ हो रहा है. इस पर कमलनाथ ने कहा कि पूरे देश का किसान इन कानूनों का विरोध कर रहा है. लेकिन हर राज्य का किसान यहां नहीं आ सकता है. आज देश का किसान समझदार है और उसे अपने अच्छे बुरे का पता है. इसलिए ही किसान इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं.  

सवालः ZEE मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के रोको-टोको अभियान पर आप देश की जनता से क्या अपील करना चाहेंगे?

जवाबः ZEE मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के रोको-टोको अभियान पर कमलनाथ ने कहा कि वह पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से पूछना चाहते हैं कि प्रदेश में कहीं अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं हैं. कमलनाथ ने कहा कि वह प्रदेश की जनता से अपील करना चाहते हैं कि इस सरकार के भरोसे मत रहिए. आप तो कोरोना से बचने के सभी उपाए अपनाएं. मास्क पहनिए, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करिए.

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