Mid-Day Meal में बच्चों को क्यों नहीं मिल रहा चिकन-मटन? सुप्रीम कोर्ट ने पूछ लिया बड़ा सवाल
Mid-Day Meal Scheme: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने लक्ष्यद्वीप प्रशासन (Lakshadweep Administration) ने जवाब मांगा है और पूछा है कि मिड-डे मील योजना से चिकन और मटन क्यों हटाया गया है.
Chicken-Mutton in Mid-Day Meal: मिड-डे मील योजना से चिकन और मटन हटाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने लक्ष्यद्वीप प्रशासन (Lakshadweep Administration) से जवाब मांगा है कि आखिर मिड-डे मील योजना से चिकन और मटन क्यों हटाया गया. बता दें कि जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ लक्ष्यद्वीप में मिड-डे मील योजना से चिकन और मटन हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी. लक्ष्यद्वीप में पहले बच्चों को मिड-डे मील में चिकन और मटन दिया जाता था, लेकिन अब प्रशासन ने इस बंद कर दिया है. बेंच ने अगली सुनवाई के लिए 11 जुलाई की तारीख तय की है और लक्ष्यद्वीप प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट में जवाब सौंपना है.
केरल हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
इससे पहले मिड-डे मील योजना (Mid-Day Meal Scheme) से चिकन और मटन हटाए जाने के फैसले को केरल हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन कोर्ट ने सितंबर 2021 में इसे खारिज कर दिया था. इसके बाद याचिकाकर्ता ने केरल हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती दी, जिस पर जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने सुनवाई करते हुए सवाल उठाया है.
बच्चों को क्यों कर रहे हैं इससे वंचित: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने लक्ष्यद्वीप प्रशासन (Lakshadweep Administration) से सवाल किया कि आप बच्चों को इससे वंचित क्यों कर रहे हैं? इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अपनी बात रखी और कहा कि एक बेहतर चीज दी गई है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या बेहतर है? चिकन और मटन के बजाय, वे सूखे मेवे खाएंगे? इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मटन और चिकन सप्लीमेंट्री आइटम के तौर पर दिया जाता है.
लक्ष्यद्वीप प्रशासन ने क्यों लिया ऐसा फैसला?
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कोर्ट में कहा कि मटन और चिकन सप्लीमेंट्री आइटम के तौर पर दिया जाता है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि यह एक नीतिगत फैसला है, जो विभिन्न पहलुओं को देखने के बाद लिया जाता है. एएसजी ने कहा कि पौष्टिक पहलुओं में गड़बड़ी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के बेंच ने कहा कि इन्हें देना जारी रखें.