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सीबीआई से बर्खास्त ASI को पकड़ने पहुंची CBI की टीम, परिवारवालों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

विभाग के एक बर्खास्त एएसआई को गिरफ्तार करने के दौरान एएसआई के परिवार वालों के द्वारा सीबीआई की टीम को दौड़ा दौड़ा कर पीटा.

सीबीआई से बर्खास्त ASI को पकड़ने पहुंची CBI की टीम, परिवारवालों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा
ग्रेटनर नोएडा में सीबीआई टीम को दौड़ा-दौडा कर पीटा गया.

नई दिल्लीः सीबीआई के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि एक बड़े घोटाले का केस अभी ट्रांसफर हुआ और घोटाले से जुड़े लोगों को बचाने के नाम पर लाखों रुपए की रिश्वत की बंदरबांट शुरू हो गई है. साथ ही सीबीआई की टीम अपने ही विभाग के लोगों को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार करने लगी है. इसी कड़ी में सीबीआई ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जब वो अपने ही विभाग के एक बर्खास्त एएसआई को गिरफ्तार करने के दौरान एएसआई के परिवार वालों के द्वारा सीबीआई की टीम को दौड़ा दौड़ा कर पीटा जाएगा.

मामला ग्रेटर नोएडा के सुनपुरा गांव का है. जहां सीबीआई की छह लोगों की टीम लोकल पुलिस को बताए बिना अपने ही विभाग के बर्खास्त एएसआई सुनील दत्त को पकड़ने गई तो सुनील के परिवार ने सीबीआई की टीम पर लाठी डंडो से हमला कर दिया. जिसमें दो सीबीआई के लोग घायल हो गए. पिटाई के दौरान ही सीबीआई वालों ने किसी तरह पुलिस को ख़बर दी. वहीं इस सूचना पर पुलिस के भी होश उड़ गए.

ग्रेटर नोएडा पुलिस के इकोटेक तीन थाने की पुलिस ने जैसे तैसे सीबीआई टीम को बचाया और थाने लेकर पहुंचे. सीबीआई ने सुनील दत्त के परिवार वालों के खिलाफ लिखित में शिकायत दी जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर एक आरोपी धर्मवीर को गिरफ्तार कर लिया है.

दरअसल, यमुना एक्सप्रेस वे औधोगिक प्राधिकरण में 126 करोड़ का ज़मीन घोटाले हुआ था. जिसकी एफआईआर कासना थाने में दर्ज हुई थी, चूंकि इस मामले में यमुना प्राधिकरण के सीईओ पीसी गुप्ता समेत कई अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था. लिहाजा यूपी सरकार ने इस घोटाले कि जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी. 

सीबीआई ने अभी उस मामले की जांच शुरू भी नहीं की थी कि उस केस में आरोपियों को बचाने के नाम पर सीबीआई के एक इंस्पेक्टर वीएस राठौर, एएसआई सुनील दत्त यूपी सरकार के एक तहसीलदार रणवीर के साथ मिलकर आरोपियों को बचाने और जांच को प्रभावित करने के नाम पर लाखों की रिश्वत लेने लगे.

सीबीआई ने एक सूचना के बाद रेड कर 18 लाख बरामद कर लिए थे और मौके से सीबीआई इंस्पेक्टर वीएस राठौर और तहसीलदार रणवीर को गिरफ्तार कर लिया. लेकिन एएसआई सुनील दत्त फ़रार होने में कामयाब हो गए. गिरफ्तार तहसीलदार ने सीबीआई को बताया कि उसने लाखों रुपये सुनील और राठौर को दिए है. और रिश्वत का यह पैसा इनलोगों ने सैनिक फार्म में रहने वाले रिटायर्ड विंग कमांडर वाईएस तोमर के घर पर रखा हुआ है.

लिहाजा 2 फरवरी को सीबीआई की एक टीम ने रिटायर्ड विंग कमांडर वाईएस तोमर के घर पर छापेमारी की, उस टीम के हिस्सा रहे हैड कांस्टेबल सुदेश पर घर से बरामद किए गए कुल रकम में से छह लाख रुपए गायब करने का आरोप लगा. सीबीआई ने इस मामले में भी एक एफआईआर दर्ज कर सुदेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. एक घोटाले की जांच शुरू होने से पहले ही उस जांच के नाम पर रिश्वतखोरी के मामले में अब तक दो एफआईआर दर्ज कर ली गई है. और सीबीआई के दो लोगों को गिरफ्तार भी खुद सीबीआई ने किया है, जबकि तीसरे की तलाश में सीबीआई के परिवार वालों से पिट रही है.