न्यायिक कसौटी पर खरे न उतरने वाले आदेश देने से बचें न्यायिक अधिकारी-इलाहाबाद हाई कोर्ट

कोर्ट ने सीएमओ डा. हरगोविंद सिंह की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ किसी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई करने पर भी रोक लगा दी है.  

न्यायिक कसौटी पर खरे न उतरने वाले आदेश देने से बचें न्यायिक अधिकारी-इलाहाबाद हाई कोर्ट
फाइल फोटो

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संत कबीर नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के खिलाफ फर्जी कोविड सर्टिफिकेट बनाने के आरोप में आपराधिक षडयंत्र और धोखाधड़ी आदि धाराओं में दर्ज मुकदमे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने सीएमओ डा. हरगोविंद सिंह की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ किसी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई करने पर भी रोक लगा दी है.

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कोर्ट ने आरोपी सीएमओ की गिरफ्तारी नहीं करने का निर्देश दिया है और कहा कि याची का किसी प्रकार से उत्पीडऩ न किया जाए. प्रदेश सरकार को याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. याचिका की अगली सुनवाई एक जुलाई को होगी.

जज को भविष्य में सावधान रहने की नसीहत
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश के न्यायिक अधिकारियों से कहा है कि कोरोना काल में वह ऐसे आदेश न दें जो न्याय तंत्र में बाधक हो. हाई कोर्ट ने विधायक की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट को फर्जी मान सीएमओ पर एफआइआर दर्ज कराने वाले जज को भविष्य में सावधान रहने  के लिए कहा है. इसके साथ न्यायिक कसौटी पर खरे न उतरने वाले आदेश न देने की नसीहत भी दी.

सीएमओ डा. हरगोविंद सिंह की याचिका पर सुनवाई
न्यायमूर्ति डा. केजे ठाकर तथा न्यायमूर्ति अजीत सिंह की खंडपीठ ने संतकबीर नगर के सीएमओ डा. हरगोविंद सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नसीहत दी. कोर्ट ने संत कबीर नगर के न्यायिक अधिकारी की संवेदनहीनता को दुखद करार दिया. अन्य सह अभियुक्तों को भी इसी तरह राहत दी गई है ताकि उन्हें हाई कोर्ट न आना पड़े साथ ही राज्य सरकार से जवाब मांगा है.

क्या था पूरा मामला
कोर्ट में तलब एक विधायक ने कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट दिखा पेशी में नहीं आने की वजह बताई थी. इसे कोर्ट ने फर्जी माना था और नाराज होकर रिपोर्ट देने वाले सीएमओ और अन्य अधिकारियों के खिलाफ खलीलाबाद कोतवाली में एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया था. 16 दिसंबर, 2020 को एफआइआर दर्ज होने के बाद सीएमओ ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट की शरण ली थी. मामले में अगली सुनवाई पहली जुलाई को होगी.

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