लॉकडाउन में फीकी पड़ी बनारस के खिलौनों की चमक, धंधा चौपट होने से व्यापारी परेशान

उत्तर प्रदेश के बनारस में बनने वाले रशियन डाल, लट्टू और शादी में इस्तेमाल होने वाले सिंघोरा जैसे तमाम खिलौनों की पहचान सात समुंदर पार तक है, लेकिन लॉकडाउन ने इनकी चमक को फीका कर दिया है. कोरोना काल में बनारस के खिलौना उद्योग को खासा नुकसान पहुंचा है.

लॉकडाउन में फीकी पड़ी बनारस के खिलौनों की चमक, धंधा चौपट होने से व्यापारी परेशान
फाइल फोटो

नवीन पांडेय/बनारस: उत्तर प्रदेश के बनारस में बनने वाले रशियन डाल, लट्टू और शादी में इस्तेमाल होने वाले सिंघोरा जैसे तमाम खिलौनों की पहचान सात समुंदर पार तक है, लेकिन लॉकडाउन ने इनकी चमक को फीका कर दिया है. कोरोना काल में बनारस के खिलौना उद्योग को खासा नुकसान पहुंचा है. जिसकी वजह से इनके सामने आर्थिक समस्या खड़ी हो गई है.

लकड़ी के खिलौने बनाने वाले विजेंद्र गुप्ता की मानें तो, सरकार ने पहले ही कोरैया लकड़ी को बैन कर दिया था, जिसकी वजह से इन्हें यूको लिप्ट्स लकड़ी का इस्तेमाल करना पड़ता था, जिससे ये बेहद परेशान थे. और अब लॉकडाउन की वजह से तो व्यापारियों पर दोहरी मार पड़ी है.

वहीं खिलौना व्यापारी राजेन्द्र का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से सब कुछ बन्द है लिहाजा इनकी बिक्री नहीं हो पा रही है जिसकी वजह से इस उद्योग से जुड़े लोगों की आर्थिक हालात खराब हो गई है.

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आपको बता दें कि कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप की वजह से देशभर में लॉकडाउन लागू है. लॉकडाउन के तीन चरणों में उद्योगों को किसी प्रकार की छूट नहीं दी गई थी. लेकिन अब चौथे फेस में व्यापारियों को थोड़ी राहत मिली है.

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