राष्ट्रपति के आने से पूरे परिवार में खुशी का माहौल, पसंद है भाभी के हाथ की कढ़ी और रसियाउर
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तीन दिवसीय दौरे पर 25 जून की शाम कानपुर आ रहे हैं. 27 जून को वह कानपुर देहात स्थित अपने जन्मस्थान परौंख गांव भी जाएंगे. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आने की खबर से परिवार में खुशी का माहौल है.
संकल्प दुबे/कानपुर: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तीन दिवसीय दौरे पर 25 जून की शाम कानपुर आ रहे हैं. 27 जून को वह कानपुर देहात स्थित अपने जन्मस्थान परौंख गांव भी जाएंगे. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आने की खबर से परिवार में खुशी का माहौल है.
राष्ट्रपति की जिम्मेदारी के साथ पारिवारिक संबंधों को बखूबी निभा रहे
मौजूदा समय मे लोगों को जहा एक ओर अपने पदों की जिम्मेदारी संभालने की जद्दोजहद करनी पड़ती है. वहीं अपने पारिवारिक रिश्तों को भी कायम रखने की चिंता होती है. आगे बढ़ने की होड़ में लोग परिवारिक रिश्तों और सम्बन्धों से दूर हो जाते है. लेकिन देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद भी अपने पारिवारिक संबंधों को बखूबी निर्वाह करते है.साथ ही उनका सरल स्वभाव भी परिवार के प्रत्येक छोटे बड़े सदस्य के उनके प्रति सम्मान और लगाव को और बढ़ाता है.
परिवार के नन्हें सदस्य भी हुए खुश
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के परिवार के नन्हे सदस्य भी उनके आने से खुश दिख रहे हैं. साथ ही उनके साथ बिताए दिनों को याद कर आशा सजोने का काम अभी से शुरू कर दिया है. नन्हे नाती अभय कोविन्द अपनी मीठी सी मुस्कान से राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को याद कर रहे हैं. नन्हे अभय कोविंद की माने तो राष्ट्रपति हमेशा उनको प्यार करते हैं. साथ ही दादी से भी खूब दुलार मिलता है. जब भी मुलाकात हुई तो उनको प्यार के साथ चॉकलेट खाने को मिली.
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पसंद है भाभी की कढ़ी और रसियाउर
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बड़े भाई प्यारेलाल कोविंद और भाभी गंगाजली उनसे मुलाकात के लिए उत्साहित हैं. जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति को भाभी के हाथ की कढ़ी और रसियाउर (गन्ने के रस में पका चावल) बहुत पसंद हैं.
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राष्ट्रपति गांव न आ पाने के बाद भी क्षेत्र के विकास की लेते जानकारी
वहीं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भतीजे पंकज कोविंद ने राष्ट्रपति के पैतृक गांव परौख और झींझक कस्बे में आने लेकर खुशी जाहिर की. उन्होंने राष्ट्रपति के आने के बाद क्षेत्र का विकास होने की आशा व्यक्त की. वहीं राष्ट्रपति बनने के बाद भी वह बराबर गांव, क्षेत्र और जनपद के विकास के विषय मे जानकारी लिया करते. यहीं नहीं परिवार के सदस्यों, मित्रो और ग्रामीणों के विषय भी जानकारी लिया करते थे.
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