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अयोध्या केस: राम विलास वेंदाती मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन के ख़िलाफ़ दर्ज कराएंगे FIR

सुप्रीम कोर्ट में रामजन्म भूमि का नक्शा फाड़ने को लेकर राजीव धवन के खिलाफ एफआईआर कराएंगे.

अयोध्या केस: राम विलास वेंदाती मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन के ख़िलाफ़ दर्ज कराएंगे FIR
रामविलास वेदांती ने कहा कि राम मंदिर निर्माण में अब कोई देरी नहीं होगी.

अयोध्या: रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य व पूर्व सांसद रामविलास वेदांती (Ram Vilas Vedanti) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अयोध्या केस (Ayodhya case) में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन (Rajeev Dhawan) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे. सुप्रीम कोर्ट में रामजन्म भूमि का नक्शा फाड़ने को लेकर एफआईआर कराएंगे. सुबह 10 बजे अयोध्या कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराएंगे. 

दरअसल, अयोध्‍या केस (Ayodhya Case) की 40वें दिन सुनवाई के दौरान बुधवार को मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने बेहद आपत्तिजनक व्यवहार दिखाया और हिंदू पक्ष के वकील विकास सिंह द्वारा कोर्ट के सामने पेश किए गए नक्शे की कापियां फाड़ दीं. हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह ने विवादित जगह पर मन्दिर की मौजूदगी साबित करने के लिए पूर्व IPS किशोर कुणाल की एक किताब "Ayodhya Revisited' का हवाला  देना चाहा. राजीव धवन ने इसे रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बताकर विरोध किया.

विकास सिंह ने इसके बाद एक नक्शा रखा और उसकी कॉपी राजीव धवन को दी. धवन ने इसका भी विरोध करते हुए अपने पास मौजूद नक्शे की कॉपी फाड़ना शुरू कर दी. चीफ जस्टिस ने धवन के इस तरीके पर नाराजगी के अंदाज़ में कहा- आप चाहे तो पूरे पेज फाड़ सकते हैं. चीफ जस्टिस ने इस तौर-तरीके पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अगर इसी तरह का माहौल जारी रहा तो वह अभी सुनवाई पूरी कर देंगे और फिर जिस भी पक्ष को जो दलील देनी होगी वह लिखित में लेंगे.

अयोध्‍या केस: सभी पक्षों की दलीलें पूरी, फैसला सुरक्षित
इधर, अयोध्‍या केस (Ayodhya Case) में छह अगस्‍त से चल रही नियमित सुनवाई सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद पूरी हो गई. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. कहा जा रहा है कि 17 नवंबर से पहले फैसला आ सकता है. ऐसा इसलिए क्‍योंकि 17 नवंबर को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई रिटायर होने वाले हैं. वह इस केस की सुनवाई के लिए गठित संविधान पीठ के मुखिया हैं. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में अयोध्‍या केस (Ayodhya Case) की 40वें दिन की सुनवाई में रामलला विराजमान के सीएस वैद्यनाथन ने अपनी जिरह में कहा कि पैग़ंबर मोहम्मद ने कहा था कि किसी को मस्ज़िद उसी ज़मीन पर बनानी चाहिए जिसका वह मालिक है. सुन्नी वक्फ बोर्ड जगह पर मालिकाना हक साबित करने में नाकाम रहा और सिर्फ नमाज़ पढ़ने को आधार बना कर ज़मीन दिए जाने की मांग कर रहा है.