सपा में वापसी को लेकर डगमगाया शिवपाल का प्रण, बोले- गठबंधन में हमारी प्राथमिकता...

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कुछ महीने पहले सभी पुराने साथियों के लिए पार्टी के दरवाजे खुले होने की बात कही थी.

सपा में वापसी को लेकर डगमगाया शिवपाल का प्रण, बोले- गठबंधन में हमारी प्राथमिकता...
शिवपाल ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन करने के सीधे तौर पर संकेत दिए हैं.

इटावा: प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (PSPL) के नेता शिवपाल सिंह यादव (Shivpal singh yadav) एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. दरअसल, शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) से गठबंधन करने की बात कही है. पीएसपी के नेता शिवपाल सिंह यादव ने मंगलवार को कहा कि गठबंधन के लिए हमारी प्राथमिकता समाजवादी पार्टी है. उन्होंने कहा कि अगर हमारा गठबंधन समाजवादी पार्टी से होता है, तो 2022 में हमारी सरकार बनेगी. शिवपाल ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन करने के सीधे तौर पर संकेत दिए हैं.

दरअसल, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कुछ महीने पहले सभी पुराने साथियों के लिए पार्टी के दरवाजे खुले होने की बात कही थी. वहीं, अखिलेश के इस बयान के बाद उनके चाचा और पीएसपी नेता शिवपाल सिंह यादव का प्रण डगमगाता दिख रहा है. मीडिया के सामने कभी भी सपा में नहीं जाने का प्रण लेने वाले शिवपाल यादव के इस नए बयान से लग रहा है कि वह भी भतीजे अखिलेश से नाराजगी दूर करने के मूड में दिख रहे हैं.

इससे पहले भी शिवपाल सिंह यादव ने एक बयान में भतीजे अखिलेश यादव के साथ गठबंधन की बात कही थी. शिवपाल ने कहा था कि विधानसभा चुनाव 2022 में उनकी पार्टी गठबंधन करेगी. 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी में शामिल होने के मुद्दे पर शिवपाल सिंह ने कहा था कि मैं कई बार कह चुका हूं कि हम गठबंधन करेंगे और बातचीत चल रही है तो हम तैयार हैं गठबंधन के लिए. 

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी से गठबंधन पर शिवपाल ने पहले भी कहा था कि जहां हमें सम्मान मिलेगा, वहां हम गठबंधन जरूर करेंगे. एक बयान में शिवपाल ने कहा था कि हम कभी नहीं चाहते थे कि समाजवादी पार्टी से कभी अलग भी होना पड़े. 

उन्होंने कहा था कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के साथ बहुत संघर्ष के बाद हमने इतनी बड़ी पार्टी बनाई थी. वहीं, पारिवारिक झगड़े पर उन्होंने कहा था कि कुछ लोग षड्यंत्रकारी हैं. हमने कभी नहीं चाहा कि हम लोग अलग-अलग हो. समाजवादी पार्टी से हमने कभी अलग होना नहीं चाहा, लेकिन होना पड़ा.