Electricity Workers Strike in Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में दो दिन की बिजली हड़ताल के बीच बिजली संकट (Power Strike) का खतरा आखिरकार खत्म हो गया, जब रविवार शाम को बिजली कर्मियों की हड़ताल खत्म हो गई. ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और राज्य विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति के नेता शैलेंद्र दुबे की अगुवाई में बातचीत के बाद ये फैसला हुआ. दरअसल,. बिजलीकर्मियों की हड़ताल (Bijli hadtal) से श्रावस्ती, बिजनौर, मेरठ समेत कई जिलों में संकट है. विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति ने ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से वार्ता विफल होने के बाद 72 घंटे के लिए बिजली कर्मी की हड़ताल शुरू की थी. तीन हजार संविदा कर्मचारियों की बर्खास्तगी और कर्मचारी नेताओं पर एफआईआर के बावजूद कर्मचारी टस से मस नहीं हुए थे. करीब एक लाख विद्युत कर्मी इस हड़ताल में शामिल रहे थे. 


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कर्मचारियों की कई मांगे थीं, इसमें मौजूदा और रिटायर वर्करों के घर बिजली मीटर न लगाने की मांग भी शामिल है. वहीं आजमगढ़, मेरठ समेत कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है और तोड़फोड़ की घटना सामने आई. इसके बाद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने चेतावनी दी कि ऐसे कर्मचारियों को चिन्हित कर कठोर कार्रवाई की जाएगी. इसी के बाद तीन हजार संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है. जबकि कर्मचारी संगठनों के 22 नेताओं पर एफआईआर दर्ज कराई गई है.


बिजली कर्मियों की हड़ताल पर सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है. ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने ऐलान किया कि बिजली आपूर्ति बाधित करने वाले हड़ताली कर्मियों पर एस्मा (ESMA) लगेगा. एस्मा के तहत 1 साल की सजा का प्रावधान है. बिजली व्यवस्था बाधित करने वाले विद्युत कर्मियों पर सरकार का कड़ा एक्शन होगा. सभी जनपदों के डीएम और एसपी को अलर्ट भेजा गया है.हड़ताल पर गए संविदा कर्मी (Contract Workers) बर्खास्त होंगे.


विद्युत कर्मचारी संयुक्त परिषद के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि ऊर्जा मंत्री वार्ता विफल होने के बाद बिजली कर्मी हड़ताल पर जा रहे हैं.सांकेतिक हड़ताल के दौरान अगर सड़क पर उतरने वाले बिजली कर्मियों को गिरफ्तार किया गया तो अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी. हड़ताल के साथ जेल भरो आंदोलन भी होगा. इलेक्ट्रिसिटी एंप्लायीज फेडरेशन ऑफ इंडिया ( EFFI) ने भी इस हड़ताल को समर्थन देने का फैसला किया है.  


हड़ताली बिजली कर्मियों की प्रमुख मांगें....


1. बिजली विभाग के मौजूदा और सेवानिवृ्त्त विद्युत कर्मियों के घर बिजली मीटर न लगाए जाएं
2. विद्युत उत्पादन एवं वितरण विभाग में निजीकरण की प्रक्रिया तुरंत बंद की जाए
3. ओबरा और अनपरा में 800-800 मेगावॉट की दो पॉवर थर्मल यूनिट के निर्माण, संचालन और मरम्मत का काम एनटीपीसी की जगह यूपी राज्य विद्युत उत्पादन निगम (UPPCL) को दिया जाए.
4. बिजली कर्मचारियों में ओल्ड पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) लागू की जाए. तेलंगाना और राजस्थान की तरह यूपी बिजली विभाग के संविदा कर्मियों को नियमित स्थायी किया जाए. 
5. यूपी राज्य विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (UP Rajya Vidyut Karmchari Sanyukt Sangharsh Samiti) का कहना है कि समझौते के तहत उत्तर प्रदेश बिजली निगम के स्टॉफ को 9, 14 और 19 साल की सेवा में प्रमोशन दिया जाना था.


5. साथ ही 220 केवी, 400 केवी और 765 केवी सबस्टेशनों के संचालन और ट्रांसफार्मर के रखरखाव का काम आउटसोर्स न करने की बात थी, जिसे पूरा नहीं किया गया. 


6. पावर सेक्टर एंप्लायीज प्रोटेक्शन एक्ट को तुरंत लागू करने की बात थी. साथ ही बिजली कर्मचारियों के परिवार को कैशलेस इलाज का वादा भी था. लेकिन इनमें से ज्यादातर को पूरा नहीं किया गया.


उधर,  बिजली मंत्री एके शर्मा ने कहा कि विद्युत सगठनों से हमारी 3 दिन से बात चल रही थी. हमारी बात नहीं बन पाई. गर्मी के मौसम में जनता को बिजली की काफी जरूरत है. संविदा कर्मी अगर काम पर नहीं आते तो वह कार्यमुक्त होंगे. ऑफिसर्स एसोसिएशन ने 2 घंटे एक्स्ट्रा काम करने की बात कही थी. ऐसी किसी हड़ताल से जनता को तकलीफ होती है. एस्मा हमने लागू किया है. बहुत सारे कर्मचारी काम करना चाहते हैं. कर्मचारियों को रोकने वालों पर कार्रवाई की जाएगी. नुकसान पहुचाने वालों पर रासुका के तहत कार्रवाई होगी.मुख्य सचिव, डीजीपी और एसीएस ने प्रदेश भर में अलर्ट किया है.


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