ऊधमपुर संसदीय क्षेत्र: फिर से खिलेगा कमल या राजपरिवार के साथ खड़ा होगा मतदाता?
लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी की टिकट पर लड़ रहे डॉ. जीतेंद्र सिंह न केवल मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री हैं, बल्कि जम्मू और कश्मीर में बीजेपी का बड़ा चेहरा भी हैं.
नई दिल्ली: जम्मू और कश्मीर की ऊधमपुर संसदीय सीट कई मायनों में खास रही है. इस सीट की पहली खासियत कश्मीर राजघराने से जुड़ी हुई है. इस सीट से पहले कश्मीर राजघराने के राजा कर्ण सिंह चुनाव लड़ते रहे हैं, अब उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह कांग्रेस की टिकट पर चुनावी मैदान में है. विक्रमादित्य सिंह के समर्थन में इस बार पीडीपी और नेशनल काफ्रेंस ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं. वहीं बीजेपी ने विक्रमादित्य सिंह को चुनौती देने के लिए वर्तमान सांसद डॉ. जीतेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है. डोडा जिले के रहने वाले डॉ जीतेंद्र सिंह न केवल मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री हैं, बल्कि जम्मू और कश्मीर में बीजेपी का बड़ा चेहरा भी हैं. इस सीट की दूसरी खासियत यह है कि ऊधमपुर संसदीय क्षेत्र क्षेत्रफल के लिहाज से सूबे की दूसरी सबसे बड़ी सीट है.
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ऊधमपुर से राजा कर्ण सिंह रहे हैं चार बार सांसद
जम्मू और कश्मीर की ऊधमपुर सीट को कांग्रेस का गढ़ कहा जाता रहा है. ऊधमपुर सीट पर अब तक उपचुनाव मिलाकर लोकसभा के कुल 14 चुनाव हुए हैं. जिसमें नौ बार कांग्रेस, चार बार बीजेपी और एक बार नेशनल पैंथर्स पार्टी से सांसद रहा है. इस सीट से जम्मू और कश्मीर राजघराने के डॉ. कर्ण सिंह पहली बार 1967 में कांग्रेस की टिकट पर सांसद चुने गए थे. इसके बाद, 1971, 1977 और 1980 में डॉ. कर्ण सिंह लगातार तीन बार ऊधमपुर से सांसद चुने गए. 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां से अपना उम्मीदवार बदल दिया. इस सीट पर बीजेपी को पहली बार 1996 में सफलता मिली. इस चुनाव में बीजेपी के चमनलाल गुप्ता चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे. चमनलाल गुप्ता यहां से लगातार तीन बार सांसद रहे.
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2014 में बीजेपी ने कांग्रेस से छीनी ऊधमपुर सीट
2014 के लोकसभा चुनाव में ऊधमपुर से 13 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था. यहां बीजेपी से डॉ जीतेंद्र सिंह और कांग्रेस से गुलाम नबी आजाद के बीच सीधा मुकाबला था. इस चुनाव में डॉ. जीतेंद्र सिंह ने 4,86,820 वोट हासिल कर जीत हासिल की थी. वहीं कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद को 4,26,336 वोट मिले थे. इस चुनाव में, पीडीपी के प्रत्याशी मोहम्मद अरशद मलिक को 30 हजार से कुछ ज्यादा वोट हासिल हुए थे. इस चुनाव में पीडीपी तीसरे पायदान पर रही थी. 2014 के इस चुनाव में नोटा का विकल्प चुनने वाले मतदाताओं की संख्या 10 हजार से अधिक थी.
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ऊधमपुर संसदीय से कौन-कौन कब रहा सांसद
लोकसभा चुनाव (वर्ष) | विजयी उम्मीदवार | राजनैतिक दल |
1967 | डॉ. कर्ण सिंह | कांग्रेस |
1968 | जीएस बिग्रेडियर | कांग्रेस |
1871 | डॉ. कर्ण सिंह | कांग्रेस |
1977 | डॉ. कर्ण सिंह | कांग्रेस |
1980 | डॉ. कर्ण सिंह | कांग्रेस |
1984 | गिरधारी लाल डोगरा | कांग्रेस |
1988 उपचुनाव | भीम सिंह | कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी |
1989 | धर्मपाल सिंह | कांग्रेस |
1996 | चमनलाल गुप्ता | बीजेपी |
1998 | चमनलाल गुप्ता | बीजेपी |
1999 | चमनलाल गुप्ता | बीजेपी |
2004 | चौधरी लाल सिंह | कांग्रेस |
2009 | चौधरी लाल सिंह | कांग्रेस |
2014 | डॉ. जीतेंद्र सिंह | बीजेपी |