15th BRICS Summit in South Africa: दक्षिण अफ्रीका में हो रहे शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी जोहान्सबर्ग जाएंगे या नहीं, इस पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने गुरुवार को अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी. प्रधानमंत्री कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि पीएम मोदी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जोहान्सबर्ग जाएंगे. दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति माटेमेला सिरिल रामाफोसा ने प्रधानमंत्री मोदी को इस समिट के लिए आमंत्रण दिया है. 


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दोनों देशों ने टेलिफोन पर की बातचीत


PMO ने बताया कि पीएम मोदी ने अफ्रीकी राष्ट्रपति के साथ गुरुवार को टेलीफोन पर बातचीत की. इस दौरान दक्षिण अफ्रीकी (South Africa) राष्ट्रपति ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (15th BRICS Summit) के लिए प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया और उन्हें इसकी तैयारियों के बारे में भी जानकारी दी. बयान के मुताबिक प्रधानमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया और कहा कि वे शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जोहान्सबर्ग की अपनी यात्रा के लिए उत्सुक हैं.


बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग में प्रगति का भी आकलन किया. इसमें वर्ष 2023 में द्विपक्षीय राजनयिक संबंधों की स्थापना की 30वीं वर्षगांठ भी शामिल है. बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने आपसी हित के कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया. 


रामफोसा ने G-20 पर भारत को दिया समर्थन


पीएमओ ने कहा कि राष्ट्रपति रामाफोसा (South Africa) ने G-20 की अध्यक्षता कर रहे भारत की पहलों को अपना पूरा समर्थन दिया. रामफोसा ने कहा कि वे जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत की यात्रा को लेकर आशान्वित हैं. बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने निरंतर संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई. 


बताते चलें कि ब्रिक्स  (15th BRICS Summit) एक अंतरराष्ट्रीय समूह है, जिसमें चीन, भारत, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं. ब्रिक्स का 15वां शिखर सम्मेलन इस साल 22 से 24 अगस्त तक जोहान्सबर्ग में आयोजित होने वाला है. फिलहाल दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स का मौजूदा अध्यक्ष है. 


संगठन पर हावी होने की कोशिश कर रहा चीन


वैश्विक कूटनीति पर नजर रखने वाले एक्सपर्टों के मुताबिक चीन (China) इस संगठन पर हावी होने की कोशिश कर रहा है. वह इसमें मिस्र, सऊदी अरब और कतर जैसे अपने तानाशाही वाले देशों को मेंबर बनवाना चाहता है. जबकि भारत इसमें अर्जेंटीना जैसे उभरते लोकतांत्रिक देशों को सदस्यता दिलवाने के लिए उत्सुक है. भारत को इस मुहिम में ब्राजील का भी समर्थन हासिल है. दोनों देश इस संगठन में सदस्यता के लिए नियम आधारित व्यवस्था लागू करवाने की मांग कर रहे हैं. इन सबके बीच रूस का रवैया तटस्थ बना हुआ है. 


(इनपुट एजेंसी)