वाशिंगटन: अब तक अमेरिका पूरी दुनिया के देशों को लोकतंत्र के नाम पर उपदेश दिया करता था. वो लोकतंत्र के नाम पर दुनिया भर में कमीशन, डेलीगेशन और रिपोर्ट्स जारी किया करता था. अमेरिका ने खुद को दुनिया में लोकतंत्र की रेटिंग देने वाली Un-Official एजेंसी बना लिया था. लेकिन अमेरिका की संसद में हिंसा के बाद अब भारत दुनिया के लिए लोकतंत्र की नई उम्मीद बन गया है.


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इस समय अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में संसद के अंदर सेना के हजारों जवान मौजूद हैं. इनकी तस्वीरें देखकर ऐसा लगता है कि मानो ये संसद नहीं बल्कि अमेरिका की सेना का कोई कैंप हो और यहां लेटे हुए ये सैनिक किसी युद्ध के मोर्चे पर जाने की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि ये सैनिक संसद में 6 जनवरी की हिंसा के बाद तैनात किए गए हैं. जब नए राष्ट्रपति को सत्ता सौंपने की कार्यवाही का विरोध करते हुए वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने हिंसा की थी.


अमेरिका में 1862 के गृह युद्ध जैसे हालात


अब इन तस्वीरों की तुलना वर्ष 1862 के गृह युद्ध से की जा रही है. उस समय भी अमेरिका (US) की संसद में बड़ी संख्या में सैनिक तैनात किए गए थे. इसका मतलब है कि शांति काल होने के बाद भी इस समय अमेरिका की संसद की तस्वीरें युद्ध काल जैसी हैं. ऐसी तस्वीरें अमेरिका की डेमोक्रेसी वाली Soft Power को कमजोर बता रही हैं.


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जब राजधानी का ये हाल है तो आप अमेरिका की आम जनता के डर को भी समझ सकते हैं. अमेरिका के न्यू जर्सी में शीशे की दीवारों से बने बड़े-बड़े शोरूम की सुरक्षा के लिए उन्हें लकड़ी के Boards से कवर किया जा रहा है. शोरूम के मालिकों को हिंसा होने पर हमले का डर है. इसलिए ये अपनी दुकानों की सुरक्षा में लगे हैं.


अपने नागरिकों को सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पा रहा अमेरिका


अमेरिका दुनिया का सबसे समृद्ध और आधुनिक समाज है. वहां का पुलिस विभाग लेटेस्ट हथियारों और Technology से लैस है. इसके बावजूद अमेरिका अपने लोगों को भी सुरक्षा का भरोसा नहीं दे पाया और नए राष्ट्रपति की शपथ से पहले विश्व रक्षक अमेरिका में भय का माहौल है.


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अमेरिका की संसद के बाहर लगा 8 फीट ऊंचा स्टील का बैरियर, वहां के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी शर्म है. लोहे की ऐसी बाड़ दो देशों की सीमा पर लगाई जाती है, ताकि कोई घुसपैठिया या आतंकवादी अंदर ना आ सके. लेकिन अमेरिका की संसद के बाहर ये दीवार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के समर्थकों से सुरक्षा के लिए लगाई गई है.


वहां पर अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां चल रही हैं. लेकिन संसद से लेकर सड़कों तक की सुरक्षा व्यवस्था को देखकर लगता है कि मानो किसी आतंकवादी हमले की आशंका है.


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राष्ट्रपति की शपथ से पहले अमेरिका में डर का माहौल


अमेरिका में डर इतना ज्यादा है कि वहां का प्रशासन अपने सुरक्षाबलों पर भी भरोसा नहीं कर रहा है. उन्हें डर है कि सुरक्षा में तैनात उनके अपने जवान भी शपथ ग्रहण समारोह में गड़बड़ी कर सकते हैं. इस समय वाशिंगटन डीसी में अमेरिका की सेना के लगभग 25 हजार जवान तैनात हैं.


अमेरिका की खुफिया एजेंसी FBI ने इन सभी जवानों के बारे में छान-बीन की है, ताकि किसी उग्रवादी संगठन से इनके संबंधों के बारे में पूरी जानकारी मिल जाए. इसकी एक वजह ये भी है कि अमेरिका की संसद में हुई हिंसा में वहां की सेना और पुलिस के Retired सदस्य शामिल थे.


अमेरिका की सड़कों पर दुनिया की सबसे ताकतवर सेना के जवानों का पहरा है. अमेरिका का रक्षा बजट पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा लगभग 53 लाख करोड़ रुपये है. उसकी सेना सबसे शक्तिशाली है और उनके पास सबसे आधुनिक हथियार भी हैं. लेकिन इसके बाद भी अमेरिका की जनता का डर कम नहीं हो रहा है.


वाशिंगटन डीसी के मेयर ने भी लोगों को शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की बजाय अपने अपने घरों में रहने या फिर शहर से बाहर जाने के लिए कहा है. इसकी एक वजह कोरोना का संक्रमण है, लेकिन अमेरिका में अब कोरोना महामारी से ज्यादा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों की हिंसा का डर है.


खतरे की आशंका के बाद अब अमेरिका की संसद के पास लॉकडाउन लगा दिया गया है और वहां के आम लोगों को ही संसद के करीब जाने की इजाजत नहीं है.


अमेरिका में न्यूयॉर्क की सड़कों पर पुलिस के जवान हथियारों के साथ पहरा दे रहे हैं. कई जगह मुख्य सड़कों को ब्लॉक करके निगरानी करने के लिए CCTV कैमरे लगा दिए गए हैं. वहां की सुरक्षा एजेंसियों ने इस शपथ ग्रहण समारोह को सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा ऑपरेशन लॉन्च किया है.


इसके अलावा आधुनिक अमेरिका के इतिहास में किसी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के लिए ऐसी तैयारियां पहली बार की गई हैं. अपने ही नागरिकों से डरा हुआ अमेरिका अब कैसे लोकतंत्र की रेटिंग जारी करेगा? और करेगा भी तो उन्हें मानेगा कौन? ये एक बड़ा सवाल है.


अमेरिका के इस शपथ ग्रहण समारोह के ऐतिहासिक बनने की दूसरी वजहें भी हैं. नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) के शपथ ग्रहण में वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शामिल नहीं होंगे और पिछले 100 वर्षों में ऐसा पहली बार होगा.


इस समय अमेरिका के राष्ट्रपति और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति दोनों की सुरक्षा वहां की सीक्रेट सर्विस के जिम्मे है. बता दें कि सीक्रेट सर्विस ही वहां पर सुरक्षा से जुड़े सभी बड़े फैसले ले रही है.


किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अमेरिका की सेना, रक्षा मंत्रालय, खुफिया एजेंसी और सभी सुरक्षाबलों को मिलाकर एक बड़ा नेटवर्क बनाया गया है. इसमें Bomb Disposal Squad और स्पेशल Security Teams भी शामिल हैं. अमेरिका के सभी 50 राज्यों से सुरक्षाबलों को राजधानी वाशिंगटन डीसी बुलाया जा रहा है. इन तैयारियों को देखकर ऐसा लगता है मानों अमेरिका किसी युद्ध की तैयारी कर रहा है.


अमेरिका की खुफिया एजेंसी FBI का दावा है कि उन्हें अब तक 1 लाख से ज्यादा डिजिटल सूचनाएं मिली हैं. जिनका संबंध शपथ ग्रहण समारोह में गड़बड़ी की आशंका से हो सकता है.


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