जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पर इस तरह होगी 'फाइनल स्ट्राइक'

जम्मू कश्मीर में अब आतंकियों के नापाक मंसूबों का चीरहरण होने वाला है. अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद अब सरकार ने घाटी में आतंक के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने का मूड बना लिया है.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Nov 25, 2019, 05:02 PM IST
    1. जम्मू कश्मीर में आतंक के खात्मे का मास्टरप्लान
    2. तीनों सेनाओं के स्पेशल कमांडोज का ज्वाइंट ऑपरेशन
    3. केंद्र सरकार ने बनाई रणनीति

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जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पर इस तरह होगी 'फाइनल स्ट्राइक'

नई दिल्ली: आतंक को पनाह देने वालों को अब नानी याद आने वाली है. उनके नापाक मंसूबों के इतने टुकड़े होंगे कि उसे गिनने में सात जन्म बीत जाएंगे. क्योंकि हिंदुस्तान ने एक ऐसी रणनीति तैयार की है, आतंकवाद का जड़ से खात्मा हो जाएगा. धारा 370 हटाने के बाद केन्द्र सरकार ने मन बना लिया है कि आतंक पर इतनी बड़ी चोट होगी कि हर गद्दारों की रूह कांप उठेगी.

आतंक के खात्मे का 'मास्टर प्लान'

जम्मू कश्मीर में अब आतंकियों के नापाक मंसूबों का चीरहरण होने वाला है. अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद अब सरकार ने घाटी में आतंक के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने का मूड बना लिया है. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से मिली जानकरी के अनुसार केंद्र सरकार ने घाटी में आतंकियों का सफाया करने के इरादे से थल सेना, वायु सेना और नौसेना की स्पेशल फोर्सेस को एक साथ तैनात करने का फैसला लिया है. इस मिशन में स्पेशल ऑपरेशन डिविजन यानी स्पेशल फोर्सेज को ज्वाइंट ऑपरेशन चलाने के लिए तैनात किया जाएगा. जो एकसाथ मिलकर आतंकियों का सर्वनाश करेंगे.

मिशन में कौन-कौन है शामिल?

आतंकियों के संहार के लिए इस स्पेशल ऑपरेशन में रक्षा मंत्रालय ने इंडियन आर्मी के पैरा कमांडो, नेवी के मार्कोस और इंडियन एयरफोर्स के गरुड़ कमांडोज को तैनात करने का फैसला किया है. खास बात ये है कि ऐसा पहली बार होगा जब AFSOD के अंतर्गत सभी स्पेशल फोर्सेज एक साथ मिलकर काम करेगी.

रक्षा मंत्रालय में तैनात एक अधिकारी के मुताबिक स्पेशल फोर्सेज को श्रीनगर और इसके आसपास के इलाकों में ऑपरेशन की जिम्मेदारी दी जानी सुनिश्चित की गई है. जहां, आतंकी सबसे ज्यादा एक्टिव रहते हैं.

एन्टी टेरर ऑपेरशन

एनएसजी की एन्टी टेरर 51 एसएजी की टीम एक साल से ज्यादा से घाटी में मौजूद है जिसे अब तक घाटी में किसी भी एन्टी टेरर ऑपेरशन में इस्तेमाल नहीं किया गया है. इस स्पेशल फोर्स के करीब 100 कमांडो कश्मीर में तैनात हैं. ये कमांडो पेनिट्रेशन रडार के साथ-साथ घातक हथियारों से लैस हैं, जिसमें करीब 30 स्नाइपर भी शामिल हैं.

घाटी में ब्लैक कैट को तैनात करने के पीछे गृह मंत्रालय ने ये तर्क दिया था कि एनएसजी होस्टेज सिचुएशन को बेहतर तरीके से डील कर सकती है. हालांकि, अब तक ऑपरेशन में ना इस्तेमाल होने की सूरत में एनएसजी ने गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिख कर ये पूछा था. कि उनको कश्मीर में किस मकसद के लिए तैनात किया गया है? गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक एनएसजी की टीम को क्रिसमस और नए साल के मौके पर हाई अलर्ट पर रखा गया है. जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संघठन पठानकोट जैसा एक और हमले को अंजाम दे सकते हैं.

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हिंदुस्तान ने आतंकियों के सर्वनाश के लिए अपना इरादा साफ कर दिया है. ऐसी हालत में सबसे बड़ा झटका पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को लगा होगा. क्योंकि बार-बार आतंक का सहारा लेकर हिंदुस्तान में दहशत फैलाने के उसके मंसूबों का चीथड़ा उड़ जाएगा. पाकिस्तान और आतंकिस्तान की खटिया खड़ी होने वाली है.

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