तीन डॉन: जो गर्लफ्रेंड के चक्कर में हुए बर्बाद

जिस डॉन ने चालीस से ज़्यादा ख़ूनी वारदातों को अंजाम दिया. जो सत्रह साल की उम्र में प्रेम प्रकाश से मुन्ना बजरंगी बन गया. उसकी ज़िंदगी में धमकियों, साज़िशों और ताक़त के दबदबे से भरे अंडवर्ल्ड के सफ़र में इश्क़ का पड़ाव भी आया था.   

तीन डॉन: जो गर्लफ्रेंड के चक्कर में हुए बर्बाद

नई दिल्ली: ये कहानी है बंदूक की गोलियों से ख़ौफ़ की सल्तनत बनाने वाली ज़ुर्म की दुनिया में मौजूद इच्छाधारी नागिन की. वो इच्छाधारी नागिन जिन्होंने डर का साम्राज्य क़ायम करने वाले डॉन के दिल को डसा. पहले इश्क़ का ज़हर घोला और मतलब निकल जाने पर बड़ी ख़ामोशी के साथ इन गैंगस्टर्स की ज़िंदगी से भी निकल गई. पर जाते-जाते ये इच्छाधारी नागिन इन सभी की जिंदगियों में ऐसा तूफ़ान मचा गई जिसकी तमन्ना तो दुश्मनों के मन में अंगड़ाई लिया करती थी.

जिस डॉन ने चालीस से ज़्यादा ख़ूनी वारदातों को अंजाम दिया. जो सत्रह साल की उम्र में प्रेम प्रकाश से मुन्ना बजरंगी बन गया. उसकी ज़िंदगी में धमकियों, साज़िशों और ताक़त के दबदबे से भरे अंडवर्ल्ड के सफ़र में इश्क़ का पड़ाव भी आया था. इसी तरह नब्बे के दशक में जुर्म की दुनिया का सबसे ख़ौफ़नाक चेहरा बन चुके श्रीप्रकाश शुक्ला की कहानी में भी एक ऐसी इच्छाधारी नागिन आई जो वक़्त बदलने के साथ खुद भी बदल गई. ऐसा ही वाकया तीसरे डॉन के साथ भी पेश आया. ये तीसरा डॉन है अबु सलेम. 

वो डॉन जो आजमगढ़ से निकल कर कभी डी कंपनी का सबसे भरोसेमंद गुर्गा बना, जब वो भी अर्श से फर्श पर पहुंचा तो उसकी माशूका ने अपना रास्ता भी बदल लिया. जुर्म की दुनिया के ये वो चेहरे हैं, जिनकी ज़िंदगी का एक-एक पन्ना ख़ूनी वारदातों से भरा पड़ा है. लेकिन आमतौर पर नफ़रत और डर के ज़रिये ही अंडरवर्ल्ड में अपना सिक्का जमाने वाले इन सभी डॉन की अनदेखी-अनकही लव स्टोरी भी है. एक ऐसी प्रेम कहानी जिसने इन सभी की ज़िंदगी में बड़ी उथल-पुथल मचा दी.

इश्क़ की गिरफ़्त में यूपी का डॉन

ये यूपी के उस डॉन की कहानी है जिससे नब्बे के दशक में आतंक भी थर्राने लगा. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में मास्टर पिता के घर जन्मा श्रीप्रकाश शुक्ला पहलवानी के अखाड़े से जल्द ही जुर्म के रास्तों पर चल निकला और ये इस खूंखार डॉन की इकलौती तस्वीर है जो अब तक दुनिया के सामने आई. लेकिन इससे भी ज़्यादा दिलचस्प है श्रीप्रकाश शुक्ला के एनकाउंटर की कहानी. जिसमें श्रीप्रकाश की गैंग की तरफ़ से 14 गोलियां चलीं, तो एसटीएफ ने भी 45 गोलियां चलाईं. लेकिन, कम लोगों को पता है कि ये एनकाउंटर नहीं हुआ होता, अगर श्रीप्रकाश की ज़िंदगी में नहीं होती एक लड़की, जिससे वो बेशुमार इश्क़ करता था. लेकिन एनकाउंटर की इस कहानी से पहले श्रीप्रकाश शुक्ला के आतंक को समझना ज़रूरी है. दरअसल, उन दिनों पूरब से लेकर पश्चिम तक और उगाही, डकैती, हत्या के मामलों के साथ रेलवे के ठेके पर श्रीप्रकाश शुक्ला ने अपना एकछत्र राज क़ायम कर लिया था. 

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जुर्म की दुनिया के बेताज बादशाह की लव स्टोरी

जिसके चलते बदमाश तो बदमाश, पुलिस भी उससे डरती थी. मीडिया दिनरात पुलिस के पीछे हाथ धो कर पड़ गया था. दरअसल, ये सारी खलबली इसलिए मची थी क्योंकि श्रीप्रकाश शुक्ला ने 13 जून 1998 को इंदिरा गांधी अस्पताल के बाहर बिहार सरकार के तत्कालीन मंत्री बृज बिहारी प्रसाद को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था. इस हत्याकांड के बाद श्रीप्रकाश की दहशत पूरे यूपी में बढ़ गई. लिहाज़ा सचिवालय में सीएम, गृह मंत्री और डीजीपी की बैठक हुई. जिसमें स्पेशन टास्क फोर्स का गठन करने की तैयारी शुरू हुई. एसटीएफ ने सादी वर्दी में छापेमारी की कार्रवाई शुरू कर दी. 

इसी बीच एक बार श्रीप्रकाश हाथ में भी आया लेकिन ऑपरेशन नाकाम रहा. इसी दौरान श्रीप्रकाश शुक्ला ने यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री की सुपारी ले ली. एसटीएफ के लिए ये ख़बर बम गिरने जैसी थी. लिहाज़ा, मुखबिरों का नेटवर्क सक्रिय किया गया. तब मालूम चला कि इस कुख्यात गैंगस्टर की एक गर्लफ्रेंड भी है. जिसके साथ अक्सर श्रीप्रकाश आज भी बात किया करता है. मोबाइल सर्विलांस पर डाला गया तो लोकेशन दिल्ली आई. हालांकि, श्रीप्रकाश को इसकी भी भनक लग गई और उसने गर्लफ्रेंड के साथ पीसीओ से बात करना शुरू कर दिया. लेकिन बेहद शातिर ये गैंगस्टर ये नहीं जान पाया कि सर्विलांस पर सिर्फ़ उसका नहीं, बल्कि उसकी गर्लफ्रेंड का मोबाइल भी है. 

एसटीएम ने गाजियाबाद के इंदिरापुरम से कॉल ट्रेस की और पूरी टीम दिल्ली रवाना हो गई. इस बार श्रीप्रकाश के हत्थे लगा तो उसे सरेंडर करने के लिए कहा गया. लेकिन वो नहीं माना और फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस की जवाबी फायरिंग में श्रीप्रकाश मारा गया. यानी, अगर श्रीप्रकाश की गर्लफ्रेंड नहीं होती तो शायद श्री प्रकाश के आतंक का खौफ़ अभी और भी ज़्यादा सफ़र तय करता.

अपराध की दुनिया में प्रेम प्रकाश का 'मुन्ना'करण

चेहरे पर शातिर मुस्कान और चाल में रसूख की ठसक. ये यूपी के कुख्यात माफिया मुन्ना बजरंगी की पहचान थी. बागपत की जेल में मुन्ना को सुनील राठी ने गोलियों से भून डाला तो प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में भी अंडरवर्ल्ड का ख़ूनी रंजिशों से भरा रास्ता याद आ गया. लेकिन बजरंगी के प्रेम प्रकाश से मुन्ना बनने की पटकथा जब लिखी जा रही थी, उसी दौरान कुछ ऐसा भी हुआ जिसने उसकी ज़िंदगी को बदल कर रखा दिया. ये साल 1967 था जब यूपी के जौनपुर जिले के पूरदेयाल गांव में मुन्ना बजरंगी का जन्म हुआ. पिता पारसनाथ की हसरत थी कि बेटा पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बने. लेकिन पांचवीं में पढ़ रहे मुन्ना ने पढ़ाई छोड़कर ज़ुर्म की दुनिया में क़दम रख दिया. 

मुन्ना हथियार रखने का शौकीन था. बचपन से उसे फ़िल्मी गैंगस्टर की तरह खुद भी डॉन बनना था. यही वजह थी कि महज़ सत्रह साल की उम्र में उस पर पहला पुलिस मुकदमा दर्ज हुआ. कहा जाता है कि जौनपुर के सुरेही थाने का ये मामला मारपीट और अवैध असलहा रखने से जुड़ा था। माना जाता है कि इसके बाद मुन्ना ने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा. उसने एक से बढ़कर एक सन्न कर देने वाली वारदातों को अंजाम दिया. इनमें मामूली अपराध से लेकर राजनीतिक हत्याकांड भी शामिल हैं. फिर वो वक़्त आया जब मुन्ना इन्हीं रास्तों से होता हुआ सियासत के गलियारे में अपनी धाक जमाने के लिए आगे आया. 

मुख़्तार अंसारी ने मदद का हाथ बढ़ाया तो मुन्ना को मुन्ना भाई बनते देर नहीं लगी. वो वक़्त भी आया जब बजरंगी अपना अलग रास्ता बनाने की ओर चल पड़ा. उसने कपड़ों की तरह राजनीतिक दल बदलने से परहेज़ नहीं किया.

फिर मुन्ना की ज़िंदगी में 'वो' आ गई

जिस उत्तर प्रदेश, बिहार और फिर मुंबई में जिस मुन्ना के क़दम गुज़रे उन्हीं रास्तों में एक कहानी ऐसी भी है जिसे कम ही लोग जानते हैं. कहा जाता है कि मुन्ना बजरंगी को एक लड़की से प्यार हुआ. उसके साथ उसने शादी भी की. लेकिन धीरे-धीरे शुरूआत में किसी फिल्मी स्टोरी की तरह शुरू हुई ये लव स्टोरी हेट स्टोरी में बदलने लगी. 

मुन्ना बजरंगी की गर्लफ्रेंड अब भी रहस्य

मुन्ना शहर-शहर पुलिस और दूसरी गैंग से भागता-फिरता रहता था, लेकिन ये सब उसकी पत्नी को बर्दाश्त नहीं था. बजरंगी की इस पहली पत्नी ने जब देखा कि उसका पति एक नामी गैंगस्टर बन चुका है और उसके साथ रहने का मतलब है ज़िंदगी का हर वक़्त मौत से दो-दो हाथ करना तो उसने तय किया कि वो मुन्ना को छोड़कर आगे बढ़ जाएगी. 

पहली पत्नी के छोड़कर जाने पर मुन्ना अंदर ही अंदर टूटने लगा. उसे पता था कि अंडरवर्ल्ड की दुनिया में जाने का रास्ता होता है, लेकिन वापस आने का नहीं. ऐसे में घर के मोर्चे पर मुन्ना को मिला ये ज़ोरदार झटका एक सदमे की तरह था जिसे बर्दाश्त करने उसके बस की बात नहीं थी.

हालांकि, मुन्ना बजरंगी की ज़िंदगी में आई ये लड़की कौन थी...कब आई...कोई नहीं जानता. दूसरी पत्नी सीमा सिंह के बारे में तो कुछ जानकारियां सार्वजनिक हैं, लेकिन डॉन की पहली पत्नी का रहस्य आज भी बरकरार है.

अबू सलेम की ज़िंदगी में मोनिका की एंट्री

1993 में मुंबई बम धमाके ने देश को हिलाकर रख दिया. इस आतंकी हमले की शुरूआती तफ्तीश के तार टाइगर मेमन से जुड़े. लेकिन फिर खुलासा हुआ कि इस आतंकी हमले का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि पाकिस्तान में पनाह ले चुका हिंदुस्तान का मोस्ट वांटेड दाऊद इब्राहिम था और डी कंपनी का नाम सामने आते ही अचानक जुर्म की दुनिया में गोरखपुर का एक लड़का सुर्खियों में आ गया जिसका नाम था अबू सलेम. 

सलेम आज भी गुलशन कुमार की हत्या और 1993 धमाकों से जुड़े मुकदमे का सामना कर रहा है. लेकिन आज सलेम का जिक्र इसलिए क्योंकि हमेशा से लड़कियों के शौकीन अबू की ज़िंदगी में भी एक लड़की आई और उसने उसको ऐसा झटका दिया जिसे वो आज तक नहीं भूल सका है.एक ऐसी प्रेम कहानी जो अधूरी ही रह गई. 

कभी मुकम्मल नहीं हो सकी. बताया ये जाता है कि फिल्म गैंगस्टर भी अबू सलेम और उनकी प्रेमिका मोनिका बेदी पर बनी फिल्म है. वो मोनिका जो एक वक़्त में सिनेमाई पर्दे का नामी चेहरा रही. जिन्होंने कई सारी फिल्मों में काम किया और अपनी ख़ूबसूरती के साथ-साथ बेमिसाल अदाकारी से लाखों को दीवाना बना लिया. लेकिन बॉलीवुड में एक जाना-पहचाना नाम बनने से पहले मोनिका की ज़िंदगी में हुई थी डॉन अबू सलेम की एंट्री.

अंडरवर्ल्ड के रास्ते मोनिका से मुलाक़ात

वकील पिता के घर में जन्मे अबू सलेम का मन पढ़ाई में नहीं लगता था. जानने वाले बताते हैं कि वो आज़मगढ़ में पंक्चर का काम करने लगा. लेकिन रिश्तेदार की सलाह पर मुंबई का रूख करने के बाद जैसे ही वो अंडरवर्ल्ड के संपर्क में आया, उसकी किस्मत ही बदल गई. कल का बेहद साधारण लड़का अबू अब जुर्म की दुनिया के बेताज बादशाह दाऊद इब्राहिम का ख़ासमखास बन चुका था. लेकिन, डी कंपनी में छोटा राजन का सफाया होने के बाद जब बॉलीवुड को संभालने की आई तो दाऊद के भाई अनीस ने अबू सलेम को चुना. सलेम ने धीरे-धीरे बॉलीवुड पर अपना दबदबा भी बना लिया. 

डी कंपनी के सबसे खास डॉन की 'अधूरी कहानी'

कहा जाता है कि इसी दरमियान मोनिका और अबू के बीच मुलाक़ात हुई और सलेम ने मोनिका को रुपहले पर्दे की रानी बना दिया. लेकिन डी कंपनी में अबू सलेम का रसूख हमेशा एक जैसा नहीं रहा। मोनिका के साथ खुशी-खुशी ज़िंदगी बसर कर रहा सलेम दुबई में तमाम ऐश-ओ-आराम का लुत्फ़ उठा रहा था. लेकिन अनीस के साथ उसकी दूरियां बढ़ने लगी और एक रोज़ वो दुबई छोड़कर कहीं दूसरे देश निकल गया.

अबू की ज़िंदगी से मोनिका का अलविदा

भारतीय जांच एजेंसियों के साथ-साथ इंटरपोल को भी मोस्ट वॉन्टेड सलेम की तलाश थी. इसलिए, मोनिका और अबू लगातार जगह बदलता रहे. लेकिन दोनों को पुर्गतल में दबोच लिया गया. संधि के ज़रिये वापस भी हिंदुस्तान लाया गया. लेकिन मोनिका ने सलेम से अपने संबंधों को सिरे से खारिज कर दिया. 

आज अबू सलेम उम्रकैद की सज़ा भुगत रहा है तो वहीं मोनिका बेदी बिग बॉस समेत कई तरह के धारावाहिकों में नज़र आईं. वो दोबारा मॉडलिंग भी करने लगीं. मतलब ये कि उन्होंने कभी पीछे पलट कर नहीं देखा. सलेम के साथ मोनिका की शादी हुई थी या नहीं, ये भी आज तक रहस्य बना हुआ है. लेकिन आज मोनिका की ज़ुबान पर अबू का नाम नहीं आता. जबकि डॉन आज भी ये कहने से नहीं डरता कि वो मोनिका से बेइंतहा प्यार करता है.

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