साउथ अदाकाराओं का शुरुआती दौर से कायम रहा है बॉलीवुड में जलवा

बॉलीवुड के शुरुआती दौर से एक्ट्रेस की लिस्ट उठा कर देखा जाए तो साउथ इंडिया से आई हिरोइनों का दबदबा हिंदी सिनेमा जगत में देखा जा सकता है जो आज भी बरकरार है. वहीदा रहमान से लेकर रेखा तक और ऐश्वर्या से लेकर दीपिका पादुकोण सभी साउथ इंडिया से संबंध रखती हैं.

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ऐश्वर्या राय का जन्म मैंगलूर, कर्नाटक में हुआ. ऐश्वर्या राय की मातृ-भाषा तुलु है, इसके अलावा उन्हें कन्नड़, हिन्दी, मराठी, अंग्रेजी और तमिल भाषाओं का भी ज्ञान है . उनकी पहली फिल्म इरुवर तमिल में बनी जिसे मणिरत्नम ने निर्देशित किया. उसके बाद 2000 में राजीव मेनन द्वारा बनी एक फिल्म कंडूकोंडिन कंडूकोंडिन काफी मशहूर हुई.

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संजय लीला भंसाली द्वारा बनायी गयी फिल्म हम दिल दे चुके सनम से ऐश्वर्या को हिंदी सिनेमा में एक पहचान मिली. साल 2002 में संजय लीला भंसाली द्वारा बनाई फिल्म देवदास में भी पारो की भूमिका में ऐश्वर्या को काफी सराहा गया. उन्होंने कुछ बांग्ला फिल्में  भी की है. साल 2004 में ही पहली बार उन्होंने गुरिंदर चड्ढा की एक अंग्रेजी फिल्म ब्राइड ऐंड प्रेज्यूडिस में काम किया.

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विद्या बालन ने अपने केरियर की शुरुआत म्यूजिक विडियो, सोअप ओपेरस और कॉमर्शियल विज्ञापन से की. उसने फिल्म के क्षेत्र में बंगाली फिल्म, भालो थेको (Bhalo Theko) (2003) से अपने केरियर की शुरुआत की, जिसके लिए फिल्मी आलोचकों ने उनकी काफी प्रशंसा की.

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बाद में उसने हिन्दी फिल्म परिणीता (2005) से बॉलीवुड में कदम रखा जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ उभरती अभिनेत्री के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया.

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शिल्पा शेट्टी एक भारतीय अभिनेत्री और मॉडल हैं. शिल्पा ने फिल्म बाजीगर से 1993 में सिनेमा जगत में कदम रखा. शिल्पा ने बॉलीवुड, कॉलीवुड, तेलुगु सिनेमा और कर्नाटक सिनेमा में लगभग ४० फिल्मों में काम किया है.

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शिल्पा का जन्म (8 जुलाई 1975) मैंगलूर में हुआ.

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श्रीदेवी एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री थीं जिन्होंने तमिल, मलयालम, तेल्गु, कन्नड़ और हिन्दी सिनेमा में काम किया. भारतीय सिनेमा की पहली "महिला सुपरस्टार" कहीं जाने वाली श्रीदेवी ने पांच फिल्मफेयर अपने नाम किया है.1970 से लेकर 1990 के दशक  में श्रीदेवी सबसे अधिक वेतन प्राप्त करने वाली अभिनेत्रयों में शामिल थीं. 2013  में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया.

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1974 की फिल्म जूली से उन्होंने हिन्दी सिनेमा में बाल अभिनेत्री के रूप में प्रवेश किया था. अपनी पहली फिल्म मून्द्र्हु मुदिछु नामक तमिल में थी. श्रीदेवी का बॉलीवुड में प्रवेश 1978 की फिल्म सोलहवाँ सावन से किया. 24 फरवरी 2018 को दुबई में उनका निधन हुआ.

 

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पद्मिनी कोल्हापुरे  70-80 के दशक की प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं. फिल्मों के अलावा प्रिंस चार्ल्स को किस करने की वजह से भी पद्मिनी खबरों में आई थीं.

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 पद्मिनी कोल्हापुरे अपने समय की हिन्दी फिल्मों की एक जानी-मानी अभिनेत्री रही हैं.

 

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जया महज 14 साल की थी जब उन्होंने अपने स्कूल के वार्षिक समारोह में एक नृत्य प्रदर्शन किया. दर्शकों में एक फिल्म निर्देशक भी शामिल थे और उन्होंने जयाप्रदा से तेलुगू फिल्म 'भूमिकोसम' में तीन मिनट के नृत्य प्रदर्शन की पेशकश की. जिसके लिए जया को सैलेरी के रूप में 10 रुपये मिले. जब फिल्म के  तीन मिनटों के अंश को तेलुगू फिल्म उद्योग की प्रमुख हस्तियों को दिखाया गया तो जया के पास अनेकों मौके आए.  साल 1977 में जया अडवी रामुडु में नजर आई जिसने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और स्थाई रूप से उन्हें एक स्टार का दर्जा मिला.

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जया ने के. विश्वनाथ की फिल्म सिरी सिरी मुव्वा (1976) की रीमेक से हिंदी फिल्र्र्मों में कदम रखा जो 1979 में आई हिंदी फिल्म सरगम था जो हिट साबित हुई. दर्शकों ने भी जया को काफी पसंद किया पर जया को हिंदी बोलना नहीं आता था जिस वजह से हिंदी सिनेमा से जया को ब्रेक लेना पड़ा और वापस 3 साल बाद जया ने फिर से हिंदी सिनेमा में वापसी की और एक के बाद एक हिट फिल्में दी. विश्वनाथ की 'संजोग' (1985) में अपनी चुनौतीपूर्ण दोहरी भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के रूप में दो और फिल्मफेयर नामांकन अर्जित किए.

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रेखा का असली नाम भानुरेखा गणेशन है. रेखा को सदाबहार अदाकारा कहा जाता है. और रेखा को हिंदी की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है.वै

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रेखा ने अपने फिल्मी जीवन की शुरुआत बतौर एक बाल कलाकार तेलुगु फिल्म रंगुला रत्नम से की थी. लेकिन हिन्दी सिनेमा में उनकी प्रविष्टि 1970  की फिल्म सावन भादों  से मिली. 2010 में, उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया जा चुका है.

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हेमा मालिनी बॉलीवुड की उन गिनी-चुनी अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिनमें सौन्दर्य और अभिनय का अनूठा संगम देखने को मिलता है. हेमा का करियर लगभग चार दशकों का रहा है जिसमें उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दी.लेकिन कैरियर के शुरुआती दौर में उन्हें वह दिन भी देखना पड़ा जब एक निर्माता-निर्देशक ने उन्हें यहां तक कह दिया था कि उनमें स्टार अपील नहीं है.

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हेमा मालिनी को पहली सफलता वर्ष 1970 में प्रदर्शित फिल्म (जॉनी मेरा नाम) से मिली. इसमें उनके साथ अभिनेता देवानंद मुख्य भूमिका में थे. फिल्म में हेमा और देवानंद की जोड़ी को दर्शकों  को बहुत पसंद आई. हेमा मालिनी को प्रारंभिक सफलता दिलाने में निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी की फिल्मों का बड़ा योगदान रहा. उन्हें पहला बड़ा ब्रेक उनकी ही फिल्म (अंदाज)1971 से मिला. बता दें कि निर्देशक के रूप में रमेश सिप्पी की यह पहली फिल्म थी. 

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वैजयन्तीमाला बाली को मुख्य रूप से एक ही नाम "वैजयन्ती" से जाना जाता है. वह भरतनाट्यम की नृत्यांगना, कर्नाटक गायिका, नृत्य प्रशिक्षक और सांसद की भी भूमिका निभा चुकी हैं. वैजयंतीमाला ने अपनी अभिनय करियर की शुरुआत तमिल भाषीय फिल्म "वड़कई" से 1949 में की. जिसके बाद उन्होंने तमिल फिल्म "जीवितम" में 1950 में काम किया.

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वैजयन्तीमाला ने हिन्दी फिल्मों पर लगभग दो दशकों तक राज किया. दक्षिण भारत से आकर राष्ट्रीय अभिनेत्री का दर्जा पाने वाली वह पहली महिला हैं. वैजयन्ती माला एक प्रसिद्ध नृत्यांगना भी हैं. उसी ने हिन्दी फ़िल्मों में अर्थ-शास्त्रीय नृत्य के लिए जगह बनाई वैजयन्ती माला ने सबसे पहले हिन्दी फिल्म बहार और लड़की में काम किया. नागिल की सफलता के पश्चात वैजयन्ती ने हिन्दी फिल्मों में खुद को स्थापित किया. बॉक्स-ऑफिस की फिल्मों में प्रसिद्ध होने के पश्चात वह देवदास में चन्द्रमुखी के चरित्र में नजर आईं.  अपने पहले ड्रामाई चरित्र के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा गया.

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वहीदा रहमान ने मुख्य रूप से हिन्दी फिल्मों के साथ ही तेलुगु, तमिल और बंगाली फिल्मों में काम किया है. वह 1950, 1960 और 1970 के दशक की शुरुआत तक फिल्मों की विभिन्न शैलियों में अपने योगदान के लिए जानी जाती है.वहीदा को उनके फिल्मी करियर के लिए फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए दो फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा जा चुका है.  

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वहीदा रहमान का जन्म भारत के तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में मुस्लिम परिवार में हुआ था. वहीदा ने अपनी बहन के साथ चेन्नई में भरतनाट्यम सीखा.सबसे पहले उन्होंने 1955 में तेलुगू फिल्मों से अभिनय की शुरुआत की.  फिर कुछ तमिल फिल्मों में भी उन्होंने काम किया. हिन्दी फिल्म में उनकी पहली उपस्थिति सी आई डी (1956) में हुई थी. बाद में वहीदा ने प्यासा (1957), 12 ओ'क्लॉक (1958), कागज़ के फूल (1959), साहिब बीबी और ग़ुलाम और चौदहवीं का चाँद (1961) जैसी कई सफल फिल्में दी. उनका करियर 1960, 1970 और 1980 के दशक तक जारी रहा. फिल्म गाइड (1965) के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला.