पिता जेल में, पुत्र ने जन्मदिन मनाया प्लेन में, विरोधियों ने कसा तंज

बिहार में राजद की डूबती नैय्या को सहारा दे रहे तेजस्वी यादव ने हाल ही में अपना 30वां जन्मदिन मनाया. जन्मदिन मना कर तेजस्वी यादव विपक्षी दलों के नजर में चढ़ गए. फिर क्या था राजनीतिक बाजार गर्म हुआ और टीका-टिप्पणी शुरू हो गई. लेकिन तेजस्वी यादव ने जन्मदिन मनाया तो इसपर अन्य दलों की टिप्पणियां कहां से और क्यों आने लगीं ?

पिता जेल में, पुत्र ने जन्मदिन मनाया प्लेन में, विरोधियों ने कसा तंज

पटना: तेजस्वी यादव बीते शनिवार को 30 साल के हुए. इस दौरान राजद के वर्तमान सर्वेसर्वा ने अपना जन्मदिन एक चार्टर्ड प्लेन में अपने कुछ करीबियों के साथ मनाया. इसके बाद से ही विपक्षी नेताओं के बयानों और तानों की झड़ी लग गई. सबने चुटकियां लेनी शुरू कर दी कि पिता जेल से अस्पताल पहुंच गए हैं लेकिन बेटा चार्टर्ड प्लेन में जन्मदिन मना रहा है.

संजय सिंह ने आड़े हाथों लिया

तेजस्वी यादव के जन्मदिन के बाद जदयू के प्रवक्ता संजय सिंह से लेकर लोजपा के नए अध्यक्ष चिराग पासवान तक ने उन पर तंज कसना शुरू कर दिया. संजय सिंह ने ट्वीट किया कि तेजस्वी यादव के राजनीतिक करियर पर यह सबसे बड़ा धब्बा है. उधर लालू प्रसाद यादव जेल में बंद हैं और आप चार्टर्ड प्लेन में बैठे जन्मदिन मना रहे हैं. शर्म आनी चाहिए आपको. इसके बाद चिराग पासवान ने भी तेजस्वी को खूब खरी खोटी सुनाई.

सांसद चिराग पासवान ने छोटा भाई समझ दी नसीहत

उन्होंने कहा कि जन्मदिन मनाने का एक व्यक्तिगत तरीका होता है. उधर लालू यादव की तबीयत ठीक नहीं. वह जेल में हैं और तेजस्वी यादव इस तरीके से प्लेन में अपना जन्मदिन मना रहे हैं. एक तो वे अपने पिता से मिलने भी हमेशा नहीं जाते हैं. उन्होंने तेजस्वी यादव को नसीहत देते हुए कहा कि तेजस्वी यादव छोटे भाई हैं इसलिए समझा रहा हूं, यह सब ठीक नहीं. उनके ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है नेता प्रतिपक्ष की. उनके पास विधानसभा जाने का समय नहीं होता, जनता से जुड़े मु्द्दे उठाने का समय नहीं होता लेकिन इस कार्य के लिए समय है. ऐसे में जनता तो सवाल पूछेगी ही कि पिता लालू यादव से मिलने का समय नहीं, क्षेत्र के लोगों से मिलने का समय नहीं और जन्मदिन चार्टर्ड प्लेन में मनाने का समय है. 

झारखंड में 7 सीटों पर दावेदारी

मालूम हो कि तेजस्वी यादव शुक्रवार को लालू प्रसाद यादव से मिलने रांची रिम्स पहुंचे थे. झारखंड में विधानसभा चुनाव चल रहा है. राजद झामुमो और कांग्रेस के साथ इस बार महागठबंधन का हिस्सा है और 7 सीटों पर अपनी दावेदारी ठोंक रही है. राजद के सामने कोई चुनौती झारखंड में तो नहीं क्योंकि पार्टी को पिछले विधानसभा चुनाव में भी एक सीटें तक नहीं जीत पाई थी. लेकिन इस बार महागठबंधन में पार्टी की क्या भूमिका होती है, इस पर नजर जरूर बनाए हुए हैं.
 
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चुनौतियां भरा है सफर

बिहार में चुनाव होने को है. राजद महागठबंधन को लीड कर रही है. हाल ही में 5 सीटों पर हुए उपचुनाव में राजद ने 2 सीटें जीती. महागठबंधन थोड़े समय के लिए ही सही लेकिन रिचार्ज हो कर लौटी थी. लोकसभा चुनाव की हार का डर पार्टी को विधानसभा चुनाव के पहले कमजोर कर चुका था. हालांकि, महागठबंधन में अब भी मुश्किलें कम नहीं हुईं हैं. रालोसपा चीफ उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन के नए चेहरे बनना चाहते हैं. राजद के अंदर रार की खबरें भी लगातार पुख्ता होती चली जा रही हैं. पार्टी के पुराने नेता या तो नाराज हो रहे हैं या पार्टी से निष्कासित कर दिए जा रहे हैं. बड़े भाई तेजप्रताप यादव से तेजस्वी की कुछ खास नहीं बनती और लालू यादव की विरासत का असली हकदार कौन होगा, यह खबरें समय-समय पर लगातार चलते रहती हैं. इतना ही नहीं, तमाम घटक दल राजद के वर्तमान चीफ को महागठबंधन का नेता बनाने से डर रहे हैं. 

ऐसे में बिहार में प्रतिपक्ष के नेता और राजद के सर्वेसर्वा तेजस्वी यादव के सामने इन सब कठिनाइयों से पार पान की चुनौती बनी हुई है.