Exclusive Interview: क्या सूफिज्म दहशतगर्दी को रोक सकता है? जानिए क्या बोले मश्हूर सूफ़ी उलेमा
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Exclusive Interview: क्या सूफिज्म दहशतगर्दी को रोक सकता है? जानिए क्या बोले मश्हूर सूफ़ी उलेमा

Sufinama: सैयद मोहम्मद अशरफ मियां कादरी ने Zee Salaam को बताया कि दहशतगर्दी का इस्लाम से कोई लेने देना नहीं है. दहशतगर्द सिर्फ एक बैनर के तौर पर मज़हब-ए-इस्लाम का इस्तेमाल करके अपना बचाव कर रहे हैं.

Exclusive Interview: क्या सूफिज्म दहशतगर्दी को रोक सकता है? जानिए क्या बोले मश्हूर सूफ़ी उलेमा

नई दिल्ली: आज दुनिया भर में मज़हब-ए-इस्लाम को लेकर तरह-तरह के कंफ्यूजन हैं. अब आम तौर पर ये समझा जाने लगा है कि ज्यादा तर आंतकियों का ताल्लुक़ इस्लाम से होता है. सवाल उठने लगा है कि अगर इस्लाम एक अमन-पसंद मज़हब है तो इस मज़हब के नाम पर इस तरह के दहशतगर्दाना हमले क्यों किए जाते हैं. आखिर ये दहशतगर्द इस्लाम के नाम के नाम पर इस तरह के गैर-अखलाकी और गैर-इंसानी काम क्यों कर रहे हैं. इन सवालों का जवाब जानने के लिए Zee Salaam की टीम ने कई मारूफ सूफी इस्लामिक स्कालर्स से बात चीत की और दहशतगर्दी के हवाले से इस्लाम के नजरिए को जानने की कोशिश की.

दहशतगर्द सिर्फ एक बैनर के तौर कर रहे हैं इस्लाम का इस्तेमाल
सैयद मोहम्मद अशरफ मियां कादरी ने Zee Salaam को बताया कि दहशतगर्दी का इस्लाम से कोई लेने देना नहीं है. दहशतगर्द सिर्फ एक बैनर के तौर पर मज़हब-ए-इस्लाम का इस्तेमाल करके अपना बचाव कर रहे हैं. दहशतगर्दों का ना तो इस्लाम से कोई ताल्लुक़ हैं और ना हीं उन्हें इस्लामी तालीम की जानकारी है. इसलिए अब हर मुसलमान पर लाज़िम है कि वह अपने मज़हब के पैगाम को लोगों तक तक ठीक-ठीक तरीके से पहुंचाएं.

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'मुसलमान अपने अखलाक से अपने मज़हब को साबित करे'
सैयद मोहम्मद अशरफ मियां कादरी ने कहा कि आज अगर कोई इस्लाम को खिलाफ गलत बातें फैला रहा है तो हमें एक मुसलमान होने के नाते लड़ने झगड़ने पर नहीं आमादा होना चाहिए, बल्कि हमें अपने अखलाक व किर्दार से दर्शाना चाहिए कि सच क्या है और गलत क्या है. यहीं सफाबा-ए-कराम का भी अमल रहा है.

क्या सूफिज्म दहशतगर्दी को रोक सकता है?
जब ज़ी सलाम के एडिटर इरफान शेख ने पूछा कि क्या सूफिज्म दहशतगर्दी और आंतकवाद को रोक सकता है, इसपर एक दूसरे सूफी आलिम सलमान साहब ने कहा कि सूफियों ने हर ज़माने में शिद्दपसंदी और दहशतगर्दी की अपनी तालीमात से मुकाबला किया है. मोहब्बत और अमन के पैगाम को आम क्या है, सूफियों का तालीम वहीं है जो इंसानियत की है, सूफियों ने दिलों प्यार से जीतने की कोशिश की है ना कि तलवार के ज़ोर से.

'तालिबान इस्लाम की आड़ में अपना एजेंडा चला रहे हैं'
तालिबान पर अपने रद्देअमल का इज़हार करते हुए मौलाना सलमान साहब ने कहा है कि तालिबान इस्लाम की आड़ में अपना एजेंडा चला रहे हैं. उनके कामों का ना तो इस्लाम से कोई ताल्लुक़ और ना ही इस्लामी शरीयत से. बल्कि तालिबान अपने मनमाना फैसल अवाम थोप रहे हैं.

'लोग अपने-अपने धर्मों के बारे ठीक-ठीक जानकारी हासिल करे'
सैय्यद मोहम्मद तनवीर हाशमी ने सूफिज्म पर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि दुनिया को कई भी मज़हब दहशतगर्दी की तालीम नहीं देता है, लेकिन बदक़िस्मती से लोगों अपने मज़हिब के बारे में ठीक ठीक जानकारी नहीं है. इसलिए लोगों को चाहिए कि वह अपने-अपने धर्मों के बारे ठीक-ठीक जानकारी हासिल करे. उन्होंने बताया कि इस लिससिले में हर मज़हब के नौजवान तबके की जिम्मेदारी याहं बढ़ जाती है कि लोगों को बताए कि उनका मज़हब उनसे क्या चाहता है.

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'दहशतगर्दी और इस्लाम दोनों अगल-अगल चीजें हैं'
दहशतगर्दी और इस्लाम पर अपनी बात रखते हुए सैय्यद मोहम्मद तनवीर हाशमी ने कहा कि दहशतगर्दी और इस्लाम दोनों अगल-अगल चीजें हैं, उन्हें एस साथ नहीं जोड़ा जा सकता है. इस्लाम के इस दुनिया में आने का मकसद ही यही है जुल्म और दहशतगर्दी का खात्मा हो सके. लेकिन ये बड़ी बदकिस्तमती की बात है कि इस्लाम और दहशतगर्दी को एक साथ जोड़ कर देखा जा रहा है. उन्होंने कहा कि हर मुसलमान जी जिम्मेदारी है कि वह अपने पैगंबर की तालीम  पर अमल करें और अल्लाह के फरमान की मुकम्मल जानकारी हालिस करे.

'गांव और शहर हर जगह हिंदू और मुसलमान एक हैं, लेकिन...'
जब सैयद मोहम्मद अशरफ मियां कादरी से पूछा गया कि हिंदू-मुसलमना दरमियान फैल रही नफरत का मुकाबला कैसे किया जाए, तो उन्होंने कहा कि गांव और शहर हर जगह हिंदू और मुसलमान एक हैं, उनको दरमियान कोई नफरत नहीं है, वे एक साथ मिल कर रह रहे हैं, लेकिन सियासी गलियारे में उनके दरमियान बटवारा हो गया है, इसलिए जिस दिन सियासी गलियारे ठीक हो जाएंगे, उस दिन से दोनों कौमों दरमियान पनप रही नफरत का भी खात्मा हो जाएगा.

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