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अफगान संकट गहराया, भारत ने मजार-ए-शरीफ से निकाले अपने 50 नागरिक

मंगलवार को भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा था, कि मजार-ए-शरीफ से नई दिल्ली के लिए एक स्पेशल उड़ान रवाना हो रही है. मजार-ए-शरीफ और उसके आसपास के किसी भी भारतीय शहरी से गुज़ारिश की गई थी कि वह देर शाम रवाना होने वाली खास उड़ान से भारत रवाना हो जाए.

Representational image, Taliban terrorists
Representational image, Taliban terrorists

नई दिल्ली: अफगानिस्तान में अफगान सिक्योरिटी फोर्सेज और तालिबान के बीच भीषण लड़ाई के साथ सूरते हाल बद से बदतर होती जा रही है. भारतीय सफीरों समेत कुल 50 भारतीय नागरिक मजार-ए-शरीफ को छोड़कर बुधवार को नई दिल्ली पहुंचे.

एक सीनियर सरकारी ऑफिसर ने कहा कि 50 भारतीयों को लेकर एक स्पोशल जहाज आज सुबह नई दिल्ली में उतरा. वहीं, मरकज़ी हुकूमत ने कहा कि भारत ने मजार-ए-शरीफ में अपने काउंसलेट जनरल ऑफिस को आरज़ी तौर पर बंद कर दिया है.

मंगलवार को भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा था, कि मजार-ए-शरीफ से नई दिल्ली के लिए एक स्पेशल उड़ान रवाना हो रही है. मजार-ए-शरीफ और उसके आसपास के किसी भी भारतीय शहरी से गुज़ारिश की गई थी कि वह देर शाम रवाना होने वाली खास उड़ान से भारत रवाना हो जाए.

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दूतावास  ने उन भारतीय नागरिकों से भी अपील की, जो विशेष उड़ान से नई दिल्ली के लिए रवाना होना चाहते हैं, वे अपनी तफसील और अपना ठिकाना दे.

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मजार-ए-शरीफ, या सिर्फ मजार, अफगानिस्तान का चौथा सबसे बड़ा शहर है, जिसकी आबादी कुछ महीने पहले तक 5 लाख से ज्यादा थी. यह बल्ख प्रांत की राजधानी रही है और पूर्व में कुंदुज, दक्षिण-पूर्व में काबुल, दक्षिण-पश्चिम में हेरात और उत्तर में उज्बेकिस्तान में टर्मेज के साथ राजमार्गों से जुड़ी हुई है.

अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास ने भी भारतीय नागरिकों को सलाह दी थी कि वे तिजारती उड़ानों की सहुलत के बारे में खुद को अपडेट रखें और हवाई सेवाएं बंद होने से पहले फौरना लौटने का इंतज़ाम करे.

सिफारत खाने ने भारतीय कंपनियों को अफगानिस्तान में प्रोजेक्ट साइट से अपने भारतीय कर्मचारियों को फौरन वापस मुल्क लौटने की सलाह दी है. 

वहीं, गैर-मुल्की कंपनियों के साथ काम कर रहे मुलाज़िमों को भी सलाह दी गई है कि वह अपनी कंपनी से कहें कि जल्द से जल्द उन्हें भारत भेजने में मदद करें. वहीं, मीडिया से जुड़े लोगों को सलाह दिया गया है कि अफगानिस्तान में काम रहे भारतीय मीडियाकर्मी ब्रीफिंग के लिए दूतावास के सार्वजनिक मामलों और सुरक्षा विंग के साथ राब्ता करें. ऐसे में मीडिया के लोग जिस इलाके में सफर कर रहे हैं, उन्हें बेहतर सलाह दी जा सकेगी क्योंकि वहां फिलहाल हिफाज़ती सूरते हाल में तेजी से बदलाव हो रहे हैं.

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गौरतलब है कि विदेशी फ़ौजों के जाने के बाद एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान में तनाव तेज़ी से बढ़ रहा है. अफ़ग़ान सुरक्षा बलों और तालिबान के बीच देशभर में झड़पें जारी हैं और तालिबान के दावे के मुताबिक़ बीते दिनों में आठ प्रांतों की राजधानियां उनके क़ब्ज़े में आ चुकी हैं.

जराए का कहना है कि इस बात का अंदेशा है कि आने वाले चंद दिनों में कई अहम शहरों पर तालिबान अपना कंट्रोल हासिल कर सकते हैं.

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