जालोर: सायला में मुरार दान बारहठ 14 साल से जगा रहे पर्यावरण संरक्षण की अलख
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जालोर: सायला में मुरार दान बारहठ 14 साल से जगा रहे पर्यावरण संरक्षण की अलख

किसान परिवार से जुड़े बारहठ खुद जैविक खेती करने के साथ दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं. उनका मानना है कि रासायनिक खाद स्प्रे काम में लेने से खेती की लागत बढ़ने के साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है. 

जालोर: सायला में मुरार दान बारहठ 14 साल से जगा रहे पर्यावरण संरक्षण की अलख

Jalore: सायला उपखंड क्षेत्र के हरमू गांव निवासी मुरार दान बारहठ पिछले 14 साल से क्षेत्र में पौधरोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे हैं.

अब तक करीब 5 हजार से अधिक पौधे लगा चुके बारहठ विभिन्न सरकारी निजी कार्यक्रमों में भी आमजन को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं. इसके अलावा क्षेत्र में हरियाली को बढ़ावा देने के लिए बारहठ गांवों तथा शहरों में अपने स्तर पर अभियान चलाकर पौधरोपण के लिए लोगों को जागरूकता का संदेश दे रहे हैं. उनके इस अनुकरणीय कार्य के लिए जिला प्रशासन, वन विभाग की ओर से उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है.

पौधे बन चुके पेड़
पर्यावरण प्रेमी बारहठ ने अब खुद के खर्चे मेहनत के बूते क्षेत्र में करीब पांच हजार से अधिक पौधे लगाए हैं, जिनकी वो खुद देखभाल करते हैं. इनमें खेजड़ी, नीम, जाल, केर रोहिड़ा के पेड़ हैं. नियमित देखभाल के चलते सभी पौधे अब पेड़ बन चुके हैं.

जैविक खेती करने का कर रहे आह्वान
किसान परिवार से जुड़े बारहठ खुद जैविक खेती करने के साथ दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं. उनका मानना है कि रासायनिक खाद स्प्रे काम में लेने से खेती की लागत बढ़ने के साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है. बारहठ बताते हैं कि बढ़ती गर्मी से दिनों-दिन धरातल में पानी की कमी हो रही है. सिकुड़ते ग्लेशियर, पक्षियों और प्राणियों की विलुप्त होती नस्लें पर्यावरण के प्रति असंवेदनशीलता का ही परिणाम है. प्रकृति के विपरीत चलने पर प्रकृति विनाश करती है. इसलिए हमें जल, जंगल, जमीन ऑक्सीजन को शुद्ध रखना होगा जिसके लिए अधिकाधिक संख्या में पौधे लगाना जरुरी है. वृक्ष होंगे तो बरसात भी ज्यादा होगी.

पिता से मिली पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा
मुरार दान का कहना है कि उनके पिता भी गांव में पौधरोपण के साथ लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते थे. उन्हें देखकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के साथ पौधरोपण की प्रेरणा मिली. खेती से होने वाली कमाई का करीब दसवां हिस्सा पौधरोपण, पानी, खाद रखरखाव में खर्च करने के साथ लोगों को भी जागरूक करना प्रारंभ किया.

Reporter- Dungar Singh

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