जानें कौन हैं एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार वेंकैया नायडू!

केंद्रीय संसदीय मंत्री और दक्षिण में भाजपा के बड़े चेहरे वेंकैया नायडू उपराष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्‍मीदवार होंगे. जिसपर भाजपा के घटक दलों में भी मुहर लग गई है. वेंकैया के नाम पर संघ ने भी अपनी सहमति दे दी है. एक ओर जहां विपक्षी दलों ने गोपालकृष्ण गांधी को उपराष्ट्रपति पद का संयुक्त उम्मीदवार घोषित किया है तो वहीं एनडीए की ओर से केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू के नाम पर मुहर लग गई है.

जानें कौन हैं एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार वेंकैया नायडू!
केंद्रीय संसदीय मंत्री और दक्षिण में भाजपा के बड़े चेहरे वेंकैया नायडू उपराष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्‍मीदवार होंगे (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय मंत्री और दक्षिण में भाजपा के बड़े चेहरे वेंकैया नायडू उपराष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्‍मीदवार होंगे. जिसपर भाजपा के घटक दलों में भी मुहर लग गई है. वेंकैया के नाम पर संघ ने भी अपनी सहमति दे दी है. एक ओर जहां विपक्षी दलों ने गोपालकृष्ण गांधी को उपराष्ट्रपति पद का संयुक्त उम्मीदवार घोषित किया है तो वहीं एनडीए की ओर से केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू के नाम पर मुहर लग गई है.

सत्तर के दशक में जब भाजपा का पूर्ववर्ती संगठन जनसंघ अपनी पहचान बना ही रहा था और दक्षिण में उसका कोई आधार नहीं था, तब आंध्र प्रदेश का एक युवा पार्टी कार्यकर्ता अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गजों के पोस्टर लगाने में व्यस्त रहता था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नायडू को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुने जाने के बाद उनके लिए तेलुगू के शब्द ‘गारू’ का इस्तेमाल किया जो किसी को सम्मान देने के लिए बोला जाता है.

मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘एक कृषक पुत्र. एम वेंकैया नायडू गारू सार्वजनिक जीवन में वर्षों का अनुभव रखते हैं और हर राजनीतिक वर्ग में सराहे जाते हैं.’’ एक समय आडवाणी के करीबी रहे नायडू ने 2014 के आम चुनावों से पहले प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी का जोरदार समर्थन किया.

जानते हैं कैसा रहा है वेंकैया नायडू का राजनीतिक करियर

वेंकैया नायडू शुरु से ही पार्टी के भरोसेमंद रहे हैं. उन्हें 1980 में बीजेपी यूथ विंग और आंध्र प्रदेश विधानसभा का नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था. शुरुआती दौर में वे आंध्र बीजेपी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक थे. नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी के बाद पार्टी ने उनका कद बढ़ाते हुए 1988 में उन्हें आंध्र बीजेपी का अध्यक्ष बना दिया.

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1993 से 2000 तक वेंकैया बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव रहे. 2002 में वे पहली बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. वे दिसंबर 2002 तक अध्यक्ष रहे. इसके बाद 2004 में वह दोबारा अध्यक्ष बने.

वेंकैया का जन्म 1947 में आंध्र प्रदेश में हुआ था.वेंकैया ने नेल्लोर के आंदोलन में हिस्सा लेते हुए विजयवाड़ा के आंदोलन का नेतृत्व किया. 1974 में वे आंध्र विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए .

इसके बाद वह आपातकाल के दौरान जेपी आंदोलन से जुड़े. आपातकाल के बाद ही उनका जुड़ाव जनता पार्टी से हो गया. बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा. 2002 से 2004 तक उन्हें बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया. 

अटल बिहारी से लेकर मोदी तक सबके रहे हैं करीबी

वेंकैया पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वायजेपी के करीबी थे, जिस वजह से उन्हें वाजपेयी सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री का दायित्व सौंपा गया. मौजूदा समय में वेकैंया नायडू शहरी विकास, आवास तथा शहरी गरीबी उन्‍मूलन और संसदीय कार्य मंत्री हैं.

आंध्र प्रदेश अध्यक्ष बनने के कुछ ही सालों बाद दिल्ली के राजनीतिक गलियारे में उनको जगह मिल गई. वेंकैया नायडू 1998 से लगातार राज्यसभा के सदस्य हैं. मौजूदा समय में वे राजस्थान से राज्यसभा के सदस्य हैं. 

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उसके बाद चाहे अटल बिहारी वाजपेयी हों या आडवाणी या फिर मोदी, सभी की पसंद वेंकैया रहे हैं. केंद्र सरकार वेंकैया नायडू को कई संसदीय समितियों का सदस्य भी बना चुकी है.अपने भाषण और वक्तव्यों में तुकांत शब्द बोलने के कारण भी उन्हें अच्छा वक्ता माना जाता है.

 

बीजेपी की रणनीति के लिहाज से वेंकैया का नाम मुफीद है

कहा जा रहा है कि उत्तर भारत में बीजेपी की पकड़ मजबूत है लेकिन दक्षिण भारत में बीजेपी कमजोर पड़ जाती है. वेंकैया नायडू के पक्ष में सबसे बड़ी बात ये है कि वह आंध्र प्रदेश यानि दक्षिण से आते हैं, जहां बीजेपी का खास जनाधार नहीं है. ऐसे में दक्षिण में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए उप राष्ट्रपति चुनाव से बढ़िया मौका नहीं हो सकता था. 

उपराष्ट्रपति के पास ही राज्यसभा के संचालन की भी जिम्मेदारी होती है. ऐसे में बीजेपी की रणनीति के लिहाज से उनका नाम मुफीद है. राष्ट्रपति पद के लिए उत्तर प्रदेश के रहने वाले रामनाथ कोविंद के नाम की घोषणा के बाद बीजेपी उपराष्ट्रपति पद के लिए दक्षिण से किसी उम्मीदवार की घोषणा करना चाहती है.

वह आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं, बीजेपी इस दांव से दक्षिण में अपना आधार मजबूत करना चाहती है. दक्षिण में कर्नाटक ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां बीजेपी मजबूत स्थिति में है.