The Kashmir Files: नादव लैपिड के अलावा ज्यूरी के बाकी मेंबर्स का क्या कहना है? पढ़िए रिपोर्ट
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The Kashmir Files: नादव लैपिड के अलावा ज्यूरी के बाकी मेंबर्स का क्या कहना है? पढ़िए रिपोर्ट

Nadav Lapid: इज़रायली स्क्रीनराइटर और डायरेक्टर व IFFI 2022 के ज्यूरी चीफ नादव लैपिड ने द कश्मीर फाइल्स पर बड़ा बयान दे दिया है, जिसके बाद इस फिल्म को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया. इस बारे में बाकी ज्यूरी मेंबर्स का क्या कहना है? जानिए इस खबर में

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The Kashmir Files, Nadav Lapid: बॉलीवुड फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है. इसकी वजह है इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) के ज्यूरी चीफ का तीखा बयान. IFFI में ज्यूरी चीफ और इज़राइल के स्क्रीनराइटर/डायरेक्टर नादव लैपिड ने इस फिल्म को प्रोपेगंडा और अश्लील करार दिया. उन्होंने प्रोग्राम के आखिर में बोलते हुए कहा, "अंतरराष्ट्रीय कंपीटिशन के लिए 15 फ़िल्में थीं. 14 फिल्में कला के लिहाज़ से बेहतरीन थीं, लेकिन 15वीं फ़िल्म15वीं फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ से हम सभी परेशान और हैरान थे. यह हमें एक प्रोपेगेंडा, अश्लील फिल्म की तरह लगी, जो इतने आर्टिस्टिक कॉम्पिटीशन के लिए उचित नहीं लगी."

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर नादव लैपिड कौन हैं? तो इसके लिए हमने अलग से एक खबर बनाई है. पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि जिस तरह नादव लैपिड को उनके बयान की वजह से निशाने पर लिया जा रहा है वो अकेले इसके हकदार हैं या फिर पूरी ज्यूरी? क्योंकि उन्होंने अपने बयान में कहा है,"हम सब इस फिल्म को लेकर परेशान और स्तब्ध थे". 

हिंदुस्तान टाइम्स की एक खबर के मुताबिक IFFI 2022 के ज्यूरी मेंबर सुदीप्तो ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी. खबर के मुताबिक सुदीप्तो ने कहा,"53वें IFFI के मंच से 'द कश्मीर फाइल्स' के बारे में ज्यूरी के चीफ श्री नदव लैपिड के ज़रिए जो कुछ भी कहा गया है, वह पूरी तरह से उनकी निजी राय थी."

सुदीप्तो आगे कहते हैं,"हम 4 ज्यूरी मेंबर (पांचवे को अपने किसी इमरजेंसी काम से जाना पड़ा) मौजूद थे और प्रेस के साथ बातचीत की. हमने कभी भी अपनी पसंद और नापसंद के बारे में कुछ भी नहीं कहा. हमें एक फिल्म की तकनीकी, सौंदर्य गुणवत्ता और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रासंगिकता का न्याय करने के लिए नियुक्त किया गया है. हम किसी भी फिल्म पर किसी भी तरह का सियासी बयान नहीं देते हैं और अगर ऐसा किया जाता है, तो यह पूरी तरह से निजी है. सम्मानित जूरी बोर्ड से इसका कोई लेना-देना नहीं है."

यह भी देखिए: कौन हैं The Kashmir Files को प्रोपेगंडा करार देने वाला नादव, इजरायली फौज में रह चुके हैं

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