NEET-UG Doli Purohit: डोली पुरोहित की शानदार उपलब्धियों ने राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के एक छोटे से गांव में उनके परिवार और समुदाय को बहुत गर्व महसूस कराया है. अपने परिवार में औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने वाली पहली महिला के रूप में, NEET-UG परीक्षा में 720 में से 611 नंबर प्राप्त करने में डोली की सफलता कई चुनौतियों पर काबू पाने में उसकी फ्लेक्सिबिलिटी का प्रमाण है.


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डोली ने एकेडमिक रूप से लगातार शानदार प्रदर्शन किया है. उन्होंने एक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की, जहां उन्होंने 10वीं क्लास की आरबीएसई परीक्षा में अपने ब्लॉक में टॉप किया और डॉक्टर बनने का सपना देखा. हालांकि, उनके परिवार की फाइनेंशियल कंडीशन के कारण उनके लिए कोटा में कोचिंग क्लास में जाना असंभव हो गया. छह लोगों के परिवार में पली-बढ़ीं. डोली के पिता बस ड्राइवर हैं. घर में मां और चार भाई बहन हैं. पिता रोजाना 300 रुपये कमाते हैं. बेटी की एजुकेशन में खर्चा करने के खिलाफ सामाजिक दबाव के बावजूद, डोली के माता-पिता ने उसकी क्षमता पर विश्वास किया और उसके सपनों को सपोर्ट किया.


डोली के सफल होने के दृढ़ संकल्प ने उसे मेडिकल कॉलेज तक पहुंचाया. उन्होंने खुद को "ड्राइवर की बेटी डॉक्टर डोली" मंत्र से मोटिवेट किया और अपने दो कमरे के घर में पढ़ाई के लिए जगह बनाने के लिए पर्दे का इस्तेमाल किया. उनका संकल्प तब भी अटल रहा, जब उनके पहले NEET अटेंप्ट के दौरान उनके पिता को कोरोना हो गया, जहां उन्होंने 192 नंबर हासिल किए. हालांकि वह डिप्रेशन से जूझ रही थीं, लेकिन उनके पिता का मोटिवेशन, अक्सर राजस्थानी में कहावत "महारो अलख है ना" (जिसका अर्थ है "हम अलख, हमारे मार्गदर्शक हैं"), ने उनको मोटिवेट किया.


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डोली ने अपने मोबाइल इंटरनेट को रिचार्ज करने में अपने चाचा से हेल्प ली, फिजिक्स वाला से सस्ती ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से NEET की तैयारी जारी रखी. उनकी इंस्पायरिंग जर्नी को फिजिक्स वाला के अलख पांडे ने रिकग्नाइज किया, जिन्होंने उन्हें "लड़ाकू लड़की" कहा, जो पूरे भारत में हजारों नीट कैंडिडेट्स के बीच उनकी असाधारण स्टोरी के बारे में बताती है.आज, डोली दृढ़ता की पावर और आसान एजुकेशन की जरूरत को अपनाते हुए, सरकारी मेडिकल कॉलेज, डूंगरपुर, राजस्थान में एमबीबीएस स्टूडेंट के रूप में अपने सपने को पूरा कर रही हैं.


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