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बिहार में बाढ़ से 83 लाख लोग प्रभावित, केंद्र से मदद नहीं मिलने पर मचा सियासी घमासान

13 जिलों के 106 प्रखंडों की 83 लाख आबादी को बाढ़ ने प्रभावित किया है. बाढ़ की वजह से कई गांवों का अस्तित्व समाप्त हो गया है, तो अब तक 127 लोगों की मौत की पुष्टि सरकार की ओर से की गयी है.

बिहार में बाढ़ से 83 लाख लोग प्रभावित, केंद्र से मदद नहीं मिलने पर मचा सियासी घमासान
बिहार में बाढ़ का कहर लगातार जारी है.

पटनाः बिहार में बाढ़ की विभीषिका लगातार विकराल रूप ले रही है, तो इस पर सियासी घमासान भी जारी है. 13 जिलों के 106 प्रखंडों की 83 लाख आबादी को बाढ़ ने प्रभावित किया है. बाढ़ की वजह से कई गांवों का अस्तित्व समाप्त हो गया है, तो अब तक 127 लोगों की मौत की पुष्टि सरकार की ओर से की गयी है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के काम चल रहे हैं. सरकार की ओर से पीड़ितों को खाना खिलाने के लिए 888 कम्युनिटी किचेन चलाये जा रहे हैं, जबकि 6500 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं. जिन इलाकों में प्रशासन की पहुंच नहीं है, उनमें हेलीकॉप्टर के जरिये राहत पहुंचायी जा रही है. 

बाढ़ और सुखाड़ से बिहार का पुराना रिश्ता रहा है, जहां हर साल उत्तर बिहार बाढ़ की चपेट में रहता है, तो दक्षिण बिहार में सूखे के हालात पैदा होते हैं. इस बार भी यही स्थिति दिख रही है. बाढ़ से उत्तर बिहार और सीमांचल के 13 जिले प्रभावित हैं, तो सुखाड़ का साया 20 जिलों पर मंडरा रहा है. ऐसे में सरकार के सामने दोनों आपदाओं से पीड़ितों को राहत पहुंचाने की कठिन चुनौती है. 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार बैठकें और समीक्षा करके बाढ़ से उत्पन्न हुये हालात की समीक्षा कर रहे हैं. हवाई सर्वे के जरिये प्रभावित इलाकों का हाल जानकर राहत के कामों को अंजाम देने का निर्देश दे रहे हैं, ताकि पीड़ितों की मदद हो सके. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि सड़क से लेकर खेत-खलिहान तक के नुकसान पर सरकार की ओर से राहत दी जायेगी. अभी पीड़ित परिवारों को छह-छह हजार की मदद सीधे खातों में भेजी जा रही है. इसके बाद खेती से नुकसान का आकलन होगा और किसान फसल सहायता और कृषि इनपुट सब्सिडी के जरिये पीड़ितों की मदद की जायेगी.

आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जो आकड़े जारी किये गये हैं. उनके मुताबिक सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, सहरसा, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और  कटिहार जिलों में बाढ़ है. यहां बड़े पैमाने पर लोग प्रभावित हुये हैं. राहत और बचाव के काम में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 27 टीमें लगी हैं. 133 मोटरबोट के जरिये बचाव और राहत के अभियान प्रभावित इलाकों में चल रहा है. बाढ़ में जिन 127 लोगों की मौत हुई हैं, उसमें सीतामढ़ी में सबसे ज्यादा 37 लोगों की मौत हुई है. सीतामढ़ी में 8 और मुजफ्फरपुर में 2 राहत शिविर चल रहे हैं, जिनमें 6500 लोग रह रहे हैं. इसके अलावा सरकार की ओर से कम्युनिटी किचेन की व्यवस्था की गयी है, जिनमें पीड़ितों को दोनों समय भोजन कराया जा रहा है. अभी प्रदेश में 888 कम्युनिटी किचेन चल रहे हैं, जिन जगहों पर बाढ़ का पानी ज्यादा है, वहां सेना के हेलीकॉप्टर के जरिये राहत पहुंचायी जा रही है. ऐसे इलाकों में दरभंगा का नाम सबसे पहले आता है.
 
बाढ़ को लेकर राजनीति भी हो रही है. मानसून सत्र के अंतिम दिन विपक्षी राजद की ओर से बाढ़ के मुद्दे पर कार्यस्थगन प्रस्ताव लाया गया था, जिसको विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने अस्वीकृत कर दिया, लेकिन विपक्षी सदस्य बाढ़ पर चर्चा की मांग कर रहे थे. इस बीच विपक्ष के उपनेता अब्दुलबारी सिद्दीकी की ओर से सदन में केंद्र सरकार की ओर से मदद नहीं मिलने के मुद्दा उठाया गया, जिस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सफाई मांगी गयी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि राशि के रूप में अभी तक केंद्र सरकार से कोई सहायता नहीं मिली है, लेकिन एनडीआरएफ की टीम और हेलीकॉप्टर केंद्र सरकार की ओर से मुहैय्या कराये गये हैं. 

बिहार सरकार लगाये मदद की गुहार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा में कहा कि प्रदेश सरकार बाढ़ से क्षति का आकलन कर रही है और जल्दी ही इसको लेकर एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जायेगा, जिसमें उससे मदद की मांग की जायेगी, जिसके बाद केंद्र की टीम आकलन करने के लिए आयेगी, टीम की अनुसंशा पर ही केंद्र सरकार की ओर से मदद दी जायेगी. उन्होंने कहा कि हम हर हाल में केंद्र से मदद की मांग करेंगे और मुझे पूरा विश्वास है कि केंद्र की ओर से मदद दी जायेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में भी बाढ़ के हालात बने थे, तब राज्य सरकार ने 38 लाख परिवारों को मदद पहुंचायी थी, जिसमें 24 सौ करोड़ की राशि खर्च हुई थी. इस बार भी मदद पहुंचायी जा रही है. अभी बिहार सरकार की ओर से ही मदद दी जा रही है. 

विपक्ष के हंगामे से रोकनी पड़ी कार्यवाही
बाढ़ पीड़ितों के मुद्दे को लेकर विपक्षी राजद और कांग्रेस के सदस्यों ने सदन में हंगामा करना शुरू किया, तो सत्तापक्ष के ओर से भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार बाढ़ को लेकर संवेदनशील है और तमाम तरह के उपाय किये जा रहे हैं, लेकिन नेता विपक्ष तेजस्वी यादव अभी तक बाढ़ प्रभावित इलाकों में क्यों नहीं गये. इसके बाद विपक्षी सदस्य उत्तेजित हो गये. सत्ता और विपक्ष के सदस्यों में तीखी नोंकझोंक होने लगी, जिसके बाद सदन की कार्यवाही को विधानसभा अध्यक्ष ने दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया. इसकी वजह से ध्यानाकर्षण प्रस्ताव सदन में नहीं आ सके. 

27 को मुख्यमंत्री करेंगे बाढ-सुखाड़ की समीक्षा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल यानी 27 जुलाई को बाढ़ और सुखाड़ के हालात की समीक्षा करेंगे. मुख्यमंत्री आवास पर होनेवाली बैठक में डिप्टी सीएम सुशील मोदी समेत कई विभागों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे, इसके अलावा विभिन्न जिलों के डीएम और आपदा से जुड़े अधिकारी भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बैठक से जुड़ेंगे. मुख्यमंत्री बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब तक किये गये कामों की प्रगति के बारे में जानेंगे और आगे के लिए दिशा-निर्देश देंगे.