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दरभंगा: पहले प्याज और अब हरी सब्जियों ने बिगाड़ा जायका, आसमान छू रहे दाम

गुदरी बाजार, स्टेशन चौक, कादिराबाद और कटहलबाड़ी समेत सभी छोटी-बड़ी सब्जी मंडियों का एक ही हाल है. उधर, थोक विक्रेताओं का अलग रोना है. बारिश की वजह से गोदाम में कई सब्जियां सड़ने लगी हैं.

दरभंगा: पहले प्याज और अब हरी सब्जियों ने बिगाड़ा जायका, आसमान छू रहे दाम
बारिश की वजह से गोदाम में कई सब्जियां सड़ने लगी हैं.

दरभंगा: बिहार के दरभंगा में प्याज के बढ़े दाम से लोग पहले ही परेशान थे और अब चार दिनों तक हुई बारिश ने हरी सब्जियों का भाव भी आसमान पर पहुंचा दिया है. अधिकतर हरी सब्जियों का आयात कम होने की वजह से इनकी स्थानीय बाजार में कमी हो गई है. इसकी वजह से सभी सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं. कुछ सब्जियां तो दोगुने भाव में बिक रही है.

गुदरी बाजार, स्टेशन चौक, कादिराबाद और कटहलबाड़ी समेत सभी छोटी-बड़ी सब्जी मंडियों का एक ही हाल है. उधर, थोक विक्रेताओं का अलग रोना है. बारिश की वजह से गोदाम में कई सब्जियां सड़ने लगी हैं.

स्थानीय खरीदार गणेश प्रसाद ने बताया कि बारिश की वजह से हरी सब्जी खरीदना अब आम लोगों के वश में नहीं है. कम सब्जी खरीद कर ही काम चलाना पड़ रहा है. पहले परवल 30 रुपये किलो बिकता था वह अब 50 से 60 रुपये किलो तक मिल रहा है. इसी तरह दूसरी सब्जियों के भाव भी बढ़ गये हैं.

सब्जी विक्रेता दुखी साह ने बताया कि बारिश की वजह से सब्जियों का आना कम हो गया है. परवल, नेनुआ और करेला जैसी सब्जियों की लत्तर खेत में गलने लगती हैं. इसकी वजह से उनका उत्पादन कम हो गया है. दूसरी तरफ उन्हें रखना भी भारी पड़ रहा है. साग और कई सब्जियां गलने लगती हैं. उन्होंने बताया कि 30 रुपये बिकने वाला परवल अब 50 से 60 रुपये, 25 रुपये बिकने वाला कद्दू, बैंगन और पत्ता गोभी 40 रुपये, 30 रुपये तक बिकने वाला टमाटर 40 रुपये तक, 30 रुपये वाला नेनुआ 40 रुपये, 40 रुपये किलो वाला करेला अब 60 रुपये, 60 रुपये किलो तक बिकने वाली हरी मिर्च 160 रुपये किलो तक पहुंच गयी है. उन्होंने कहा कि भाव बढ़ने की वजह से लोग बाजार में कम आ रहे हैं. इसकी वजह से उन्हें घाटा हो रहा है.

दूसरी तरफ थोक सब्जी विक्रेता रामलखन यादव ने बताया कि वे नासिक से 34 रुपये प्रति किलो तक टमाटर मंगाते हैं. बारिश की वजह से टमाटर निकल नहीं पा रहा है. गोदाम में सड़ने लगता है. इसकी वजह से वे 28-29 रुपये प्रति किलो की दर से खुदरा दुकानदारों को बेच रहे हैं. प्रति किलो 5-6 रुपये का घाटा हो रहा है.