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बिहार: मुफ्त शिक्षा नीति से बिगड़ा कॉलजों का आर्थिक तंत्र, वित्तीय मदद भी नदारद

 सरकार ने ये भी घोषणा की, मुफ्त शिक्षा नीति से कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को जो नुकसान होगा उसका पाई-पाई चुका दिया जाएगा. लेकिन ये घोषणा कागजों में सिमट कर रह गई.

बिहार: मुफ्त शिक्षा नीति से बिगड़ा कॉलजों का आर्थिक तंत्र, वित्तीय मदद भी नदारद
कॉलेजों में कई तरह के काम पैसे के अभाव में रूके हैं.

पटना: बिहार में स्नातकोत्तर यानि पोस्ट ग्रेजुएट तक एस-एसटी और सभी वर्गों की छात्राओं के लिए पढ़ाई की मुफ्त व्यवस्था है. ट्रेडिशनल कोर्स पर सरकार की लागू इस शिक्षा नीति का कॉलेजों को आर्थिक रूप से खासा नुकसान उठाना पड़ा है. कॉलेजों में कई तरह के काम पैसे के अभाव में रूके हैं.

यूनिवर्सिटी प्रबंधन और कॉलेज प्रबंधन की शिकायत है कि मुफ्त शिक्षा की नीति के एवज में हो रहे नुकसान की भरपाई की जाए लेकिन बीते चार सालों में उन्हें एक भी पैसे नहीं मिले हैं. बिहार सरकार ने साल 2015 में पोस्ट ग्रेजुएट तक एससी-एसटी और सभी वर्गों की छात्राओं के लिए मुफ्त शिक्षा नीति लागू कर दी. यानि छात्र और छात्राओं से दाखिले के वक्त जो पैसे लिए जाते थे.

 

कॉलेजों और यूनिवर्सिटी को साफ निर्देश दिए गए कि एक भी पैसे नहीं लिए जाए. सरकार ने ये भी घोषणा की, मुफ्त शिक्षा नीति से कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को जो नुकसान होगा उसका पाई-पाई चुका दिया जाएगा. लेकिन ये घोषणा कागजों में सिमट कर रह गई. राजधानी पटना में पटना विश्वविद्यालय और पाटिलपुत्र विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले सभी कॉलेजों की आर्थिक हालत बुरी तरह चरमरा चुकी है.

कई कॉलेजों के प्रिसिंपल ने खुलेआम कहा कि कॉलेजों की खराब हो रही वित्तीय हालत को लेकर चिट्ठी लिखी गई,पैसे की मांग की गई लेकिन पैसे नहीं आए. बिहार नेशनल कॉलेज,अनुग्रह नारायण कॉलेज,कॉलेज ऑफ कॉमर्स. बीडी इवनिंग कॉलेज सहित कई कॉलेजों के प्रिंसिपल ने कहा कि,मुफ्त शिक्षा की नीति सही तो है लेकिन कॉलेजों का जो नुकसान हो रहा है उसकी भरपाई कैसे हो.

दरअसल बिहार के कॉलेज एडमिशन और डेवलपमेंट फीस के नाम से छात्र और छात्राओं से शुल्क लेते थे..और इससे कॉलेजों को अच्छी खासी आय हुआ करती थी जिसका इस्तेमाल बिजली,लाइब्रेरी,गार्ड,सांस्कृतिक कार्यक्रम,देखभाल सहित दूसरे काम के लिए होता था. लेकिन साल 2015 में जब ये नीति लागू हुई तो बिहार के कॉलेज एक-एक पैसे के लिए मोहताज हो गए.कॉलेजों में कई काम रूके हुए हैं.बिहार सरकार ने कॉलेजों से मुफ्त शिक्षा नीति के एवज में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए पैसे देने की घोषणा की लेकिन कॉलेजों की शिकायत है कि पैसे नहीं मिले.

सरकार की इस नीति का नुकसान उन कॉलेजों का सबसे ज्यादा हुआ जहां छात्राएं पढ़ती है या इनकी संख्या ज्यादा है.पटना यूनिवर्सिटी में 60 फीसदी छात्राएं हैं जाहिर है सरकार की नीति से पटना यूनिवर्सिटी का भी नुकसान हुआ है. कॉलेज ऑफ कॉमर्स के प्रिंसिपल,प्रोफेसर तपन शांडिल्य के मुताबिक,पहले तो फीस नहीं लेने और फिर प्रोसपेक्टस की बिक्री नहीं होने के कारण कॉलेज की आर्थिक हालत पर दोहरी मार पड़ी है.

पिछले साल से बिहार में इंटर के कॉलेजों में ऑनलाइन एडमिशन होने लगा है.जिससे प्रोस्पेक्टस की बिक्री बंद हो गई.कॉलेज ऑफ कॉमर्स के प्रिंसिपल प्रोफेसर तपन शांडिल्य के मुताबिक सिर्फ दो साल में ही करोड़ों का नुकसान हो गया है. हालांकि बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहा कि, कॉलेजों को नुकसान की भरपाई की जाएगी और इस योजना में कोई खोट नहीं है.