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जमशेदपुर में बीजेपी और जेएमएम के बीच होगी प्रतिष्ठा की लड़ाई, होगा दिलचस्प मुकाबला

 झारखंड के जमशेदपुर संसदीय सीट पर इस बार की आमने-सामने की लड़ाई में भाजपा और जेएमएम दोनों ही सियासी दलों की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है.

जमशेदपुर में बीजेपी और जेएमएम के बीच होगी प्रतिष्ठा की लड़ाई, होगा दिलचस्प मुकाबला
जमशेदपुर में बीजेपी और जेएमएम के बीच होगा कड़ा मुकाबला. (प्रतीकात्मक फोटो)

पीयूष मिश्रा/जमशेदपुरः झारखंड के जमशेदपुर संसदीय सीट पर इस बार की आमने-सामने की लड़ाई में भाजपा और जेएमएम दोनों ही सियासी दलों की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है. सूबे की हॉट सीटों में से एक जमशेदपुर लोकसभा सीट पर न सिर्फ जीत हासिल करना बल्कि, बड़े मार्जिन से जीत सुनिश्चित करने को लेकर बीजेपी अपने संगठन की सारी ताकत झोंकने में लगी है. 

वहीं, जेएमएम प्रत्याशी महागठबंधन के सहयोगी दलों के समर्थन से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी के व्यापक जनाधार के बल पर जीत का दावा कर रही है. माना जा रहा है कि 12 मई चुनाव की तिथि आने तक दोनों के बीच इस चुनावी घमासान में कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा.

भाजपा के सुरक्षित गढ़ माना जाने वाला जमशेदपुर लोकसभा सीट पर इस बार के चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित कहना आसान नहीं है. सीएम रघुवर दास, पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा और मंत्री सरयू राय का गृह क्षेत्र जमशेदपुर एक ऐसा संसदीय क्षेत्र है, जहां से सूबे की सत्ता का मिजाज न सिर्फ तय होता है. बल्कि इन्हीं रास्तों से चल कर सूबे की सत्ता की कमान भी संभाली जाती है. यही वजह है कि इस बार के चुनाव में भाजपा अपनी जीत को लेकर भले ही दावे कर रही हो लेकिन अपनी सांगठनिक ढांचे के बलबूते गंभीर मान कर रात दिन एक किये हुए है.

पार्टी प्रत्याशी विद्युतवरण के चुनावी प्रचार में शहर आये मंत्री अमर बाउरी कहते हैं कि भाजपा जमशेदपुर संसदीय सीट पर जीत दर्ज करने को गंभीरता से ले रही है. जनता ने मिलावटी महागठबंधन को नकार दिया है. हम ऐतिहासिक जीत दर्ज करेंगे. महागठबंधन का कोई भी प्रयास सफल नहीं होगा. यहां की जनता का नब्ज टटोलने में हम सफल रहे हैं. लोग मोदी जी के नेतृत्व को फिर से स्वीकार करने का मन बना लिया है.

हालांकि भाजपा के जीत के दावों को महागठबंधन से जेएमएम प्रत्याशी सिरे से नकारते हैं और कहते हैं कि दरअसल एजेंडा विहीन भाजपा को हार का भय सता रहा है. पिछले पांच सालों में भाजपा जनता की कसौटी पर खरा उतर पाने में विफल साबित हुई है. असल में भाजपा संसदीय क्षेत्र की ग्रामीण जनता के बीच वोट मांगने से भी कतरा रही है. क्योंकि, उसके पास जनता के सवालों का जवाब ही नहीं है. चम्पई सोरेन ने भाजपा प्रत्याशी को कॉरपोरेट प्रत्याशी बताते हुए कहा कि उस चुनाव में जनता से भाजपा को सबक सिखाने का मन बना लिया है.

ऐसे में इस बार का चुनाव भले ही एनडीए और यूपीए के बीच हो रही हो लेकिन सियासी जानकारों की माने तो सूबे की दोनों ही प्रमुख सियासी दलों के लिए भी मुंछ की लड़ाई बनी हुई है. दोनों ही सियासी दल डोर टू डोर सघन कैम्पेन और पदयात्रा के अलावा मतदाताओं को अपने पक्ष में गोलबंद करने को लेकर बाहर से आये जादूगरों को प्रचार में झोंक रहें हैं. कुछ ऐसा ही डेमो जेएमएम के चुनावी कार्यालय में देखने को मिला. जब कांट्रेक्ट मिलने की उम्मीद लगाए बैठे नागपुर से आये जादूगर ने जेएमएम कार्यालय में अपनी जादूगरी दिखा कर पक्ष में प्रचार करने की अनुमति मांगी.