Nitish Kumar Birthday: कुछ ऐसे मिला नीतीश कुमार को 'सुशासन बाबू' का तमगा

Nitish Kumar: नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में सिर्फ शासन तंत्र को ही ठीक नहीं किया, बल्कि योजनाओं की ऐसी सौगात दी कि आने वाली पीढ़ी तक इसे याद रखेंगी.

Nitish Kumar Birthday: कुछ ऐसे मिला नीतीश कुमार को 'सुशासन बाबू' का तमगा
आज 70वां जन्मदिन मना रहें हैं नीतीश कुमार. (तस्वीर साभार-पीटीआई)

Patna: नीतीश कुमार 24 नवंबर 2005 को दूसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने, तब राष्ट्रीय जनता दल के 15 साल के शासनकाल को अपनी साफ-सुथरी छवि से धराशायी करना आसान नहीं था. लेकिन बिहार के मतदाताओं को नीतीश में सुशासन बाबू की छवि दिखाई दी. इस दौरान नीतीश अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, कर्मठ फैसले और बेदाग नेतृत्च से बिहार को विकास के पथ पर आगे ले गए.

इस तरह मिला 'सुशासन बाबू' का तमगा
1990 से लेकर 2005 तक बिहार की जो छवि लालू राबड़ी शासन काल में बनी, उससे निकालने की चुनौती नीतीश कुमार (Nitish Kumar Birthday) के सामने थी. ऐसी चुनौती, जिससे बिहार की छवि और शासन की प्रणाली दोनों बदले. नीतीश ने सबसे पहले वही काम किया, पुलिस प्रशासन को सख्त किया और अपराध पर नकेल कसने की कोशिशें शुरू कर दी और इसका असर अगले पांच सालों में नजर आने लगा. ग्राफ का आंकड़ा कम होने लगा, फिरौती की खबरें कम आने लगी है, सरकार बदलने का असर जमीन पर नजर आने लगा और यहीं से नीतीश कुमार को 'सुशासन' बाबू का तमगा मिला.

ये तमगा नीतीश कुमार ने अपने काम की बदौलत कमाया. नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में सिर्फ शासन तंत्र को ही ठीक नहीं किया, बल्कि योजनाओं की ऐसी सौगात दी कि आने वाली पीढ़ी तक इसे याद रखेंगी.

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नीतीश के योजनाओं की लंबी फेहरिस्त है
बिहार में लड़कियों की शिक्षा के लिए भी नीतीश ने कई अहम कार्य किए हैं. उन्होंने स्कूल जाने वाली हर लड़की को साइकिल दी थी ताकि लड़कियों को स्कूल जाने में कोई दिक्कत ना हो और अधिक से अधिक लड़कियां स्कूल जा सकें. नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान मुफ्त दवाइयां, चिकित्सीय सेवाएं और किसानों को ऋण देने जैसी सेवाएं भी शुरू की गईं.

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UN में बजा नीतीश का डंका
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और नीतीश की पहल के कारण नालंदा अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई. नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते हुए बिहार में सूचना के अधिकार के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण की शुरुआत की. उन्होंने मनरेगा में ई-शक्ति कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसके तहत फोन पर ही रोजगार से जुड़े समाचार उपलब्ध कराए जाते हैं. 2015 में बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक लाख स्कूली शिक्षकों की भर्ती की, ताकि बिहार में पढ़ाई का स्तर बेहतर हो सके और लोगों को रोजगार भी मिल सके. यही नहीं, उनकी योजना सात निश्चय की तारीफ तो यूनाइटेड नेशन में हो चुकी है.

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बीमारू बिहार को दिखाई विकास की तस्वीर!
दरअसल, नीतीश कुमार ने कामों की ऐसी झड़ी लगा दी कि विरोधियों को सवाल का मौका नहीं मिला. ऐसे-ऐसे काम किए जो लोगों को दिखाई दे रहे थे. मसलन बिहार में बड़े पैमाने पर सड़कों का निर्माण किया गया. कच्ची रोड को पक्का किया गया. टूटी सड़कों को बढ़िया बनाया गया यानी सड़कों का जाल ऐसा बिछाया कि बिहार की सभी जिलों से राजधानी पहुंचना आसान हो गया. ये नीतीश के सुशासन की ही देन है कि बिहार की छवि के साथ विकास की बयार बही और इस काम के जरिए नीतीश की इमेज समाज सुधारक की बन गई.