विधान परिषद चुनाव जनादेश नहीं, लेकिन जदयू-राजद गठबंधन को और सचेत हो जाना चाहिए: केसी त्यागी

बिहार विधान परिषद के चुनाव में भाजपा नीत गठबंधन की सफलता को आम जनता का जनादेश मानने से इनकार करने के साथ ही जदयू महासचिव केसी त्यगी ने आज कहा कि इस परिणाम को देखते हुए जदयू-राजद गठबंधन को आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए और सचेत होकर काम करना चाहिए। त्यागी ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की ओर से ओबीसी कार्ड खेलने को लेकर उन पर निशाना साधा और कहा कि भाजपा हालात को देखते हुए धर्म, विकास और जाति का कार्ड खेलती है।

विधान परिषद चुनाव जनादेश नहीं, लेकिन जदयू-राजद गठबंधन को और सचेत हो जाना चाहिए: केसी त्यागी

नई दिल्ली : बिहार विधान परिषद के चुनाव में भाजपा नीत गठबंधन की सफलता को आम जनता का जनादेश मानने से इनकार करने के साथ ही जदयू महासचिव केसी त्यगी ने आज कहा कि इस परिणाम को देखते हुए जदयू-राजद गठबंधन को आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए और सचेत होकर काम करना चाहिए। त्यागी ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की ओर से ओबीसी कार्ड खेलने को लेकर उन पर निशाना साधा और कहा कि भाजपा हालात को देखते हुए धर्म, विकास और जाति का कार्ड खेलती है।

उन्होंने कहा, बिहार में 24 सीटों का विधान परिषद चुनाव जनादेश नहीं है। इसमें आम लोग भाग नहीं लेते हैं। इस चुनाव में कुछ चुनिंदा प्रतिनिधि मतदान करते हैं। ऐसे में यह कहना उचित नहीं है कि आगामी विधानसभा चुनाव पर इसका असर होगा। इसके साथ ही जदयू नेता ने कहा, इतना जरूर है कि इस परिणाम के बाद जदयू-राजद गठबंधन को और अधिक सचेत और समरस होकर काम करने की जरूरत है। विधानसभा परिषद चुनाव के इस नतीजे का हमारे गठबंधन पर कोई असर नहीं होने वाला है। बिहार विधान परिषद के 24 सीटों के चुनाव में कल भाजपा नीत राजग को 14 और जदयू-राजद गठबंधन को 9 सीटें मिलीं। इस चुनाव को विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल कहा जा रहा था।

त्यागी ने कहा, विधानसभा चुनाव 243 सीटों पर होना है। ऐसे में 24 सीटों के चुनाव को सेमीफाइनल कैसे कहा जा सकता है। इसमें बहुत अधिक पढ़ने की जरूरत नहीं है।..बिहार भाजपा नेता नंदकिशोर यादव के इस बयान से मैं असहमत हूं कि यह फिल्म का ट्रेलर है। मैं यह कहना चाहता हूं कि कई बार फिल्म का ट्रेलर शानदार होता है, लेकिन फिल्म बहुत बोरिंग होती है।

अमित शाह के पहले ओबीसी प्रधानमंत्री और सर्वाधिक ओबीसी मुख्यमंत्री वाले बयान पर त्यागी ने कहा, अमित शाह को पता होना चाहिए कि चौधरी चरण सिंह पहले ओबीसी प्रधानमंत्री थे। सर्वाधिक ओबीसी मुख्यमंत्री को लेकर उनका दावा भी गलत हैं। नरेंद्र मोदी विकास के मुद्दे पर चुनाव जीते। अचानक से जाति की बात कहां से आ गई? ये लोग कभी हिंदू हृदय सम्राट बनते हैं तो कभी विकास की बात करते हैं और फिर जाति का कार्ड खेलने लगते हैं। ये स्थिति के हिसाब से धर्म, जाति और विकास का कार्ड आगे करते हैं।

उन्होंने कहा, दिल्ली के चुनाव में मोदी तो पिछड़े नहीं बने, वहां तो विकास पुरूष बने हुए थे। बिहार में पिछड़ा कार्ड खेल रहे हैं। ये सिर्फ वोट की खातिर है। जदयू और राजद का नेतृत्व बिहार और पूरे देश में ओबीसी राजनीति के मातृ संगठन हैं, जबकि भाजपा सौतेली मां है। त्यागी ने दावा कि ओबीसी के आरक्षण से जुड़ी मंडल आयोग की सिफारिशों का भाजपा ने विरोध किया था। उन्होंने कहा, ये लोग पिछड़ों की बात करते हैं। मंडल आंदोलन के समय आडवाणी जी ने रथ यात्रा निकाली। इन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों का विरोध किया था। अब ये पिछड़ों के हितैषी बनने की कोशिश कर रहे हैं।