पटना साहिब लोकसभा सीट : शत्रुघ्न सिन्हा के लिए आसान नहीं है 2019 की राह

 इस सीट से बिहारी बाबू के लिए हैट्रिक आसान नहीं होगी, क्योंकि अब उनकी गिनती बीजेपी के बागी नेताओं में है.

पटना साहिब लोकसभा सीट : शत्रुघ्न सिन्हा के लिए आसान नहीं है 2019 की राह
2009 में पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र में पहला चुनाव हुआ, जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा ने बाजी मारी. (फाइल फोटो)

पटना : गंगा, गांधी मैदान और गुरुद्वारा, ये पहचान है पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र की. गांधी मैदान अपनी राजनीतिक पहचान की वजह से इतिहास में बेहद अहम स्‍थान रखता है. यहां हुई रैलियां देश में सियासी बदलाव का प्रतीक रही हैं. नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, राम मनोहर लोहिया और अटल बिहारी वाजपेयी सहित कई नेताओं की रैलियों का भी यह मैदान गवाह रहा है. जयप्रकाश नारायण ने पांच जून 1974 को इसी मैदान पर संपूर्ण क्रांति का नारा बुलंद किया था. उन्‍हीं की अगुआई में आगे बढ़े लालू प्रसाद, नीतीश कुमार और सुशील मोदी आज राज्य के कद्दावर नेताओं में शामिल हैं. 

साल 2008 में पटना लोकसभा क्षेत्र को दो भागों में बांट दिया गया. पहला पटना साहिब और दूसरा बना पाटलिपुत्र. 2009 में पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र में पहला चुनाव हुआ, जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा (बिहारी बाबू) ने बाजी मारी. 2014 में भी जनता में शत्रुघ्न सिन्हा को यहां से लोकसभा भेजा. यहां का चुनाव शुरू से ही फिल्मी सितारों के बीच होता रहा है. हर बार बाजी बिहारी बाबू ने मारी. साल 2009 में शेखर सुमन और 2014 में कुणाल सिंह को शिकस्त दी. इस सीट से बिहारी बाबू के लिए हैट्रिक आसान नहीं होगी, क्योंकि अब उनकी गिनती बीजेपी के बागी नेताओं में है.

पटना साहिब लोकसभा में 6 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से पांच सीट पर बीजेपी का कब्जा है. बख्तियारपुर, दीघा, बांकीपुर, कुम्हरार और पटना साहिब का नाम इनमें शामिल है. वहीं, फतुहा सीट आरजेडी के पास है.

यादव, राजपूत और कायस्थ वोटरों की तादाद यहां सबसे ज्यादा है. ऐसे में बीजेपी यहां से शत्रुघ्न सिन्हा की जगह केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद या फिर राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा को चुनावी मैदान में उतार सकती है. ऐसी चर्चा चल रही है. वहीं, महागठबंधन की तरफ से बीजेपी के बागी शत्रुघ्न सिन्हा मैदान में उतर सकते हैं.जिससे यहां का मुकाबला काफी दिलचस्प हो जाएगा. शत्रुघ्न सिन्हा अपने 10 साल के कार्यकाल के नाम पर जनता के बीच जाएंगे.

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के शत्रुघ्न सिन्हा को चार लाख 85 हजार वोट मिले थे. जबकि कांग्रेस के कुणाल सिंह को दो लाख 20 हजार और जेडीयू के गोपाल प्रसाद सिन्हा को महज 91 हजार वोट से संतोष करना पड़ा था.

शत्रुघ्न सिन्हा 1991 में पहली बार नई दिल्ली सीट से लोकसभा चुनाव लड़े. फिल्म स्टार राजेश खन्ना से 25 हजार वोट से हार गए. 1996 और 2002 में बीजेपी के ही कोटे से राज्यसभा सांसद बने. 2003 में उन्हें केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री बनाया गया. अगस्त 2004 में शिपिंग मंत्रालय की भी जिम्मेदारी मिली. 2009 में पहली बार पटना साहिब से लोकसभा चुनाव जीते. फिर 2014 में भी पटना साहिब से सांसद चुने गए.

शत्रुघ्न सिन्हा से जनता को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन पांच साल में जनता की समस्याओं से वो दूर भागते रहे. ऐसा कहना है पटना साहिब के लोगों का. पटना साहिब में बिजली में काफी सुधार हुआ, लेकिन सड़क बनवाने में सांसद नाकाम रहे हैं. किसानों की समस्याएं भी दूर नहीं हुई. रोजगार के क्षेत्र में भी कोई प्रयास नहीं हुआ. शिक्षा के क्षेत्र में थोड़ा सुधार हुआ है.  यहां के लोगों को बिहारी बाबू का फिल्मी डायलॉग तो बहुत पसंद है, लेकिन बतौर सांसद उनके कामकाज से लोग निराश हैं.