Lok Sabha Election 2024 Sitamarhi Seat: सीतामढ़ी में कभी नहीं जीती BJP, समाजवादी आपस में ही करते रहे उठापटक
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Lok Sabha Election 2024 Sitamarhi Seat: सीतामढ़ी में कभी नहीं जीती BJP, समाजवादी आपस में ही करते रहे उठापटक

सीतामढ़ी लोकसभा सीट का भुगोल बदलता और इतिहास बनता-बिगड़ता रहा है. वर्ष 1952 के पहले चुनाव में यह इलाका मुजफ्फरपुर पूर्वी में था. वर्ष 1957 के चुनाव में यह संसदीय क्षेत्र अस्तित्व में आया.

सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन

Sitamarhi Lok Sabha Seat Profile: बिहार की सीतामढ़ी लोकसभा सीट का इतिहास काफी पुराना है. इस सीट का संबंध रामायण काल से बताया जाता है. रामायण काल में यहां मिथला नरेश जनक का साम्राज्य हुआ करता था. कहा जाता है कि मां सीता का प्राकट्य यहीं हुआ था, इसीलिए इसका नाम सीतामढ़ी पड़ा. पहले यह मुजफ्फरपुर जिले का हिस्सा हुआ करता था. 1997 में इसे जिला का दर्जा मिला. बिहार की राजधानी पटना से इसकी दूरी 135 किलो मीटर है. 

सीतामढ़ी लोकसभा सीट का भुगोल बदलता और इतिहास बनता-बिगड़ता रहा है. वर्ष 1952 के पहले चुनाव में यह इलाका मुजफ्फरपुर पूर्वी में था. वर्ष 1957 के चुनाव में यह संसदीय क्षेत्र अस्तित्व में आया. इस सीट में सीतामढ़ी जिले के अलावा मुजफ्फरपुर जिले का औराई विधानसभा शामिल था. 2009 के चुनाव में इस सीट का भुगोल फिर से बदला और मुजफ्फरपुर जिले का औराई विधानसभा क्षेत्र हटा दिया गया था. वर्तमान में सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र में जिले का बथनाहा, परिहार, सुरसंड, बाजपट्टी, रून्नीसैदपुर और सीतामढ़ी समेत छह विधान सभा क्षेत्र शामिल हैं.

नागेंद्र प्रसाद की हैट्रिक दर्ज

इस सीट पर कांग्रेस के नागेंद्र प्रसाद यादव की जीत की हैट्रिक का रिकार्ड अब भी बरकरार है. उन्होंने 1961, 1967 और 1971 के चुनाव में लगातार जीत दर्ज की. हालांकि वर्ष 1977 में लोकदल के महंत श्याम सुंदर दास और 1989 के चुनाव में उन्हें जनता दल के हुकुमदेव नारायण यादव से शिकस्त खानी पड़ी थी. 1991, 1996 और 1999 में जनता दल के नवल किशोर राय ने भी हैट्रिक लगाई. 1998 और 2004 में राजद के सीताराम यादव ने जीत दर्ज की. 

कभी नहीं खिला बीजेपी का कमल

1952 से लेकर 2019 तक के चुनावी इतिहास में यहां आज तक बीजेपी को कामयाबी हासिल नहीं हुई है. शुरुआती दौर में कांग्रेस का दबदबा था तो आपातकाल के बाद से समाजवादियों में उठापटक देखने को मिलती है. 2004 के बाद से राजद को भी कामयाबी हासिल नहीं हुई है. 2009 में जदयू के अर्जुन राय ने जीत हासिल की. 2014 में एनडीए गठबंधन में यह सीट रालोसपा के खाते में आई और मोदी लहर में सवार होकर रालोसपा के रामकुमार शर्मा दिल्ली पहुंचे. 2019 में एनडीए में शामिल जदयू के खाते में सीट आई. नीतीश कुमार को भीतरघात के कारण अंतिम समय में बीजेपी नेता सुनील कुमार पिंटू को अपने में शामिल कराकर टिकट देनी पड़ी थी. 

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इस सीट की समस्याएं

2011 की जनगणना के अनुमान के अनुसार इस क्षेत्र में कुल 3,423,574 जनसंख्या थी. इसमें से 1,803,252 पुरुष और 1,620,322 महिलाएं थीं. 2019 के चुनाव में सीतामढ़ी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में 1,574,914 मतदाता थे, जिनमें से 832,370 पुरुष और शेष 742,544 महिलाएं हैं. हर साल आने वाली बाढ़ से यहां की जनता काफी प्रभावित होती है. बाढ़ के चलते खेती काफी प्रभावित होती है. रोजगार के लिए उद्योग-धंधा नहीं होने की वजह से पलायन करना लोगों की मजबूरी है. स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी कोई विकास नहीं हुआ है.

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