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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम: चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के चेयरमैन वर्मा और सदस्य विकास कुमार के खिलाफ आरोप तय

आरोपी रामानुज ठाकुर और डॉ. अश्विनी की ओर से वकील प्रकाश कश्यप बुधवार को कोर्ट में पेश हुए. 

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम: चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के चेयरमैन वर्मा और सदस्य विकास कुमार के खिलाफ आरोप तय
फाइल फोटो

नई दिल्ली: मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में साकेत कोर्ट ने दो और आरोपियों के खिलाफ बुधवार को आरोप तय किए. कोर्ट ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के चेयरमैन दिलीप कुमार वर्मा और सदस्य विकास कुमार के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, अपराधिक षड्यंत्र रचने और अन्य धाराओं में आरोप तय किए. अब तक 7 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं. मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर सहित 13 आरोपियों के खिलाफ अभी भी आरोप तय होना बाकी हैं. 

आरोपी रामानुज ठाकुर और डॉ. अश्विनी की ओर से वकील प्रकाश कश्यप बुधवार को कोर्ट में पेश हुए. दरअसल, कोर्ट ने कल मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर की राजदार शाइस्ता परवीन उर्फ मधु के खिलाफ आरोप तय किए थे. कोर्ट ने पॉस्को एक्ट, अपराधिक साजिश रचने के अलावा अन्य धाराओं में आरोप तय किए थे. कल सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर समेत 20 आरोपी कोर्ट में पेश हुए थे. आरोपियों के वकील ने सीबीआई से पीड़िताओं के नाम देने की मांग की थी. 

इधर, सुनवाई के दौरान मधु के खिलाफ आरोप तय करने से पहले सीबीआई ने पीड़िता नंबर-13 ने बयान का हवाला दिया था. सीबीआई ने कहा था कि पीड़िता ने मधु के खिलाफ दिए बयान में कहा था कि इस पूरे घटना की जानकारी उसने मैडम यानि मधु को दी थी, जब उसने मैडम को बताया था कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में गलत काम होता है, तब मधु ने कहा था कि कोई गलत काम नहीं होता है बल्कि तुम नाचना वगैरह भी सीख लो.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सात फरवरी को मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले की सुनवाई दिल्ली की साकेत कोर्ट के विशेष पॉक्सो अदालत में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने साकेत कोर्ट से 6 महीने में ट्रायल पूरा करने का निर्देश दिया था. आपको बता दें कि पिछले जुलाई महीने में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सरकारी सहायता प्राप्त एक शेल्टर होम में 16 बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामले ने सूबे सहित पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. पीड़ित बच्चियों ने अपने एक साथी की हत्या कर शव को परिसर में दफनाने का आरोप भी लगाया था. 

इसी साल मई में टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के सोशल ऑडिट के दौरान मामले का खुलासा हुआ था. इसके बाद पुलिस की जांच में यह सामने आया था कि शेल्‍टर होम से छह लड़कियां गायब हुई हैं. पुलिस पूछताछ में पीड़िताओं ने यह जानकारी दी. बताया जा रहा है कि वर्ष 2013 से 2018 के बीच ये लड़कियां गायब हुई हैं. इसके बाद राज्य के समाज कल्याण विभाग ने पिछले महीने प्राथमिकी दर्ज की. मामले में दस लोगों की गिरफ्तारी हुई. सोशल ऑडिट में यह सामने आया था कि वर्ष 2013 से 2018 के बीच शेल्टर होम से 6 लड़कियां गायब हुई हैं. हालांकि, इन लड़कियों के गायब होने का कोई पुलिस रिकॉर्ड नहीं है.