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बिहार में बैंक कृषि साख योजना का 95 प्रतिशत लक्ष्य करें हासिल- सुशील मोदी

 सुशील कुमार मोदी ने यहां गुरुवार को कहा कि बैंक वित्तीय वर्ष 2018-19 की वार्षिक साख योजना के तहत 1 लाख 30 हजार करोड़ का कम से कम 95 फीसदी कर्ज वितरित करें.

बिहार में बैंक कृषि साख योजना का 95 प्रतिशत लक्ष्य करें हासिल- सुशील मोदी
सुशील मोदी ने बैंकों को कृषि साख योजना को बढ़ाने को कहा है. (फाइल फोटो)

पटनाः बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने यहां गुरुवार को कहा कि बैंक वित्तीय वर्ष 2018-19 की वार्षिक साख योजना के तहत 1 लाख 30 हजार करोड़ का कम से कम 95 फीसदी कर्ज वितरित करें, जिससे बिहार के लोगों को पिछले वर्ष से करीब 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक ऋण मिल सके. पटना में नाबार्ड की ओर से आयोजित 'स्टेट क्रेडिट सेमिनार-2019' को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि 2019-20 के लिए प्राथमिकता क्षेत्र के लिए 1,29,030 करोड़ रुपये का आकलन किया गया है. इस वर्ष प्राथमिक क्षेत्रों में 93 हजार करोड़ वितरित किया जाना है.

उन्होंने बैंकों से केसीसी सहित डेयरी, मछली पालन, मुर्गीपालन, सूक्ष्म व लघु उद्योग आदि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण वितरित करने को कहा. उन्होंने ऋण वापसी की समस्या को नकारते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूह को 2364 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया जिसकी रिकवरी दर 98 प्रतिशत है.

बिहार के वित्तमंत्री मोदी ने कहा, "वर्ष 2017-18 में डेयरी, मछली पालन, मुर्गीपालन के क्षेत्र में लक्ष्य का मात्र 20 प्रतिशत तथा कृषि यांत्रिकीकरण और भंडारण के क्षेत्र में 22 और 18 प्रतिशत ही लक्ष्य हासिल हो सका. इसी अवधि में 5.80 लाख मेट्रिक टन मछली और 111 करोड़ अंडे का उत्पादन बिहार में हुआ."

उन्होंने चिंता प्रकट करते हुए कहा कि 2016-17 में 74 हजार करोड़ रुपये के लक्ष्य के बाद मात्र 65 हजार करोड़ तथा 2017-18 में 80 हजार करोड़ रुपये के विरुद्ध 70 हजार करोड़ प्राथमिक क्षेत्रों को कर्ज दिया गया.

किसानों को मिलने वाले ब्याज अनुदान को बैंकों द्वारा ठीक से प्रचारित करने की सलाह देते हुए कहा कि ऋण वसूलने के अपने तंत्र को भी दुरुस्त करने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि साल 2017-18 में राज्य सरकार ने नाबार्ड को 1 प्रतिशत ब्याज अनुदान के मद में 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया. उन्होंने कहा कि जेएलजी (ज्वायंट लैबलिटी ग्रुप) के तहत 1 लाख रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 23 हजार समूह का गठन हुआ और मात्र 318 करोड़ रुपये का ही ऋण दिया गया.