शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन विधानसभा पहुंचे तेजप्रताप, लेकिन नहीं हो सका भरत मिलाप!

शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन आखिरकार तेजप्रताप यादव विधानसभा पहुंचे. तेजप्रताप यादव ने विधानसभा के बाहर कहा कि सदन ही नहीं पूरे बिहार में बवाल मचा हुआ है. 

शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन विधानसभा पहुंचे तेजप्रताप, लेकिन नहीं हो सका भरत मिलाप!
तेजप्रताप यादव ने विधानसभा के बाहर कहा कि सदन ही नहीं पूरे बिहार में बवाल मचा हुआ है.

आशुतोष चंद्रा, पटना: शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन आखिरकार तेजप्रताप यादव विधानसभा पहुंचे. तेजप्रताप यादव ने विधानसभा के बाहर कहा कि सदन ही नहीं पूरे बिहार में बवाल मचा हुआ है. लेकिन इस दौरान बड़े भाई की मुलाकात छोटे भाई से नहीं हो सकी. 

तेजस्वी यादव के सदन पहुंचने से पहले तेजप्रताप सदन से बाहर निकल गए. कुल मिलाकर लगभग 1 महीने बाद भी भरत मिलाप होते-होते रह गया. आमतौर पर हंगामे के लिए चर्चित विधानमंडल का शीतकालीन सत्र शुक्रवार को तेज प्रताप के नाम रहा. सबको चौंकाते हुए तेजप्रताप साढ़े 10 बजे अचानक विधानसभा पहुंचे. 

Tej Pratap

तेजप्रताप ने विधानसभा में अपनी हाजरी बनाई और लगभग आधे घंटे तक रहे. विधानसभा से निकलते वक्त पत्रकारों ने तेजप्रताप से सदन में चल रहे हंगामे पर सवाल पूछा. तेजप्रताप ने कहा कि सदन ही नहीं पूरे बिहार में बवाल मचा हुआ है. मेरे पार्टी के लोग जनता का सवाल उठा रहे हैं. सरकार की खामियों को उजागर किया जा रहा. 

तेजप्रताप से जब उनके घर जाने से जुड़ा सवाल पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी खुलकर नही बोला. लगभग 1 महीने तक पटना से बाहर रहने के बाद तेजप्रताप 29 तारीख को पटना लौटे लेकिन अपने घर नहीं गए हैं.

पूरे मामले का दिलचस्प पहलू ये है कि तेजप्रताप के सदन से निकलने के ठीक बाद तेजस्वी विधानसभा पहुंचे. हालात बता रहे थे कि दोनों भाइयों की मुलाकात हो जाएगी. भरत मिलाप का नजारा विधानसभा में दिखेगा. लेकिन ऐसा कुछ भी नही हुआ.

इधर विधान परिषद पहुंची राबड़ी देवी भी खामोश ही रहीं. राबड़ी देवी परिषद के पोर्टिको में अपने एमएलसी के साथ प्रदर्शन में शामिल तो हुई लेकिन कोई बयान नहीं दिया. ये पहला मौका था जब शीतकालीन सत्र में राबड़ी खामोश दिखीं.

कहा तो ये भी जा रहा है कि तेजप्रताप का सत्र के आखिरी दिन सदन आना तय था. नियम के मुताबिक हर विधायक का 6 महीने में 1 बार विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य होता है. जो विधायक इस मौके को चूक जाते हैं उनकी सदस्यता पर भी खतरे की नौबत आ जाती है. इसलिए ये कयास लगाए जा रहे थे कि तेजप्रताप सत्र के आखिरी दिन सदन जरूर आएंगे.