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बिहार : बच्चों की सुरक्षा को लेकर राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

इसके लिए हर जिले से तीन शिक्षकों को चुन कर उन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जा रहा है.

बिहार : बच्चों की सुरक्षा को लेकर राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

पटना : बिहार शिक्षा परियोजना परिषद, राज्य शिक्षा शोध और प्रशिक्षण परिषद पटना यूनिसेफ बिहार के द्वारा स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए बिहार के सभी 38 जिलों से चयनित 120 मुख्य प्रशिक्षकों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण करवाया जा रहा है. यह प्रशिक्षण बिहार के सभी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में पहला कदम है. इसके लिए कई स्तरों पर शिक्षकों का प्रशिक्षण करने की योजना है.

इसके लिए हर जिले से तीन शिक्षकों को चुन कर उन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिनके माध्यम से जिला स्तर पर बाल संरक्षण से संबंधित प्रशिक्षण का संचालन करवाया जाएगा. यह विषय काफी संवेदनशाल है. ऐसे में उन्हें बच्चों के शोषण और उत्पीडण से संबंधित सभी मुददों की गहन जानकारी दी जा रही है ताकि आगे वो बेहतर तरीके से अपनी बात अन्य लोगों तक पहुंचा सकें.

इस पहल के बारे में बताते हुए यूनिसेफ की शिक्षा विशेषज्ञ डॉ प्रमिला मनोरहन ने कहा कि बिहार में लगभग 3 करोड़ बच्चे विद्यालय में हैं. बच्चे अपने घर के अलावा सबसे ज्यादा समय विद्यालय में बिताते हैं. बच्चों को सीखने और आगे बढ़ने में मदद करने के लिए एक सुरक्षित, सकारात्मक और आरामदायक वातावरण की आवश्यकता होती है. हाल के दिनों में विद्यालयों में बच्चों के साथ हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के द्वारा सभी राज्यों को एक पत्र निर्गत किया गया, जिसमें राज्यों को अपने स्तर से विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए एक दिशार्निदेशिका बनाने और उसका कार्यान्वयन करने की बात कही गई थी. इसी को ध्यान में रखकर बिहार ने पहल करते हुए एक मार्गदर्शिका बनाई है जो शीघ्र ही नोटिफाई की जाएगी और सभी विद्यालयों को इसे लागू करना होगा.

बिहार शिक्षा परियोजना परिष्द की राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, गुणवत्ता किरण कुमारी ने मुख्य प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण के बारे में बताते हुए कहा कि बिहार के सभी 38 जिलों से 3 उत्कृष्ट मुख्य प्रशिक्षकों का चयन किया गया है जिसमें दो प्राथमिक या माध्यमिक और एक उच्च विद्यालयों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. अपने पांच दिवसीय प्रशिक्षण के बाद ये अपने अपने जिलों में सबंधित प्रंखड संसाधान समन्वयक और संकुल संसाधन समन्वयकों को प्रशिक्षित करेंगें और आगे वो लोग अपने-अपने संकुल/प्रखंड के शिक्षकों तक इन जानकारियों को पहुंचाएंगे और विद्यालयों स्तर पर बच्चों की सुरक्षा के लिए किए जाने वाले कार्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगें.

प्रिंवेंशन ऑफ़ वायलेंस इन स्कूल’ नामक इस मार्गदर्शिका में मुख्य रूप से स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण से सम्बंधित विभिन्न मौजूदा दिशानिर्देशों से प्रासंगिक जानकारी, बाल सुरक्षा और संरक्षण के उपायों और उनकी निगरानी/अनुश्रवण करने के तरीके, बाल दुर्व्यवहार और उपेक्षा की घटनाओं की पहचान और उपयुक्त कदम और रिपोर्ट करने के तरीकों के साथ ही सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों, शिक्षकों और स्वयंसेवकों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के बारे में भी बताया गया है. 

प्रशिक्षकों को संबोधित करते हुए यूनिसेफ के बाल संरक्षण विशेषज्ञ मंसूर कादरी ने समेकित बाल संरक्षण सेवाएं के तहत बिहार में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण से जुड़ी स्थापित संस्थानिक व्यवस्थाओं, सरकार की योजनाओं और नीतियों के बारे में शिक्षकों को बताया ताकि बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों के निराकरण में वो सहयोग कर सकें. उन्होनें, बच्चों के प्रति हिंसा को रोकने के लिए एक वैश्विक मुहिम इनसपायर (INSPIRE) के बारे में  बताते हुए कहा कि आई यानी इंप्लीमेंटेशन और इंर्फोसमेंट ऑफ लॉ, एन का मतलब नार्म्स और वैल्यू, एस यानि सेफ इन्वायरमेंट, पी यानी पैरेंट और केयरगीवर सर्पोट, आई यानी इनकम और इकोनामिक स्ट्रेन्थेनिंग, आर का मतलब यानि रिस्पांस और सर्पोट सर्विस और ई यानी एडूकेशन और लाइफ स्कील बच्चों के खिलाफ हिंसा को समाप्त करने के लिए सात महत्वपूर्ण रणनीतियां हैं. इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन लीड कर रहा है और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जुड़ी हुई हैं. विभिन्न अध्ययनों के आधार पर इन सात रणनीतियों को बच्चों के विरूद्ध हिंसा को रोकने और खत्म करने में प्रभावी माना गया है.

बाल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था अर्पण की मुख्य समन्वयक नेहा शर्मा ने कहा इस पांच दिवसीय कार्यशाला में विद्यालय को सुरक्षित बनाने के लिए मुख्य रूप से बच्चों के परिवेश, बच्चों के परवरिश से जुडे सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलूओं, बच्चों के साथ विभिन्न प्रकार के  लैंगिक हिंसा, बच्चों से जुड़े कानूनों  जैसे जे जे एक्ट, पाक्सो एक्ट आदि पर गहन और विस्तृत चर्चा की गई. साथ ही इस दौरान विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया. अर्पण से इस अवसर पर प्रशिक्षक के रूप में सुविधा, चंद्रिका, दीपालीए शुभांगी और विजल  ने प्रशिक्षण लिया.

कार्यशाला में राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, गुणवत्ता किरण कुमारी, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, कस्तुरबा गांधी राजकुमार, यूनिसेफ के बिहार प्रमुख (प्रभारी) शिवेंद्र पांडया, यूनिसेफ के बाल संरक्षण विशेषज्ञ मंसूर कादरी शिक्षा विशेषज्ञ डॉ प्रमिला मनोरहन, संचार विशेषज्ञ निपुर्ण गुप्ता, राज्य शिक्षा शोध एंव प्रशिक्षण परिषद से डॉ अर्चना और डॉ विभा उपस्थित रही.