Delhi News: डियर पार्क की जो पहचान थी वह बहुत जल्द खत्म होने वाली है या यूं कहें केवल डियर पार्क नाम ही रह जायेगा. सेंट्रल जू अथॉरिटी ने डियर पार्क से सभी हीरणो को हटाने का फैसला लिया है. यह फैसला इसलिए लिया गया है. क्योंकि अथॉरिटी का कहना है कि बीते कई दशकों में डियर पार्क में हिरणों की संख्या काफी ज्यादा बढी है, इस पार्क को मिनी जू के मद्देनजर बनाया गया था, जिसमें यहां पर हिरण तो लाए गए थे लेकिन इनका शिकार नहीं होने के कारण इनकी जनसंख्या लगातार बढ़ रही है. 


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1960 में बनाया गया था पार्क
इस डियर पार्क को 1960 में बनाया गया था. कुछ हिरण यहां पर लाए गए थे, लेकिन बीते दशकों में इनकी संख्या काफी बढ़ गई है, जो प्रशासन को अब इस बात की भी चिंता है कि हिरणों के रखरखाव और उनकी सुरक्षा के लिए जितने उपाय जो प्रशासन द्वारा किए गए हैं इनकी बढ़ती जनसंख्या के आगे वह कम पड़ रही है. लिहाजा सेंट्रल जू अथॉरिटी ने इन सभी हिरणों को यहां से हटाने का फैसला लिया है. दिल्ली के असोला के जंगलों में लेपर्ड की संख्या बढ़ रही है. वहीं उनके शिकार के लिए जानवरों की कमी हो रही है. जंगल में शिकारी जानवर और शिकार होने वाले जानवरों की संतुलन को बनाए रखने के लिए इन हिरणों में से कुछ को असोला के जंगलों में छोड़ा जाएगा और कुछ हिरणों को राजस्थान के जंगलों में छोड़ा जाएगा.सेंट्रल जू अथॉरिटी के तरफ से आंकड़ा दिया गया है कि डियर पार्क में लगभग 600 हिरन अभी है.


न बंद हो पार्क
इस मामले में लोगों का कहना है कि यहां से हिरणों को नहीं हटाना चाहिए.  दक्षिणी दिल्ली का यह एरिया दिल्ली वालों के लिए ना सिर्फ घूमने- फिरने के लिए बल्कि बढ़ते प्रदूषण को संतुलित करने के लिए भी बेहद कारगर है. यहां के हिरण इतने फ्रेंडली हो गए हैं जो लोगों को देखकर कहीं नहीं भागते हैं,बिल्कुल पालतू हिरण की तरह वह लोग को देखकर खड़े रहते हैं. लोगों का कहना है कि इस पार्क का एक लंबा इतिहास रहा है. लिहाजा इसे बिल्कुल बंद नहीं करना चाहिए.