EWS Quota Verdict: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को सामान्य वर्ग के लोगों को दाखिलों और सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण प्रावधान (EWS Reservation) करने वाले 103वें संविधान संशोधन की वैधता को बरकरार रखा. सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस यूयू ललित (UU Lalit) की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच ने दो के मुकाबले तीन मतों के बहुमत से फैसला सुनाया.


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10 प्‍वाइंट में समझें ईडब्ल्यूएस आरक्षण सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला


1. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दाखिलों और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने वाले 103वें संविधान संशोधन की वैधता को दो के मुकाबले तीन मतों के बहुमत से बरकरार रखा.


2. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपने फैसले में कहा कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण (EWS Reservation) संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन नहीं करता.


3. चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस रवींद्र भट्ट ने सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण (EWS Reservation) दिए जाने के खिलाफ फैसला सुनाया है, जबकि जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस जेबी पारदीवाला ने पक्ष में फैसला सुनाया.


4. सुनवाई की शुरुआत में चीफ जस्टिस यू यू ललित (CJI UU Lalit) ने कहा कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण (EWS Reservation) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर चार विभिन्न फैसले हैं.


5. ईडब्ल्यूएस आरक्षण (EWS Reservation) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला पढ़ते हुए जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने कहा कि 103वें संविधान संशोधन को संविधान के मूल ढांचे को भंग करने वाला नहीं कहा जा सकता.


6. जस्टिस बेला एम त्रिवेदी ने अपने फैसले में कहा कि 103वें संविधान संशोधन को भेदभाव के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता.


7. इसके बाद जस्टिस जेबी पारदीवाला ने भी जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस बेला त्रिवेदी के विचारों से सहमति जताई और संशोधन की वैधता को बरकरार रखा.


8. जस्टिस एस रवींद्र भट ने अपना अल्पमत का विचार व्यक्त करते हुए ईडब्ल्यूएस आरक्षण (EWS Reservation) संबंधी संविधान संशोधन पर असहमति जताई और उसे रद्द कर दिया.


9. चीफ जस्टिस यूयू ललित (CJI UU Lalit) ने जस्टिस रवींद्र भट के विचार से सहमति व्यक्त की. सीजेआई यूयू ललित ने भी आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग के लोगों को आरक्षण देने के फैसले को खिलाफ फैसला सुनाया है और कहा है कि SC /ST/ OBC समुदाय को आर्थिक आधार पर आरक्षण से बाहर रखना भेदभावपूर्ण है.


10. सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस यूयू ललित (UU Lalit) की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच ने दो के मुकाबले तीन मतों के बहुमत से फैसला सुनाया. इस लिहाज से ये फैसला 3:2 के बहुमत से माना जाएगा.
(इनपुट- न्यूज एजेंसी भाषा)


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