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ग्वालियर: देश का सबसे बड़ा किला 'मान सिंह पैलेस' खुद में समेटे है सदियों का इतिहास

ग्वालियर की ऐतिहासिक धरोहरों की भव्यता को देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से यहां का रुख करते हैं.

ग्वालियर: देश का सबसे बड़ा किला 'मान सिंह पैलेस' खुद में समेटे है सदियों का इतिहास
हवाई मार्ग से ग्वालियर के लिए दिल्ली, भोपाल, इंदौर और मुंबई से नियमित उड़ानें मौजूद हैं. (फाइल फोटो)

दिव्यांश शर्मा/ग्वालियर: देश की राजधानी दिल्ली से तकरीबन 350 किमी दूर स्थित है मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक शहर ग्वालियर. इतिहास के पन्नों को समटे ग्वालियर के पर्यटन स्थल और स्मारक विश्वविख्यात है. देश और विदेश के लाखों सैलानी हर साल इनके दीदार के लिए यहां पहुंचते हैं. इस फेहरिस्त में ग्वालियर के मानचित्र पर मान सिंह पैलेस का नाम भी शुमार है. जहां प्रतिदिन 2000 से ज्यादा पर्यटक आते हैं. 

जानिए मान सिंह पैलेस का इतिहास
पैलेस का निर्माण तोमर राजवंश के राजा मान सिंह तोमर ने 15 वीं शताब्दी में करवाया था.
राजवंशों के बाद मान सिंह पैलेस पर राजपूतों का राज रहा.
इसके बाद मुग़ल और फिर मराठाओं का यहां राज रहा.
ब्रिटिश हुकूमत के बाद पैलेस की बागडोर सिंधिया राज परिवार ने संभाली.

ऐसा क्या खास है मान सिंह पैलेस में?
मान सिंह पैलेस 300 फीट ऊंचा है.
बाहरी और पैलेस के अंदर के हिस्से में नीली, पीली, हरी, सफेद टाइल्स से बनी कलाकृतियां है.
मान सिंह महल में कुल चार तल हैं. तीसरी मंजिल में कई कक्ष और दो आंगन हैं.
जालीदार दीवारों से बना संगीत कक्ष पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. राजा मानसिंह के परिवार की महिलाएं यहां संगीत सीखती थी.
कक्ष की बनावट और दीवारों पर चित्रकारी को देखकर आप 15वीं शताब्दी की अद्भूत कला से रुबरु हो सकेंगे.
महल के अंदर एक कारागृह भी है. इतिहासकारों के मुताबिक इसी कारागृह में औरंगजेब ने अपने भाई मुराद को मौत के घाट उतारा था.

 

बदलते वक्त के साथ ग्वालियर की तस्वीर बदली उद्योगों ने अपने पैर जमाए. आधुनिकता के रंग में शहर के लोग रच बस गए. नहीं बदली तो यहां की ऐतिहासिक धरोहरों की भव्यता. जिसे देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से ग्वालियर का रुख करते हैं.

कैसे पहुंचें ग्वालियर
हवाई मार्ग से ग्वालियर के लिए दिल्ली, भोपाल, इंदौर और मुंबई से नियमित उड़ानें मौजूद हैं. यह रेल मार्ग से भी देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है.

महत्वपूर्ण शहरों से दूरी
नई दिल्लीः 327 किलोमीटर
भोपालः 430 किलोमीटर
मुंबईः 1080 किलोमीटर
चेन्नईः 1867 किलोमीटर
कोलकाताः 1261 किलोमीटर